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Russia Shadow Fleet पर G7 में फूट US ने Canada के Proposal को किया Veto

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US News: अमेरिका ने जी-7 में कनाडा के उस प्रस्ताव पर वीटो कर दिया, जिसमें रूस के ‘शैडो फ्लीट’ पर लगाम कसने के लिए टास्क फोर्स बनाने की मांग थी. अमेरिका ने रूस पर सख्त भाषा हटाने और चीन पर कड़ा रुख अपनाने पर जोर…और पढ़ें

रूस के खिलाफ कनाडा ने चली बड़ी चाल तो US ने किया वीटो, मुंह ताकते रह गए ट्रूडो

रूस के खिलाफ कनाडा प्रस्ताव लाया था. (Reuters)

हाइलाइट्स

  • अमेरिका ने कनाडा के प्रस्ताव पर वीटो किया
  • कनाडा ने रूस की ‘शैडो फ्लीट’ पर टास्क फोर्स की मांग की थी
  • अमेरिका ने रूस पर सख्त भाषा हटाने पर जोर दिया

वॉशिंगटन: रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों में एक बार फिर फूट देखने को मिली है. अमेरिका ने अब जी-7 में कनाडा के एक प्रस्ताव पर वीटो कर दिया. कनाडा ने प्रस्ताव दिया था कि रूस के कथित ‘शेडो फ्लीट’ से निपटने के लिए एक टास्क फोर्स बनाने की जरूरत है. रूस के ऑयल टैंकर वाले यह शैडो फ्लीट बाल्टिक सागर और अन्य जगहों पर आराजकता फैला रही है. कनाडा वर्तमान में जी-7 यानी ग्रुप ऑफ सेवन की अध्यक्षता कर रहा है. उसने यह प्रस्ताव जी-7 के विदेश मंत्रियों की क्यूबेक में होने वाली बैठक से पहले रखा था.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले पर एक संयुक्त बयान जारी करने के लिए वार्ता के दौरान अमेरिका ने चीन के खिलाफ भाषा को और मजबूत करने पर जोर दिया, जबकि रूस के खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को कमजोर कर दिया. रूस का शैडो फ्लीट पुराने तेल टैंकरों से बना है. पश्चिमी आर्थिक प्रतिबंधों से बचाने के लिए इनकी पहचान छुपाई जाती है. प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखने के लिए एक टास्क फोर्स बनाने की बात कही गई थी, जिसपर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने वीटो कर दिया.

कई शब्द बदलने की मांग
ब्लूमबर्ग को मिले जी-7 के ड्राफ्ट के मुताबिक अमेरिका ने ‘प्रतिबंध’ शब्द हटाने के साथ-साथ यूक्रेन में रूस की ‘युद्ध जारी रखने की क्षमता’ वाले शब्दों को हटाने के लिए लॉबिंग की. अमेरिका ने इसे राजस्व कमाने वाले शब्दों से बदलने का प्रस्ताव दिया. ट्रंप प्रशासन के आने के बाद से ही लगातार अमेरिका रूस के प्रति नरम रुख अपना रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए अमेरिका ने रूस से बातचीत की थी.

रूस पर क्यों मेहरबान अमेरिका?
जी-7 देशों का कोई भी बयान तब तक अंतिम नहीं होता जब तक कि सदस्य देशों की सहमति से उन्हें जारी नहीं किया जाता, इसलिए इस मामले में बातचीत की अभी और गुंजाइश है. शिखर सम्मेलन के अंत में जारी होने वाले बयान में बदलाव हो सकता है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने जी-7 के अन्य सदस्यों को बताया कि वे इस प्रस्ताव को इसलिए खारिज कर रहा है, क्योंकि वाशिंगटन बहुपक्षीय संगठनों में अपनी स्थिति का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है, जिसके चलते वह किसी भी नई पहल में शामिल नहीं हो सकता. इस बीच यूरोपीय देश बाल्टिक सागर में मास्को के तेल निर्यात वाले टैंकरों को जब्त करने की योजना पर चर्चा कर रहे हैं.

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