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एलन मस्क: अमेरिकी मीडिया में विवादित व्यक्तित्व का विश्लेषण.

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जिस तरह एलन मस्क अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विश्वस्त सहयोगी के रूप में काम कर रहे हैं. उसकी बहुत आलोचना हो रही है. हालांकि ट्रंप ने अपनी कैबिनेट की पहली मीटिंग में उन्हें हीरो के तौर पर पेश किया.

अमेरिकी मीडिया में एलन मस्क की जमकर आलोचना क्यों हो रही, बताये जा रहे उन्मादी

हाइलाइट्स

  • एलन मस्क की ट्रंप से नजदीकी पर आलोचना हो रही है
  • मस्क के काम के घंटे और जीवनशैली पर सवाल उठे.
  • मस्क के असुरक्षित बचपन और व्यक्तित्व पर भी चर्चा हो रही है.

आजकल अमेरिकी मीडिया में एलन मस्क को लेकर बहुत ढेर सारी बातें छप रही हैं. उनके व्यक्तित्व का हर पहलू से मूल्यांकन किया जा रहा है. कुछ उन्हें खराब बचपन देखा असुरक्षित बच्चा मानते हैं तो कुछ बिगडैल अरबपति तो कुछ अपनी ही मनवाने वाला अहंकारी शख्स. आइए जानते हैं कि मस्क के बारे प्रकाशित कुछ ओपिनियन आर्टिकल्स के अंश

द न्यूयार्क टाइम्स में एरिक बेकर में एक ओपिनियन पीस मस्क को लेकर लिखा है. वह हार्वर्ड में इतिहासकार हैं और कई पुस्तकों के लेखक. वह लिखते हैं, एलन मस्क को वीकेंड से नफरत है. एक दशक से भी ज़्यादा समय से दुनिया के सबसे अमीर आदमी ने “दुनिया को बदलने के लिए” हफ़्ते में कम से कम 80 घंटे काम करने की ज़रूरत बताई है – “कभी-कभी तो 100 से भी ज़्यादा घंटे”. वह इसी में आगे लिखते हैं कि अमेरिका में अरबपतियों में ये दिखाने या ये जताने में होड़ सी है कि वो कितने श्रेष्ठ हैं, खुद कितनी बड़ी महाशक्ति जैसे हैं.

इसी में आगे लिखा, ज्यादातर अमेरिकी अरबपति आत्ममुग्धता और ये दिखाने के लिए जाने जाते रहे हैं कि अमेरिकी संस्कृति में कितना बड़ा काम कर रहे हैं. जेफ बेजोस कहते थे कि अमेजन के शुरुआती वर्षों में वे सप्ताह के हर दिन 12 घंटे काम करते थे. एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक सुबह 4:30 बजे ईमेल भेजने के लिए मशहूर हैं. एलन मस्क ये दिखाते हैं कि वह ना केवलज्यादा काम करते हैं बल्कि अमीर होने के बाद भी आफिस के फर्श पर सो जाते हैं.

मस्क राष्ट्रीय जीवन पर खुद को थोप रहे हैं
इसी ओपिनियन आर्टिकल में बेकर आगे लिखते हैं, कथित रूप से व्यस्त अरबपतियों के इस वर्ग ने यह क्यों मान लिया है कि उन्हें हमारे राष्ट्रीय जीवन पर हावी होने का अधिकार है. जो ये दिखाते हैं कि जो वो कर रहे हैं वही सही है और दूसरों को भी ऐसा ही करना चाहिए. अब मस्क जैसे अरबपति इस तर्क को सरकार तक विस्तारित कर रहे हैं.

द न्यूयार्क टाइम्स ने मस्क के कामों को “अधिक खतरनाक” बताया है, जो सरकार की नैतिकता और संरचना को कमजोर कर सकते हैं.

मस्क का खराब बचपन उन्हें उन्माद पैदा करता है
कॉलमिस्ट डेविड ब्रुक्स  द न्युयार्क टाइम्स में ही अपने कॉलम में लिखते हैं, मस्क की नई जीवनी के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका में उनका बचपन बहुत ही कष्टमय रहा, जहां उनके पिता ने उन्हें बार-बार यह कहते हुए मौखिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया कि वे बेकार हैं. उनका कोई दोस्त नहीं था. वह ऐसी दुनिया में रहते थे जहां या तो आपको धमकाया जाता था या डराया जाता था. ऐसी पृष्ठभूमि से अस्तित्वगत असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है, जो कुछ लोगों में जीवन भर आत्म-संदेह पैदा कर सकती है या दूसरों में दूसरों को गलत साबित करने की उन्मादी महत्वाकांक्षा पैदा कर सकती है. मस्क अब इसी का शिकार होकर उन्मादी हो गए हैं.

