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Trump, Putin And Jinping: ट्रंप के दिमाग की दाद देनी पड़ेगी! चला ऐसा दांव, पुतिन भी हां में हां मिलाने लगे, अकेले पड़ गए जिनपिंग

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Donald Trump Offer To Russia & China: अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक प्रस्ताव सामने रखा था. रूसी राष्‍ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रस्ताव का ‘स्वागत’ किया, लेकिन चीन ने इसे सिरे से खारिज कर द…और पढ़ें

ट्रंप ने चला ऐसा दांव, पुतिन भी हां में हां मिलाने लगे; अकेले पड़ गए जिनपिंग

ट्रंप के प्रस्ताव पर रूस राजी लेकिन चीन नहीं माना.

हाइलाइट्स

  • ट्रंप ने अमेरिका, रूस और चीन को रक्षा बजट 50% कम करने का प्रस्ताव दिया.
  • पुतिन ने ट्रंप के प्रस्ताव का स्वागत किया, चीन ने खारिज किया.
  • चीन ने अपनी सैन्य जरूरतों को अलग बताते हुए प्रस्ताव ठुकराया.

नई दिल्ली: जियोपॉलिटिक्स में रुचि रखने वालों के लिए 2025 चौंकाने वाला रहा है. शायद ही किसी ने सोचा हो कि एक-दूसरे से खार खाने वाले अमेरिका और रूस एक पाले में खड़े नजर आएंगे. डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्‍ट्रपति बनने के बाद समीकरण बड़ी तेजी से बदले हैं. ट्रंप और रूसी राष्‍ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इन दिनों एक ही पेज पर दिख रहे हैं. अब हालात ऐसे बन गए हैं कि अमेरिका और रूस मित्र जैसे लग रहे हैं, जबकि चीन खुद को अलग-थलग पा रहा है. ताजा मुद्दा डिफेंस बजट में कटौती का है. इस मुद्दे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दिलचस्प मोड़ ला दिया है. रूस और अमेरिका पहली बार किसी प्रस्ताव पर सहमत नजर आ रहे हैं, जबकि चीन अलग-थलग पड़ता दिख रहा है.

ट्रंप की अपील, पुतिन की सहमति

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका, रूस और चीन को अपने रक्षा बजट का 50% कम करने का प्रस्ताव दिया है. हैरानी की बात यह है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस सुझाव को ‘अच्छा प्रस्ताव’ बताया है. पुतिन ने कहा, “अगर अमेरिका अपने डिफेंस बजट में 50% कटौती करता है, तो हम भी तैयार हैं. फिर अगर चीन भी सहमत हो, तो यह बड़ा कदम होगा.

जब उनसे चीन की प्रतिक्रिया पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “मैं चीन की तरफ से नहीं बोल सकता, लेकिन रूस इस पर बातचीत के लिए तैयार है.” रूस की यह सहमति इस ओर इशारा करती है कि यूक्रेन युद्ध को लेकर जल्द ही कोई समझौता हो सकता है.

चीन का इनकार: ‘हमारी जरूरतें अलग हैं’

चीन ने ट्रंप के प्रस्ताव को सीधे खारिज कर दिया है. बीजिंग का कहना है कि उसकी सैन्य जरूरतें अलग हैं और वह अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “हमारा डिफेंस बजट सीमित और आवश्यक है. यह हमारी संप्रभुता और विकास हितों की रक्षा के लिए जरूरी है.” चीन ने यह भी साफ कर दिया कि वह किसी आर्म्स रेस में नहीं है, लेकिन अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करना जारी रखेगा.

डिफेंस पर लगातार खर्च बढ़ा रहा चीन

  • 2024 में चीन ने अपना रक्षा बजट 7.2% बढ़ाया.
  • $236 बिलियन के साथ वह दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट वाला देश है.
  • अमेरिका इस सूची में सबसे आगे है, जबकि रूस का सैन्य खर्च GDP का 9% तक पहुंच चुका है.

ट्रंप की रणनीति: मिलकर कम करें खर्च

डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि अमेरिका, रूस और चीन को अपने सैन्य खर्चों को दूसरी जरूरतों पर खर्च करना चाहिए. उन्होंने कहा, “हम लगभग $1 ट्रिलियन डिफेंस पर खर्च कर रहे हैं, जबकि चीन भी $400 बिलियन तक पहुंच जाएगा. यह बेवजह की दौड़ है.” ट्रंप परमाणु हथियारों में भी कटौती की अपील कर चुके हैं. उनका कहना है, “हमारे पास इतने हथियार हैं कि दुनिया को 100 बार तबाह कर सकते हैं.”

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