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वो रहस्यमय जगह, जहां मिलता है अमर होने का इंजेक्शन, लगती है रईसों की लाइन, बिटकॉइन से होती है पेमेंट!

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इंसान का वश सारी चीज़ों पर है लेकिन मौत एक ऐसी सच्चाई है, जिस पर आज तक कोई जीत नहीं हासिल कर सका है. यही वजह है कि आजकल बड़े-बड़े रईस इस दौड़ में लगे हुए हैं कि वो किस तरह अपनी बढ़ती उम्र को रोक लें और अमर हो ज…और पढ़ें

वो रहस्यमय जगह, जहां मिलता है अमर होने का इंजेक्शन, लगती है रईसों की लाइन!

आइलैंड में लगाया जाता है अमरता का इंजेक्शन. (सांकेतिक तस्वीर/Canva)

आपने पौराणिक कहानियों में सुना होगा कि असुर अक्सर ईश्वर की उपासना करके अमर होने का वरदान मांगते थे. हालांकि उन्हें कभी भी पूर्ण रूप से अमरत्व हासिल नहीं होता था और वे मर जाते थे. सोचिए तब से लेकर आज तक इंसान अमरत्व की खोज में लगा हुआ है. वो इस जीवन में अच्छी ज़िंदगी जी रहा है, वो मरने से बचना चाहता है. इसके लिए पहले जहां तपस्या का सहारा लिया जाता था, वहीं अब विज्ञान का.

इंसान का वश सारी चीज़ों पर है लेकिन मौत एक ऐसी सच्चाई है, जिस पर आज तक कोई जीत नहीं हासिल कर सका है. यही वजह है कि आजकल बड़े-बड़े रईस इस दौड़ में लगे हुए हैं कि वो किस तरह अपनी बढ़ती उम्र को रोक लें और अमर हो जाएं. अमेरिका के एक छोटे से आइलैंड में यही काम चल रहा है और इसके बारे में किसी को पता ही नहीं है.

यहां दिया जाता है ‘अमरता’ का इंजेक्शन
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक Honduras के समुद्र तट से 40 मील की दूरी पर एक छोटा सा आइलैंड है, जिसका नाम रोआटन (Roatán) है. इस जगह पर आराम से अमेरिका से फ्लाइट लेकर पहुंचा जा सकता है. यहां पर Prospera नाम का एक शहर है, जिसे एरिक ब्रिमेन ने बसाया था. यहां टैक्स नाम का है और पेमेंट भी बिटकॉइन में हो जाती है. यहां वो अवैध मेडिकल ट्रीटमेंट भी होते हैं, जिन्हें किसी मेडिकल एसोसिएशन से मंजूरी नहीं मिली है. इनमे से एक है वो इंजेक्शन, जिसके ज़रिये डीएनए मॉलिक्यूल्स आपकी बॉडी में डाले जाते हैं और खुद पर खुद रिपेयरिंग का दावा किया जाता है. सामान्य भाषा में ये अमरता का इंजेक्शन है, जो आपको मरना छोड़िए बूढ़ा भी नहीं होने देगा.

रईस लगवाते हैं ये अवैध इंजेक्शन
Minicircle क्लीनिक की ओर से ये डीएनए इंजेक्शन लगाए जाते हैं, जिसके सबसे मशहूर क्लाइंट बायोहैकर ब्रायन जॉनसन रहे हैं, जिन्होंने साल 2024 में ये इंजेक्शन लगवाया और इसे सकारात्मक नतीजों का दावा किया. हालांकि अमेरिका में ये ट्रीटमेंट अवैध है और एफडीए ने इसे एप्रूव नहीं किया है. बावजूद इसके यहां पर इंजेक्शन को 22 लाख रुपये में लगाया जा रहा है. इसके दो साल तक प्रभावी होने का दावा किया जा रहा है. Delaware में रजिस्टर्ड बायोटेक स्टार्टअप मिनीसर्कल का दावा है कि ये जीन थैरेपी फोलिस्टैटिन प्रोटीन के ज़रिये आपके शरीर के फंक्शन को प्रभावित किया जाता है. इसके ज़रिये एजिंग स्पीड 0.64 प्वाइंट स्लो हो जाती है, यानि 12 महीने की उम्र 19 महीने में बीतती है.

