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रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप और पुतिन के बीच शांति वार्ता की कोशिशें तेज.

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रूस-यूक्रेन युद्ध में नया मोड़, ट्रंप और एलन मस्क ने यूक्रेन का साथ छोड़ा. पुतिन ने युद्ध में पकड़ मजबूत की. रूस ने अमेरिका के सामने मांगें रखीं. 30-दिन के युद्धविराम पर चर्चा जारी.

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रूस ने युद्ध विराम के लिए नई शर्ते रख दी है.

रूस-यूक्रेन युद्ध में नया मोड़ आ गया है. अमेरिका में नए-नए राष्ट्रपति बने डोनाल्ड ट्रंप और उनके सबसे करीबी एलन मस्क इस युद्ध में यूक्रेन का साथ छोड़ चुके हैं. वे दोनों यूक्रेन पर युद्ध विराम करने का दबाव डाल रहे हैं. यूक्रेन भी अमेरिकी दबाव के आगे अब करीब-करीब झुक गया है. दूसरी तरफ रूस और उसके राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हैं. यूक्रेन को हड़काने के साथ अमेरिका इनको पुचकारने में लगा था. ऐसे में पुतिन को अपने से सबसे मुफीद समय मिल गया और उन्होंने बीते करीब एक महीने के भीतर इस युद्ध में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली. अमेरिका की ओर से युद्ध विराम कराने की कोशिशो के बीच पुतिन यूक्रेन के भीतर और मजबूत होते गए.

अब इस मौके का फायदा उठाते हुए पुतिन ने अमेरिका और ट्रंप को मझधार में खड़ा कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अपने युद्ध को समाप्त करने और वाशिंगटन के साथ संबंधों को फिर से स्थापित करने के लिए अमेरिका के सामने मांगों की एक सूची पेश की है.

यह स्पष्ट नहीं है कि मास्को ने अपनी सूची में क्या शामिल किया है या क्या वह उनकी स्वीकृति से पहले कीव के साथ शांति वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार है. लोगों ने बताया कि पिछले तीन हफ्तों के दौरान रूसी और अमेरिकी अधिकारियों ने व्यक्तिगत और वर्चुअल बातचीत के दौरान शर्तों पर चर्चा की. उन्होंने क्रेमलिन की शर्तों को व्यापक और उन मांगों के समान बताया जो उसने पहले यूक्रेन, अमेरिका और नाटो के सामने रखी थीं.

रूस ने रखी ये मांग
पहले की शर्तों में कीव के लिए नाटो सदस्यता नहीं, यूक्रेन में विदेशी सैनिकों की तैनाती पर रोक और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इस दावे की अंतरराष्ट्रीय मान्यता शामिल थी कि क्रीमिया और चार प्रांत रूस के हैं. हाल के वर्षों में, रूस ने अमेरिका और नाटो से यह भी मांग की है कि वे युद्ध के मूल कारणों को संबोधित करें, जिसमें नाटो का पूर्व की ओर विस्तार शामिल है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पुतिन से यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि क्या वह 30-दिन के युद्धविराम पर सहमत होंगे, जिसे यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की ने मंगलवार को शांति वार्ता की दिशा में पहला कदम बताया था. पुतिन की संभावित युद्धविराम समझौते के प्रति प्रतिबद्धता अभी भी अनिश्चित है, और विवरण अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है.

कुछ अमेरिकी अधिकारियों, सांसदों और विशेषज्ञों को डर है कि पुतिन, जो एक पूर्व केजीबी अधिकारी हैं, युद्धविराम का उपयोग अमेरिका, यूक्रेन और यूरोप को विभाजित करने और किसी भी वार्ता को कमजोर करने के प्रयास को तेज करने के लिए करेंगे. वाशिंगटन में रूसी दूतावास और व्हाइट हाउस ने टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया.

कीव में, यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस सप्ताह सऊदी अरब में अमेरिकी और यूक्रेनी अधिकारियों के बीच हुई बैठक को रचनात्मक बताया और कहा कि रूस के साथ संभावित 30 दिन का युद्धविराम व्यापक शांति समझौते का मसौदा तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. मास्को ने पिछले दो दशकों में इनमें से कई समान मांगें उठाई हैं, जिनमें से कुछ ने अमेरिका और यूरोप के साथ औपचारिक वार्ताओं में अपना रास्ता बना लिया है.

2021-2022 में भी पुतिन ने रखी थी यही शर्त
मास्को ने यूक्रेन युद्ध से पहले बाइडेन प्रशासन के साथ बैठकें की थीं. अमेरिका ने पुतिन के कई शर्तों को खारिज कर दिया. यह प्रयास विफल रहा और रूस ने 24 फरवरी, 2022 को हमला कर दिया. हाल के हफ्तों में अमेरिकी और रूसी अधिकारियों ने कहा है कि वाशिंगटन, कीव और मास्को द्वारा 2022 में इस्तांबुल में चर्चा किए गए मसौदा समझौते को शांति वार्ता के लिए शुरुआती बिंदु माना जा सकता है. यह समझौता कभी लागू नहीं हुआ. उन वार्ताओं में रूस ने मांग की थी कि यूक्रेन अपनी नाटो सदस्य बनने की महत्वाकांक्षा को छोड़ दे और स्थायी परमाणु-मुक्त स्थिति को स्वीकार करे. उसने युद्ध की स्थिति में यूक्रेन की सहायता करने वाले देशों के कार्यों पर वीटो की भी मांग की.

ट्रंप प्रशासन ने यह नहीं बताया है कि वह मास्को के साथ अपनी वार्ताओं को कैसे आगे बढ़ा रहा है. दोनों पक्ष दो अलग-अलग वार्ताओं में शामिल हैं: एक अमेरिका-रूस संबंधों को फिर से स्थापित करने पर और दूसरा यूक्रेन शांति समझौते पर. प्रशासन इस पर कैसे आगे बढ़ेगा. इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.

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