वह कल्पना की दुनिया में जी रहे हैं
मस्क ने अपने कॉलेज के दोस्तों में एक इसाकसन को बताया, “वह एक ऐसा रॉकेट बनाने की बना रहा है, जिससे मंगल ग्रह पर जा सकते हैं. फिर उनके इस दोस्त को जब स्पेसएक्स के काम करने का मौका मिला. जब उसने बोर्ड मीटिंग में हिस्सा लिया तो हैरान रहा गया. उसने कहा, “वे मंगल ग्रह पर एक शहर बनाने की योजनाओं और वहां लोग क्या पहनेंगे, इस पर गंभीरता से चर्चा कर रहे थे. हर कोई बस ऐसे व्यवहार कर रहा है जैसे यह पूरी तरह से सामान्य बातचीत हो.”

वाल्टर इसाकसन ने अपनी किताब ‘मस्क’ में लिखा, जिसमें निचोड़ निकला कि बचपन में जब मस्क एक असुरक्षा भरे बचपन में था तो वह कल्पना और कॉमिक्स की दुनिया में जीने लगा. इसे सच समझने लगा. आज भी वह वैसा ही कर रहा है.

मस्क ग्लोबल समस्या हैं
अल जजीरा में कॉलमिस्ट सोमदीप सेन लिखते हैं कि मस्क ग्लोबल समस्या हैं.सोमदीप रोस्किल्डे विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय विकास अध्ययन के एसोसिएट प्रोफेसर हैं. उन्होंने लिखा, ऐसा प्रतीत होता है कि यह अति-दक्षिणपंथी अरबपति अमेरिका में जो कुछ हासिल कर चुका है, उसे वह पूरे विश्व में दोहराने का प्रयास कर रहा है.

वह अरबपति ठग हैं
डेमोक्रेटिक पार्टी की चर्चित नेता एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ ने अपने एक नए वीडियो में कहा, ” एलोन मस्क कोई वैज्ञानिक नहीं है, वह कोई इंजीनियर नहीं है. वह बहुत सारे पैसे वाले एक अरबपति ठग हैं.” उन्होंने कहा, “उसके पास कोई ऐसी अच्छी बैकग्राउंड नहीं कि उन पर विश्वास किया जाए.”
AP News ने मस्क और ट्रंप के संयुक्त प्रयासों को अमेरिकी लोकतंत्र की नींव को हिलाने वाला बताया है. सीनेटरों ने इसे चुनौतीपूर्ण और संभावित रूप से अवैध बताया है.

टाइम मैगजीन और यूएसए टुडे ने तारीफ की
TIME मैगज़ीन ने मस्क के सरकारी खर्च में कटौती और प्रशासनिक सुधार के प्रयासों को एक बड़े “अनुकूल” बदलाव के रूप में देखा है, जो सरकारी बर्बादी को कम करने के लिए है. USA Today में एक ओपिनियन लेख में कहा गया है कि अमेरिकी लोग सरकारी खर्च में कटौती के मस्क के प्रयासों का समर्थन करते हैं.

जनता क्या कहती है
Pew Research के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि अमेरिकी वयस्कों में से 54% मस्क के बारे में नकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं.

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PM Modi France Visit: मोदी को मिल गया पुतिन सा एक और यार, मैक्रों ने तो मन मोह लिया, देख लें सबूत

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PM Modi France Visit: पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की दोस्ती गहरी हो रही है. फ्रांस दौरे पर मोदी का भव्य स्वागत हुआ और दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की.

मोदी को मिल गया पुतिन सा एक और यार, मैक्रों ने तो मन मोह लिया, खुद देख लीजिए

फ्रांस में दिखी पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की गहरी दोस्ती की झलक

हाइलाइट्स

  • पीएम मोदी का फ्रांस दौरे पर भव्य स्वागत हुआ.
  • मैक्रों ने पीएम मोदी के साथ गहरी दोस्ती दिखाई.
  • दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की.

