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US Intelligence Base Pine Gap: ऑस्ट्रेलिया में बना है अमेरिका का पाइन गैप बेस पहाड़ों के बीच से रखता है रूस चीन पर नजर क्या होता है अंदर

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फाइव आइज (Five Eyes) खुफिया गठबंधन में अमेरिका, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं. इसके अलावा भी अमेरिका के पास एक बेस है जो ऑस्ट्रेलिया के एकदम बीच में मौजूद है. आइए जानें कि पाइन गैप बेस क्या क…और पढ़ें

ऑस्ट्रेलिया में बना है US का बेस, पहाड़ों के बीच से रखता है रूस-चीन पर नजर

ऑस्ट्रेलिया में बना पाइन गैप बेस दुश्मनों की निगरानी करता है.

हाइलाइट्स

  • पाइन गैप बेस ऑस्ट्रेलिया में स्थित है
  • यह अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया द्वारा संचालित सैटेलाइट सिग्नल बेस है
  • पाइन गैप से रूस और चीन पर नजर रखी जाती है

कैनबरा: दुनिया में कई देश एक दूसरे के साथ खुफिया जानकारी साझा करते हैं. इसी तरह का एक ग्रुप ‘फाइव आइज’ है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका शामिल हैं. इन देशों की 20 से ज्यादा एजेंसियां खुफिया जानकारियां एक दूसरे से शेयर करती हैं. निगरानी के अलावा यह सिग्नल इंटेलिजेंस भी शेयर करती हैं. अब इसी फाइव आइज में से कनाडा को अमेरिका निकालना चाहता है. खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप कनाडा ने भारत पर लगाया था. कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने दावा किया था कि भारत के हाथ होने से जुड़ी जानकारी उन्हें इसी फाइव आइज ग्रुप से मिली थी.

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में व्हाइट हाउस के शीर्ष अधिकारी और राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी सलाहकार पीटर नवारो ने कनाडा को फाइव आइज से बाहर करने का प्रस्ताव रखा है. हालांकि ऐसा होना बेहद मुश्किल है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कनाडा पर दबाव बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है. जासूसी करने के लिए अमेरिका के पास ऑस्ट्रेलिया में एक खुफिया बेस भी मौजूद है. पहाड़ों में बने इस बेस का नाम पाइन गैप है. यह अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की ओर से संचालित होने वाला सैटेलाइट सिग्नल बेस और अर्थ स्टेशन है. यहां से मिलने वाली कई जानकारी फाइव आईज देशों के साथ शेयर होती है. दुनिया भर में अमेरिका की खुफिया और सैन्य गतिविधियों को मदद देने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. हालांकि ऑस्ट्रेलिया में इस कारण कई बार विवाद भी देखा गया है.

पाइन गैप में क्या होता है?
पाइन गैप अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की ओर से बनाई गई खुफिया सैटेलाइटों के लिए ग्राउंड स्टेशन के रूप में काम करता है. सीआईए के लिए यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण खुफिया स्टेशनों में से एक है. पाइन गैप में अब 38 सैटेलाइट डिश हैं. पिछले साल रिपोर्ट आई थी कि इस बेस का विस्तार किया जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में 10 नए सैटेलाइट एंटेना या डिश का निर्माण किया गया. इस स्टेशन में मिसाइल लॉन्च डिटेक्शन सिस्टम भी है, जो अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए खतरा बनने वाली मिसाइलों की जानकारी भेजता है.

रिपोर्ट के मुताबिक इस बेस पर दोनों देशों के 800 कर्मचारी हैं. चैनल 10 की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व NSA कर्मचारी डेविड रोसेनबर्ग ने बताया था कि जब आप यहां पहुंचते हैं तो ज्यादातर लोग कंप्यूटर पर बैठे दिखेंगे, जो हेडसेट लगाकर हर पल निगरानी कर रहे होते हैं. निगरानी के तौर पर किसी की बातचीत सुनना या फिर किसी भी तरह के हथियारों की डिटेल इसमें शामिल हो सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि जब वह पाइन गैप में थे तब इसका नेतृत्व एक वरिष्ठ सीआईए अधिकारी कर रहे थे.

क्यों ऑस्ट्रेलिया में बनाया बेस?
एक सवाल मन में यह भी आएगा कि आखिर अमेरिका ने इतना दूर एक बेस क्यों बनाया? दरअसल ऑस्ट्रेलिया में बेस बनाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. यहां से उन अमेरिकी सैटेलाइटों को नियंत्रित किया जाता है जो दुनिया के एक तिहाई हिस्से की जासूसी करते हैं. चीन, उत्तर कोरिया, रूस के एशियाई भाग के ऊपर से ये गुजरती है. पाइन गैप मध्य ऑस्ट्रेलिया में बना है. इसे इतनी दूर इसलिए बनाया गया है, ताकि समुद्र में घूम रहे दुश्मन देशों के जासूसी जहाज इसके सिग्नल न पकड़ सकें.

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