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विदेशी नहीं देसी! शरीर के लिए रामबाण है यह दाल, बिना प्रेशर कुकर के भी हो जाएगा तैयार

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Arhar dal ke fayde: छतरपुर जिले में एक खास तरीके की खेती की जाती है, जो बिना किसी रासायनिक खाद से तैयार होगा है. शरीर के लिए बहुत ही फायदा करता है.

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छतरपुर जिले की देसी अरहर की दाल जो स्वाद के लिए प्रसिद्ध है.

हाइलाइट्स

  • छतरपुर में देसी अरहर की खेती होती है.
  • देसी अरहर बिना प्रेशर कुकर के भी पकती है.
  • देसी अरहर स्वादिष्ट और सेहतमंद होती है.

देसी अरहर दाल. छतरपुर जिले में सालों से अरहर की देसी वैरायटी की खेती किसान भाई करते आए हैं. अरहर की इस देसी वैरायटी की खासियत है कि ये अपने स्वाद के लिए एमपी से लेकर यूपी तक फेमस है. साथ ही इसे प्रेशर कुकर में पकाने की भी जरूरत नहीं होती है. क्योंकि इसे छोटी पतेली में भी आसानी से पकाया जा सकता है.

बगैर रासायनिक खाद होती है पैदा 
किसान विनेश पाल बताते हैं कि छतरपुर जिले में सालों से हमारे जैसे किसान देसी अरहर की खेती कर रहे हैं. खासकर , हमारे क्षेत्र में जो देसी अरहर की पैदावार होती है. ये बगैर रासायनिक खाद और कम पानी में होती है. इसलिए हमारे क्षेत्र में जो देसी अरहर होती है, ये अपने आप में ख़ास होती है.

देसी अरहर की दाल होती है बेहद स्वादिष्ट 
विनेश बताते हैं कि देसी और विदेसी अरहर में बहुत फर्क होता है. विदेशी अरहर की तुलना में देसी अरहर बहुत ही अच्छी होती है. हमारे क्षेत्र में उगने वाली देसी अरहर की बहुत मांग रहती है. लोग इस अरहर की दाल खाना बहुत पसंद करते हैं. इस देसी अरहर की खासियत ये है कि इसकी बनी दाल का स्वाद बहुत ही स्वादिष्ट होता है. दूसरी दाल की तुलना में इसके स्वाद का कोई तोड़ नहीं है.

आसानी से पक जाती है 
विनेश बताते हैं कि देसी अरहर की एक और खासियत होती है कि ये कम मीठे पानी में भी आसानी से पक जाती है. इस देसी अरहर को प्रेशर कुकर के बिना भी पकाया जा सकता है. छोटी या बड़ी पतेली में भी आसानी से पकाया जा सकता है. लेकिन पतेली में मीठे पानी से पकती है. पतेली में पकी दाल का स्वाद लाजवाब होता है.

नाम मात्र की लागत, मुनाफा बढ़िया 
किसान बताते हैं कि देसी अरहर की खेती में न तो अलग से रासायनिक खाद डालने की जरूरत होती है और न ही सिंचाई की जरूरत होती है. छुट्टा जानवरों से ही फसल को बचाना पड़ता है. अगर जानवरों से बचा लिया तो आराम से 2 क्विंटल का बीघा निकल आता है.

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