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‘हाय कितना क्यूट है ये’, हुडी में लड़का गा रहा था रैप, महफिल लूट गए लाल जैकेट वाले के एक्सप्रेशन

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खूबसूरत वादियों में बैठे हुए एक पीले हुडी वाला बच्चा ‘तू है कहां’ गाने को एक सांस में गा रहा है. बच्चे के टैलेंट का वीडियो तो वायरल हो रहा है लेकिन इसमें महफिल लूटने का काम उसके बगल बैठा दोस्त कर रहा है.

'हाय कितना क्यूट है ये', हुडी में लड़का गा रहा था रैप, महफिल लूट गया दोस्त

बच्चों का क्यूट वीडियो हुआ वायरल. (Credit- Instagram/jp_negi_travelholic )

देश-दुनिया के कोने-कोने में टैलेंट बिखरा हुआ है. पहले जहां हम ज्यादातर लोगों को जान नहीं पाते थे, वहीं सोशल मीडिया के ज़माने में मिनटों में इंसान का टैलेंट पूरी दुनिया में छा जाता है. सिर्फ कुछ सेकंड का वीडियो वायरल हो जाता है और जिसे कोई नहीं जानता था, उसे हर कोई जान जाता है. इस वक्त एक ऐसा ही छोटे बच्चे का वीडियो वायरल हो रहा है.

खूबसूरत वादियों में बैठे हुए एक पीले हुडी वाला बच्चा ‘तू है कहां’ गाने को एक सांस में गा रहा है. बच्चे के टैलेंट का वीडियो तो वायरल हो रहा है लेकिन इसमें महफिल लूटने का काम उसके बगल बैठा दोस्त कर रहा है. हिमाचल प्रदेश के एक छोटे बच्चे का वीडियो चर्चा में है, जिसमें वह ज़ैन (ZAYN) के गाने ‘तू है कहां’ को गा रहा है.

महफिल लूट गया ‘दोस्त’
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक छोटा सा बच्चा ‘Tu Hai Kahan’ गा रहा है. वहीं उसके साथ उसका दोस्त भी लाल रंग की जैकेट पहनकर बैठा हुआ है. लोगों को मासूम बच्चे का ये अंदाज इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे वीडियो का बेस्ट पार्ट बताया है. बच्चा अपने दोस्त को हाइप करने के लिए इतने ज़बरदस्त एक्सप्रेशन दे रहा है कि देखने वाले बिना उसे प्यार किए नहीं रह पाएंगे.

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जिम में ही कसरत करते हुए कर सकेंगे सालसा डांस, नहीं देनी होगी अलग से फीस, मशीन ने दिया आइडिया!

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gym salsa machine: एक अनोखे वीडियो में जिम में कसरत कर रहा शख्स सालसा डांस करता दिख रहा है. लोगों को इस तरह की मशीन खूब पसंद आई है. कोई इसे डांस करने के लिए हासिल करना चाहता है तो कोई कमर और पीठ दोनों की कसरत क…और पढ़ें

जिम में कसरत करते हुए कर सकेंगे सालसा डांस, कमर पीठ की भी होगी वर्जिश, मशीन ने

लोगों को यह मशीन कई कारणों से पसंद आ रही है. (तस्वीर: Instagram video grab)

क्या आप जिम में कसरत करने से बोर हो जाते हैं? या क्या आपको जिम और डांस में से किसी एक को चुनना पड़ रहा है? क्या आप चाहते हैं कि जिम में कसरत करते हुए डांस भी कर सकें? लेकिन उसके लिए आपको अलग से पैसे ना देने पड़ें?  सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो ने आपकी ऐसी समस्याओं का अनूठा हल निकाला है. इसमें एक ऐसी मशीन दिखाई गई है जिसमें जिम में कसरत करते समय ही आपकी डांस करने की हसरत पूरी हो सकती है. डांस भी ऐसा वैसा नहीं, मशीन आपको सालसा डांस कराएगी.

बिलकुल सालसा डांस!
जी हां जिम कि इस मशीन को ऐसा डिजाइन किया गया है जिसमें एक शख्स वैसे तो जिम में साइकिल मशीन की तरह पैर चला रहा है. लेकिन उसके शरीर की गतिविधि सालसा डांस के स्टेप्स की तरह दिखाई देती है. बैकग्राउंड म्यूजिक भी वीडियो में ऐसा तड़का लगा रहा है कि अगर गौर से ना देखा गया तो लगेगा कि कोई सालसा डांस ही कर रहा है.