नई दिल्ली: भारत-रूस की दोस्ती दशकों पुरानी है. समय-समय पर इसकी झलक दिखती रही है. इससे दुनिया भी वाकिफ है. पीएम मोदी ने पुतिन संग मिलकर उस दोस्ती के रंग को और गाढ़ा किया है. पुतिन की तरह ही अब पीएम मोदी को एक नया दोस्त मिला है. नाम है इमैनुएल मैक्रों. इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के राष्ट्रपति हैं. जी हां, जैसे रूस और भारत की दोस्ती के चर्चे होते हैं. अब वह दिन दूर नहीं, जब भारत-फ्रांस की दोस्ती के भी गीत गुनगुनाए जाएंगे. इसकी झलक पीएम मोदी के फ्रांस दौरे पर खूब दिखी. यहां मैक्रों ने मोदी की आवभगत में कोई कमी नहीं होने दी. फ्रांस में जहां-जहां मोदी गए, वहां-वहां साए की तरह साथ रहे.

दरअसल, कोई देश हमें कितनी इज्जत दे रहा है, यह उसकी आगवानी और हॉस्पिटालिटी के तरीकों पर निर्भर करता है. पीएम मोदी जब पेरिस एआई समिट के लिए फ्रांस गए तो वहां नजारा रूस वाला दिखा. पीएम मोदी की रूस की तरह ही फ्रांस में भी ग्रैंड वेलकम हुआ. खुद राष्ट्रपति मैक्रों पीएम मोदी के साथ पुतिन की तरह नजर आए.

समय और सम्मान की बात
जी हां, प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा का एक अनूठा पहलू था, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से उन्हें दिया गया समय और सम्मान. यह दोनों नेताओं की बेहतर आपसी समझ और गहरी दोस्ती को दर्शाता है. इसकी झलक पल-पल दिखी. यात्रा के पहले दिन राष्ट्रपति मैक्रों ने पीएम मोदी को डिनर कराया. रात्रिभोज में दोनों नेताओं ने बातचीत की. अगले दिन ‘एआई एक्शन समिट’ में भी यह सौहार्दपूर्ण माहौल जारी रहा. भारत और फ्रांस ने संयुक्त रूप से शिखर सम्मेलन की मेजबानी की.

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हर जगह साए की तरह थे
अपने घनिष्ठ संबंधों को दर्शाते हुए दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस सीईओ फोरम की मेजबानी की, जो आर्थिक सहयोग के लिए उनके साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है. दोस्ती के एक असाधारण संकेत में, दोनों नेता एक संयुक्त काफिले में और एक ही विमान में मार्सिले पहुंचे. राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए मार्सिले में रात्रिभोज की मेजबानी की. हर जगह साए की तरह मैक्रों मोदी के साथ दिखे.

मैक्रों ने मन मोह लिया
पीएम मोदी के लिए यूं तो सभी विश्व नेताओं ने सम्मान और महत्व दिखाया लेकिन जो निकटता और अपनापन मैक्रों ने दर्शाया उसका अन्य उदाहरण मिलना दुर्लभ है. मैक्रों दरअसल पीएम मोदी के दौरे को लेकर खासे उत्साहित थे. प्रधानमंत्री मोदी के पेरिस पहुंचने से पहले एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि वह और प्रधानमंत्री मोदी ‘तकनीकी संप्रभुता’ के लिए प्रयास करेंगे.

मैक्रों ने पीएम की तारीफ में क्या-क्या कहा?
फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी की तरह हमारा भी दृढ़ विश्वास है कि भारत और फ्रांस दो महान शक्तियां हैं और हमारे बीच विशेष संबंध हैं. हम अमेरिका का सम्मान करते हैं और उसके साथ काम करना चाहते हैं, हम चीन के साथ भी काम करना चाहते हैं, लेकिन किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं. मैक्रों ने कहा, ‘भारत और फ्रांस अग्रणी हैं लेकिन अमेरिका और चीन हमसे बहुत आगे हैं. हम एआई पर एक साथ काम करना चाहते हैं. पीएम मोदी भी नई टेक्नोलॉजी का फायदा उठाना चाहते हैं. लेकिन वह चाहते हैं कि यह भारत में भी हो.

