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Crazxy Movie Review: सच में क्रेजी करने वाली है सोहम शाह की फिल्म

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Crazxy Movie Review: सोहम शाह ने अपने प्रोडक्शन हाउस सोहम शाह फिल्म्स के जरिए एक ऐसी फिल्म बनाई है जिसे जरूर देखना चाहिए. ‘क्रेजी’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है और यह एक शानदार फिल्म है जो आने वाले समय में भ…और पढ़ें

Crazxy Movie Review: सच में क्रेजी करने वाली है सोहम शाह की फिल्म

‘तुंबाड’ के बाद सोहम शाह को ‘क्रेजी’ में देखना पसंद आएगा.

क्रेजी 4

28 फरवरी 2025|हिंदी93 मिनट|सस्पेंस ड्रामा

Starring: सोहम शाह और टीनू आनंदDirector: गिरीश कोहलीMusic: विशाल भारद्वाज

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ट्रेलर देखने के बाद ही मुझे ऐसा लगने लगा था कि फिल्म ‘क्रेजी’ एक अलग तरह की फिल्म होगी और ऐसा हुआ भी… सोहम शाह की फिल्म ‘क्रेजी’ आज (28 फरवरी) सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. वह एक बेहतरीन एक्टर हैं. इस फिल्म में उनका काम तारीफ के काबिल है. उन्होंने खुद अपने प्रोडक्शन हाउस सोहम शाह फिल्म्स के तले ये बेहतरीन फिल्म बनाई है, जिसे गिरीश कोहली ने डायरेक्ट किया है और अगर मैं सोहम की एक्टिंग के साथ-साथ गिरीश के निर्देशन की तारीफ न करूं, तो ये एक अन्याय होगा. सोहम और गिरीश कोहली सिर्फ 93 मिनट की फिल्म ‘क्रेजी’ से सबको अपना दीवाना बनाने वाले हैं.

‘तुंबाड़’ के 7 साल बाद ‘क्रेजी’ में सोहम शाह को देखना बहुत बढ़िया लगा. उन्होंने बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी की है. यह पूरी फिल्म सोहम शाह के किरदार ‘डॉ. अभिमन्यु सूद’ पर ही आधारित है. फिल्म में उनके अलावा कोई और किरदार नहीं है, आपको सिर्फ फोन पर टीनू आनंद की आवाज सुनाई देगी, और वो एक बार फोटो में नजर आते हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें कोई हीरोइन नहीं है, कोई विलेन नहीं है, कोई को-स्टार नहीं है, तो क्या फिल्म में अकेले सोहम शाह को देखने जाएं? तो मैं कहूंगा हां, क्योंकि यह ऐसी फिल्म है जिसमें सोहम के अलावा किसी और की जरूरत ही नहीं है. इस फिल्म को देखने के बाद आपको हॉलीवुड की फिल्में याद आ जाएंगी.

कहानी:
फिल्म की कहानी ‘डॉ. अभिमन्यु सूद’ नाम के एक डॉक्टर पर आधारित है, जो अपनी पत्नी से तलाक ले चुका है और उसकी एक बेटी है जो उसकी पूर्व पत्नी के साथ रहती है. इस फिल्म की कहानी सुबह से शुरू होती है और रात तक खत्म हो जाती है, यानी आप इसे एक दिन की कहानी कह सकते हैं. अभिमन्यु का एक ऑपरेशन फेल होने की वजह से एक 12 साल के बच्चे की मौत हो जाती है और अगर परिवार कोर्ट में केस करता है तो उसका जेल जाना तय है. ऐसे में वह बच्चे के परिवार को 5 करोड़ रुपए देने के लिए राजी हो जाता है. वह 5 करोड़ का इंतजाम करता है और एक सुबह पैसे देने के लिए अपनी गाड़ी में निकल जाता है, लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा होता है कि वह एक के बाद एक कई चक्रव्यू में फंसता चला जाता है. फिल्म की शुरुआत में बनाया गया सस्पेंस अंत तक बना रहता है. तो अभिमन्यु किस-किस तरह के चक्रव्यू में फंसता है, यह जानने के लिए आपको सिनेमाघर जाकर पूरी फिल्म देखनी पड़ेगी.

एक्टिंग:
फिल्म में आपको सिर्फ सोहम शाह ही नजर आएंगे. अब आप खुद ही सोचिए, एक अकेला एक्टर साथ में सिर्फ एक कार और एक फोन… इसके अलावा आपको फिल्म में और कुछ भी देखने को नहीं मिलेगा, लेकिन आप सोहम की एक्टिंग के दीवाने हो जाएंगे. इतना तो तय है कि सोहम ने फिल्म में बेहतरीन काम किया है. हर सीन में उनकी एक्टिंग देखकर आपको अच्छा लगेगा. उनके इम्प्रैशन कमाल के लग रहे हैं. अगर किसी इंसान के सामने एक साथ कई सारी परेशानियां आ जाएं, तो वो क्या करेगा? और सोहम ने उसे पर्दे पर करके दिखाया है.

डायरेक्शन:
फिल्म के निर्देशक गिरीश कोहली हैं और आपको सोहम की एक्टिंग के साथ-साथ उनका काम भी पसंद आएगा. गिरीश ने जिस तरह से इस फिल्म का निर्देशन किया है वो वाकई कमाल का है. उन्होंने छोटी से छोटी चीज को भी बेहतरीन तरीके से शूट किया है. फिल्म में कई सीन ऐसे हैं जो हॉलीवुड फिल्मों को टक्कर दे सकते हैं, जैसे- एक जगह सोहम सड़क से गाड़ी उतारकर खेतों में चले जाते हैं और एक सीन में वो चींटी के बिल के अंदर हाथ डालते हैं.

म्यूजिक:
संगीत इस फिल्म की जान है. इस फिल्म को विशाल भारद्वाज ने संगीत दिया है. फिल्म के गाने अच्छे हैं, जिनमें से एक है रीक्रिएटेड गाना ‘गोली मार भेज में’.’ओ पापा’ गाना आपको भावुक कर देगा, जो पिता और बेटी पर बेस्ड है. बैकग्राउंड स्कोर दमदार है. हर सीन में बैकग्राउंड म्यूजिक आपको अंदर से झकझोर देगा.

कमियां:
वैसे तो फिल्म में मुझे कोई ऐसी कमी नहीं दिखी, जो फिल्म को नुकसान पहुंचा सके, लेकिन हां फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो आपको लग सकता है, लेकिन वहां भी आप बोर नहीं होंगे. चूंकि इस फिल्म को हॉलीवुड तर्ज पर बनाया गया है इसलिए इसमें गाने भी कोई ऐसे नहीं है जिसे आप लंबे समय तक गुनगुनाना पसंद करेंगे, फिल्म में जो गाने डाले गए हैं वह बस फिल्म देखने तक ही आपको अच्छे लगेंगे.

देखें या न देखें?
वैसे फाइनल वर्डिक्ट तो मैंने ऊपर ही दे दिया है कि इस फिल्म को आप एक बार जरूर देखें. ऐसी फिल्में बहुत कम बनती हैं क्योंकि ऐसी फिल्में बनाने में बहुत जोखिम होता है और सोहम ने यह जोखिम उठाया है, जिसमें वह सफल भी हुए हैं. इसमें कोई शक नहीं है कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा के परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है. सस्पेंस के साथ-साथ फिल्म में एक ऐसा संदेश छिपा है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा. सोहम शाह की एक्टिंग और गिरीश के निर्देशन के लिए मेरी तरफ से 4 स्टार.

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