कैसे काम करती है ये मशीन?
वीडियो में एक शख्स जिम में एक अनोखी मशीन पर पैर चला रहा है जिसके साथ उसके शरीर के मूवमेंट्स डांस की तरह लग रहे हैं. साइकिल मशीन में पैडल आम साइकिल के तरह आगे पीछे चलते हैं, लेकिन इस मशीन में पैडल की दिशा कुछ अलग है. इसमें आपको पैडल दायें से बायें घुमाने होंगे. बाकी मशीन का हिस्सा एक स्टेशनरी साइकिल की तरह है.

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OMG! ना ईंट-ना सीमेंट, भारत में खुली अनोखी फैक्ट्री, देख लोग रह गए दंग!

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गुड़गांव की Control Z फैक्ट्री, बांस और मिट्टी से बनी भारत की पहली फैक्ट्री है, जो पुराने फोन को नया बनाती है. फाउंडर युग भाटिया ने इसे सस्टेनेबिलिटी के तहत बनाया.

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बांस

बांस की लकड़ियों और मिट्टी से बनी फैक्ट्री

हाइलाइट्स

  • गुड़गांव में Control Z फैक्ट्री बांस और मिट्टी से बनी है.
  • यह फैक्ट्री मोबाइल रिपेयरिंग का काम करती है.
  • फैक्ट्री पर्यावरण के अनुकूल और सस्टेनेबल मटेरियल से बनी है.

दिल्ली: गुड़गांव में स्थित एक अनोखी फैक्ट्री Control Z इन दिनों काफी चर्चा में है. इस फैक्ट्री की खासियत यह है कि इसे पूरी तरह बांस और मिट्टी से बनाया गया है. भारत की यह पहली ऐसी फैक्ट्री है, जिसमें किसी भी तरह की ईंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया. खास बात यह है कि यह फैक्ट्री मोबाइल रिपेयरिंग का काम करती है, जहां पुराने फोन को नया बनाया जाता है.

कैसे आया यह अनोखा आइडिया?
Control Z के फाउंडर युग भाटिया ने बताया कि उनका काम सस्टेनेबिलिटी यानी पर्यावरण के अनुकूल समाधान पर आधारित है. वह पुराने फोन खरीदकर उन्हें रिपेयर कर नए जैसे फोन में बदलते हैं. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने फैसला किया कि उनकी फैक्ट्री भी सस्टेनेबल मटेरियल से बनाई जाए.
युग भाटिया ने कहा कि “हम जो काम कर रहे हैं, वह पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक कदम है. हम पुराने फोन को रिसाइकिल कर नया बना रहे हैं, तो क्यों न हमारी फैक्ट्री भी पूरी तरह इको-फ्रेंडली हो? इसी सोच के साथ हमने इस फैक्ट्री को बांस और मिट्टी से बनाने का फैसला किया.”

सबसे बड़ी चुनौती
युग भाटिया ने बताया कि, इस तरह की फैक्ट्री पहले कभी भारत में नहीं बनाई गई थी, इसलिए इसे बनाना एक बड़ी चुनौती थी. सबसे बड़ी दिक्कत मास्टर कारीगरों की कमी थी, क्योंकि इस तरह का निर्माण कार्य केवल पश्चिम बंगाल और असम के कुछ विशेषज्ञ ही कर सकते थे. उन्हें दिल्ली लाकर काम करवाना बेहद मुश्किल था.
इसके अलावा, उच्च गुणवत्ता वाले बांस की जरूरत थी, जो भारत में सिर्फ नॉर्थ-ईस्ट रीजन में मिलता है. इसे गुड़गांव तक लाना और संरचना तैयार करना भी एक चुनौतीपूर्ण काम था.

कैसा दिखता है यह अनोखा स्ट्रक्चर?
यह पूरी फैक्ट्री लकड़ी और मिट्टी से बनी है. इसकी दीवारें मिट्टी और बांस से बनाई गई हैं, जिससे गर्मी में ठंडक बनी रहती है और सर्दी में गर्माहट मिलती है. इस तरह का निर्माण प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करने का बेहतरीन उदाहरण है.

सस्टेनेबिलिटी की मिसाल
बांस और मिट्टी से बनी यह फैक्ट्री पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल है. यह परियोजना साबित करती है कि यदि सही सोच और प्रयास किए जाएं तो निर्माण के लिए पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाए जा सकते हैं. युग भाटिया का यह कदम भारत में सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन को बढ़ावा देने में एक मिसाल साबित हो सकता है.

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