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Tulsi Gabbard Interview; Bhagwat Geeta | Raisina Dialogue | तुलसी गबार्ड बोलीं-कृष्ण के उपदेश शक्ति और शांति देते हैं: अच्छे-बुरे पल में भगवत गीता पढ़ती हूं; भगवान के साथ रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र

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नई दिल्ली11 मिनट पहले

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तुलसी गबार्ड रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत आई हैं। - Dainik Bhaskar

तुलसी गबार्ड रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत आई हैं।

अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने कहा कि वे कृष्ण भक्त हैं और अपनी जिंदगी के हर अच्छे-बुरे वक्त में वे भगवद गीता में दिए उपदेशों को पढ़ती हैं। अर्जुन को दिए कृष्ण के उपदेश उन्हें दिन भर शक्ति, शांति और आराम देते हैं।

तुलसी रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत आई हैं। उससे पहले उन्होंने ANI को दिए इंटरव्यू में ये बातें कहीं…

अध्यात्म, गीता और भारत पर तुलसी की 3 मुख्य बातें…

भगवान के साथ मेरा रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र: तुलसी ने कहा कि मेरी आध्यात्मिक यात्रा और भगवान के साथ मेरा रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र है। मैं रोज यही कोशिश करती हूं कि ऐसी जिंदगी जी सकूं जो भगवान के हिसाब से बेहतर हो। और भगवान के सभी बच्चों की सेवा कर पाने से बेहतर तरीका क्या हो सकता है।

भगवत गीता के उपदेशों से मूल्यवान सीख मिलती है: मेरी जिंदगी के अलग-अलग समय में, चाहे मैं वॉर जोन रहूं या आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, हर समय में कृष्ण के उपदेश से मुझे हर बार कोई मूल्यवान सीख मिलती है। इससे मुझे सब तरह के दिनों में शांति, शक्ति और सुकून मिलता है।

भारत आकर लगता है जैसे घर आ गई हूं: तुलसी ने कहा कि भारत से मुझे बहुत प्यार है। मैं जब भी यहां आती हूं तो लगता है कि अपने ही घर आई हूं। यहां के लोग बहुत दयालु हैं और प्यार से स्वागत करते हैं। यहां का खाना हमेशा स्वादिष्ट लगता है। दाल मखनी और ताजा पनीर से बनाई गई हर चीज बहुत लजीज होती है।

तुलसी ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमलों को इस्लामी आतंक कहा

भारत में लगातार हो रहे पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमलों को तुलसी ने इस्लामी आतंक बताया। उन्होंने कहा कि ये भारत और अमेरिका समेत कई मिडिल ईस्ट देशों पर भी खतरा बनता जा रहा है।

तुलसी ने कहा, ‘राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस्लामी आतंक से लड़ने के अपने वादे को लेकर बहुत साफ हैं। इस आतंक ने हमें घेर लिया है और लगातार अमेरिकी लोगों पर खतरा बना हुआ है। ये भारत, बांग्लादेश में लोगों को प्रभावित करता रहा है और मौजूदा समय में सीरिया, इजराइल और मिडिल ईस्ट के कई देशों में लोगों पर असर डाल रहा है। मुझे पता है पीएम मोदी इस खतरे को बहुत गंभीरता से लेते हैं। दोनों नेता इस खतरे को पहचानने और इसे हराने के लिए मिलकर काम करेंगे।’

खबरें और भी हैं…
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‘मैंने कई इजरायलियों को मार दिया’, नर्स के दावे के बाद ऑस्ट्रेलिया के अस्पतालों में मची खलबली – australia hospital examines patient records after nurse claims to have killed israelis antisemitic attacks

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Australia News: ऑस्‍ट्रेलिया में एक नर्स का वीडियो वायरल हुआ है, जिसके बाद देश के साथ ही पूरी दुनिया में खलबली मची हुई है. आरोपी नर्स इस वीडियो में इजरायल के नागरिकों की हत्‍या करने का दावा कर रही है.

