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2100 तक तकनीकी विकास बहुत कुछ बदल देगा इंसान का शरीर, सिर से लेकर रीढ़ में आएगा बदलाव!

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वैज्ञानिकों का कहना है कि साल 2100 तक इंसानों के शरीर में टेक्नोलॉजी के उपयोग की वजह से बहुत से बदलाव देखने को मिलेंगे. उन्होंने बताया कि कम्प्यूटर, स्मार्टफोन आदि के बहुत अधिक इस्तेमाल से इंसान की रीढ़ का संत…और पढ़ें

2100 तक तकनीकी विकास बदल देगा इंसानी शरीर, शक्ल से लेकर हाथ तक दिखेंगे अलग

तकनीकी विकास का हमारे शरीर पर बहुत गहरा असर दिखेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अगली सदी की शुरुआत में इंसान किस तरह के होंगे. उन पर आज की आधुनिक तकनीक  का क्या असर होगा. क्या इसकी वजह से उनके शरीर में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. एक्स्पर्ट्स ने इसका आंकलन करते हुए बताया है कि साल 2100 मतक इंसानों के शरीर में तकनीकी विकास की वजह से कैसे बदलाव आएंगे.  इसके लिए उन्होंने उस दौर के इंसान का 3 डी डिजाइन तक बनाया है.

बहुत ज्यादा बदलाव हो जाएंगे
वैज्ञानिकों का मानना है कि लैपटॉप्स, स्मार्टफोन्स, और अन्य तकनीकों के रोजाना इस्तेमाल का इंसान के शरीर पर गहरा असर होगा और साल 2100 तक उनके शरीर में बहुत बड़े बदलाव दिखाई देने लगेंगे.  इस वैज्ञानिक रिसर्च में एक्सपर्ट्स ने ऐसे ही बदलाव का गहराई से अध्ययन किया है.

बना दिया भविष्य का मॉडल
वैज्ञानिकों ने अपने पूर्वानुमानों के आधार पर भविष्य के इंसान का एक मॉडल तक बना दिया है. उन्होंने उसे मिंडे नाम दिया है. उनका दावा है कि यह मॉडल आज के इंसानों की तुलना में काफी अलग है क्योंकि तब तक कम्प्यूटर्स पर घंटों काम करने और फोन्स को देखते रहने के कारण उनमें बहुत बड़े और प्रभावी बदलाव आ जाएंगे.

वैज्ञानिकों ने भविष्य के इस मानव के मॉडल का नाम मिंडी दिया है. (तस्वीर: tollfreeforwarding)

गर्दन पर सबसे ज्यादा असर
इस डिजाइन के मुताबिक मिंडी की गर्दन की नसें ज्यादा बड़ी होंगी जो कि उनके खराब पोस्चर या मुद्रा को संतुलित करने का नतीजा होगी. इन तस्वीरों को बनाने वाले मेपल होलिस्टिक में हेल्थ और वेलनेस एक्सपर्ट कैलेब बेके का कहना है कि  घंटों तक फोन में देखते रहने से लोगों की गर्दन में तनाव आ जाएगा और रीढ़ का संतुलन बिगड़ जाएगा. इससे गर्दन की  मांसपेशियों को सिर को सहारा देने के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ेगा. ऐसे में धड़ भी सीधा नहीं रह पाएगा.

हाथ में भी हो जाएगा बदलाव
इस मॉडल को बनाने वाली कंपनी टॉलफ्रीफॉर्वर्डिंग डॉटकॉम  के प्रमुख जेसन ओब्रायन का कहना है कि हमें तकनीकी के फायदों की कीमत चुकानी होगी और सुविधा, मनोरंजन और आसान संपर्क के बदले हमारी सेहत पर बुरा असर होगा. एक्सपर्ट्स ने यह भी अनुमान लगाया कि 100 साल के भीतर ही इंसान के हाथ लंबे समय तक मोबाइल पकड़े रहने के कारण पंजों की तरह हो जाएंगे.

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वहीं फोन पकड़ने की वजह से क्यूबिटल टनल सिंड्रोम की समस्या दिखने लगेगी, जिससे आखिरी की दो ऊंगलियो में कमजोरी आ जाएगी, बाजू में दर्द और कोहनी में कमजोरी आ जाएगी. वहीं स्मार्टफोन से निकलने वाले रेडिएशन का असर ऐसा होगा जिससे रेडिएशन से बचने के लिए उनकी खोपड़ी मोटी हो जाएगी, निष्क्रिय लाइफस्टाइल के कारण दिमाग भी सिकुड़ कर छोटा हो जाएगा.

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