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SIPRI रिपोर्ट: अमेरिका सबसे बड़ा हथियार निर्यातक, यूक्रेन सबसे बड़ा आयातक

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SIPRI REPORT: यूक्रेन पर नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति इस हथियारों की रेस पर फुलस्टॉप लगा सकती है. यूक्रेन 2020-2024 के बीच दुनिया के टॉप 10 हथियार आयातक देशों में इकलैता यूरोपीय देश था. रिपोर्ट मे…और पढ़ें

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हाइलाइट्स

  • यूक्रेन 2020-2024 में सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा.
  • अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बना.
  • भारत ने आत्मनिर्भरता के चलते हथियार आयात में कटौती की.

SIPRI REPORT: पिछले 3 साल से ज्यादा से रूस और यूक्रेन का युद्ध चल रहा है. 2 फरवरी 2022 को शुरू हुई यह जंग इतनी लंबी खीचने की कूबत अकेले यूक्रेन की नहीं थी. अमेरिका और नॉटो देश लगातार हथियार देते रहे और जंग को आगे बढ़ती रही. जब जंग का मौहोल दुनिया भर में है तो वह देश भी अपने हथियारों के जखीरे को बढ़ाते रहे. खास तौर पर अमेरिका और इनके समर्थित देश. यूरोप के देश इसमें शामिल हैं. और जैसा सबसे सोचा था वही हुआ. अमेरिका की हथियार कंपनियों की चांदी हो गई. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) का एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियारों का एक्पोर्टर बन गया. इन चार साल में यूक्रेन सबसे बड़ा खरीदार बन गया. यूक्रेन ने 2015 से लेकर 2019 तक जितना हथियार की खरीद की 2020 से 2024 तक इसकी खरीद 100 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई.

हथियार एक्सपोर्ट का लगभग 9 प्रतिशन यूक्रेन को गया है
दुनिया के 35 देशों ने यूक्रेन को हथियारों से उसकी मदद की. जिसमें सबसे आगे है अमेरिका. दुनिया के कुल आयात का 8.8 फीसदी यूक्रेन को मिली. इसमें सबसे ज्यादा अमेरिका की तरफ से 45 फीसदी, जर्मनी की तरफ से ने 12 फीसदी और पोलैंड ने 11 फीसदी हिस्सेदारी रही. यूक्रेन साल 2020-24 के दौरान दुनिया के 10 हथियार खरीदने वाले देशों में टॉप पर रहा.

यूरोपीय NATO सदस्य देशों ने जमकर खरीदे हथियार
साल 2015–2019 और 2020–2024 के बीच यूरोप के NATO सदस्य देशों के हथियारों के खरीद में 105 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई. इस खरीद का सबसे बडा हिस्सा अमेरिका से किया गया. अमेरिका ने इन हथियारों का कुल 64 फीसदी सप्लाई की. यह साल 2015–2019 के मुकाबले काफी ज्यादा था. यूरोप के देशों को हथियारों की बिक्री करने वाले बाकी देशों में 6.5-6.5 फीसदी हिस्सा फ्रांस और दक्षिण कोरिया, 4.7 प्रतिशत जर्मनी और 3.9 फीसदी इजराइल का रहा. इसके अलावा कई यूरोपीय देशों ने इस टाइम पीरियड में अपने हथियार खरीद में जबरदस्त बढ़ोतरी की. रूस यूक्रेन के बीच उसकी मदद कर रहे देशों पर भी जंग का खतरा कभी भी मंडरा सकता है. इसलिए उन देशों ने खुद को मजबूत किया.

भारत ने विदेशों से खरीद की कम
आत्मनिर्भर भारत मुहीम के चलते अब भारत अब धीरे धीरे हथियारों के खरीद में कटौती कर रहा है. भारत हथियारों के खरीद में कभी दूसरे नंबर पर हुआ करता था. SIPRI की रिपोर्ट के मुताबाक
इस खरीद की वजह चीन और पाकिस्तान की दोहरी चुनौती थी. पिछले 4 साल में दुनिया भर के कुल हथियारों के खरीद का 8.3 फासदी भारत का रहा. यह साल 2015 से 2019 में 9.1 प्रतिशत था. तकरीबन 9.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. यह एक अच्छा संकेत है भारत के आत्मनिर्भर मुहीम के लिए. साल 2020 से 2024 के बीच भारत के रक्षा खरीद का सबसे बड़ा 36 फीसदी हिस्सा रूस से हुआ. यह प्रतिशत साल 2015-19 के दौरान 55 प्रतिशत तो और साल 2010- 2014 के बीच 72 प्रतिशत रहा था. रूस के बाद 33 फीसदी खरीद फ्रांस और 13 प्रतिशत इजरायल से किया गया. पाकिस्तान में हथियारों के खरीद में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. चीन से पाकिस्तान ने 81 फीसदी अपनी हथियार खरीद की है. पाकिस्तान चीन का प्रमुख खरीदार बन गया. साल 2015 से 2019 के बीच यह खरीद 74 प्रतिशत था.

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