'मैंने कई इजरायलियों को मार दिया', नर्स के दावे के बाद ऑस्ट्रेलिया में खलबली

ऑस्‍ट्रेलिया में एक नर्स ने इजरायली मरीजों की हत्‍या करने का दावा कर सनसनी मचा दी है. ऑस्‍ट्रेलिया में इजरायल विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं. (फोटो: AP)

हाइलाइट्स

  • ऑस्‍ट्रेलिया में नर्स ने इजरायली मरीजों की हत्‍या करने का दावा किया है
  • नर्स के दावों की जांच शुरू कर दी गई है, मरीजों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
  • इजरायल-हमास युद्ध के बाद यहूदी विरोधी भावनाओं में आया है उभार

मेलबर्न (ऑस्‍ट्रलिया). ऑस्‍ट्रेलिया में बड़ी तादाद में अन्‍य देशों के लोग रहते हैं. इसे विभिन्‍न संस्‍कृतियों का संगम स्‍थल भी कहा जाता है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिससे इस भावना को चोट पहुंची है. इजरायल-हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद ऑस्‍ट्रेलिया में यहूदी विरोधी भावनाएं काफी बढ़ी हैं. अब न्‍यू साउथ वेल्‍स स्‍टेट में फिर से ऐसा ही मामला समाने आया है. एक अस्‍पताल में तैनात नर्स ने दावा किया है कि उसने इजरायली नागरिकों की हत्‍या की है. नर्स के दावे से देशभर में सनसनी फैल गई है. न्‍यू साउथ वेल्‍स के हेल्‍थ डिपार्टमेंट ने नर्स के दावे की जांच करने की बात कही है. साथ ही संबंधित हॉस्पिटल में मरीजों का रिकॉर्ड भी चेक किया जाएगा.

ऑस्‍ट्रेलिया अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि एक नर्स द्वारा इजरायलियों को मारने का ऑनलाइन दावा किए जाने के बाद अस्‍पताल मरीजों के रिकॉर्ड की जांच कर रहा है. हालांकि, अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि मरीजों को नुकसान पहुंचाने का कोई सबूत सामने नहीं आया है. नर्स का यह दावा यहूदी विरोधी हमलों और बयानबाजी में सबसे नया है, जिसने ऑस्ट्रेलिया को हिलाकर रख दिया है. बता दें कि पिछले एक साल से कुछ ज्‍यादा समय से ऑस्‍ट्रेलिया में यहूदी विरोधी भावनाओं में वृद्धि हुई है. समुदाय से जुड़े लोगों के घरों, कार्यालयों और व्‍यावसायिक प्रतिष्‍ठानों में तोड़फोड़ की गई है. यहूदियों को निशाना बनाने वाले अपराधों के साथ एक स्कूल और दो सिनेगॉग (यहूदी धर्मस्‍थल) को आग के हवाले तक कर दिया गया है.

आरोपी नर्स सस्‍पेंड
सिडनी के बैंकस्टाउन अस्पताल में मंगलवार को रात की पाली के दौरान इजरायली इन्फ्लुएंसर मैक्स वीफ़र के साथ ऑनलाइन चर्चा में भाग लेने वाली दो नर्सों को बुधवार को सस्‍पेंड कर दिया गया. हेल्‍थ मिनिस्‍टर पार्क ने कहा कि वे फिर कभी स्‍टेट हेल्‍थ डिपार्टमेंट के लिए काम नहीं करेंगी. पार्क ने इन नर्सो पर टिप्‍पणी करते हुए उन्‍हें नीच, घृणित और विक्षिप्त बताया है. ऑस्ट्रेलिया में एक यहूदी संगठन के अधिकारी एलेक्स रिव्चिन ने जोर देकर कहा कि सिडनी के यहूदी समुदाय के प्रति ऑस्ट्रेलिया के मेडिकल प्रैक्टिशनर के बीच नफरत और अतिवाद बढ़ रहा है.

पुलिस स्‍ट्राइक फोर्स
न्यू साउथ वेल्स स्‍टेट के स्वास्थ्य मंत्री रयान पार्क ने बताया कि साल 2023 में इजराइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से सिडनी में यहूदी विरोधी अपराधों पर खास तौर से निपटने के लिए पुलिस स्‍ट्राइक फोर्स का गठन किया गया है. यह टीम हेट स्‍पीच कानून का उल्‍लंघन सहित ऑनलाइन वीडियो के चलते हुए अपराधों की जांच करती है. बता दें कि सिडनी और मेलबर्न में 85 फीसद यहूदी रहते हैं.

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‘मैंने कई इजरायलियों को मार दिया’, नर्स के दावे के बाद ऑस्ट्रेलिया में खलबली

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