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माइक्रोस्कोप से भी खतरनाक हैं इस पक्षी की आंखें, भूलकर भी ना जाना पास, 10 KM की ऊंचाई से कर देता है शिकार!

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Features of Vulture Bird: पूरे विश्व कई तरह के पक्षी पाए जाते हैं, लेकिन यह पक्षी बहुत ही खतरनाक होगा है. ये अपना शिकार आसमान में 10 किलोमीटर की ऊंचाई से ही ढूंढ लेता है.

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गिद्ध 

गिद्ध 

हाइलाइट्स

  • गिद्ध 10 किलोमीटर की ऊंचाई से शिकार देख सकते हैं.
  • गिद्ध हवा की गंध से भोजन का पता लगाते हैं.
  • गिद्ध बिना ऊर्जा खर्च किए घंटों उड़ सकते हैं.

सागर. प्रकृति का सबसे बड़ा सफाई दरोगा कहे जाने वाले गिद्ध पक्षियों में सबसे ज्यादा बदसूरत माने जाते हैं, लेकिन यह बीमारी और जहर फैलाने वाले मृत मवेशियों को अपना भोजन बनाकर इनका सफाया करते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल यह रहता है कि जब मवेशी मरते हैं, तो लोग इन्हें जंगल या गांव के बाहर फेक आते हैं, लेकिन दूर-दूर तक दिखाई नहीं देने वाले गिद्ध भोजन की तलाश में अचानक इनके पास तक कैसे पहुंच जाते हैं,

तो इसको लेकर एक्सपर्ट दो-तीन चीज बताते हैं, एक तो यह कि यह पक्षी लाखों साल पुरानी प्रजाति के हैं, जिसकी वजह से इन्होंने जो पाया है. उसमें सबसे खास उनकी आंख और नाक है. गिद्धों की प्रजाति हवा के साथ आने वाली गंध से अपने भोजन का पता लगा लेते हैं. दूसरा उनकी दृष्टि इतनी तेज होती है कि अगर यह 8 से 10 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी उड़ रहे हैं, तो वह जमीन पर पड़े मृत मवेशी को देख लेते हैं.10 किलोमीटर की ऊंचाई से यह 30 किलोमीटर की रेंज में जमीन पर देखने की क्षमता होती है. इतना ही नहीं इन्होंने अपनी उड़ान में यह भी हासिल किया है कि यह केवल पंख फैलाए हुए ही घंटों तक आसमान में उड़ सकते हैं, और इसमें उनकी कोई एनर्जी खर्च नहीं होती है सामान्य तौर पर यह दो से पांच किलोमीटर की ऊंचाई पर होना पसंद करते हैं,

बता दें कि 90 के दशक में 98- 99% तक खत्म हो गए थे, लेकिन बाद में सरकार और शोधार्थियों के द्वारा दिए गए प्रयासों से इनकी आबादी फिर बढ़ने लगी है, जिससे जानकार अच्छे संकेत मान रहे हैं. वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट और गिद्ध गणना के नोडल अधिकारी ए ए अंसारी बताते हैं कि गिद्ध, जो है उसको हम लोग रेप्टर प्रजाति में रखते हैं, और इसमें जो उसकी भोजन तलाशने की क्षमता है. वह आंखों की वजह से है, इसकी जो फ्लाइट हाइट है वह बहुत ऊपर है.

इसकी मैक्सिमम जो फ्लाइट है वह पैसिव है जो काम एनर्जी खर्च करके ज्यादा देर तक उड़ान भरे रहता है, यह उसने लाखों सालों में प्राप्त किया है इसकी जो मैक्सिमम ऊंचाई है वह 10 किलोमीटर ऊपर तक उड़ सकते हैं, उनकी आई साइड काफी स्ट्रॉन्ग है, जिसकी वजह से यह 10 किलोमीटर की ऊंचाई से अपना भोजन तलाश सकते हैं, और अगर गढ़ भी हवा की दिशा में आ रही है तो उसको भी डिटेक्ट कर लेते हैं तो यह उनके भोजन तलाशने का तरीका है.

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माइक्रोस्कोप से भी खतरनाक हैं इस पक्षी की आंखें, भूलकर भी ना जाना पास

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‘हाय कितना क्यूट है ये’, हुडी में लड़का गा रहा था रैप, महफिल लूट गए लाल जैकेट वाले के एक्सप्रेशन

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खूबसूरत वादियों में बैठे हुए एक पीले हुडी वाला बच्चा ‘तू है कहां’ गाने को एक सांस में गा रहा है. बच्चे के टैलेंट का वीडियो तो वायरल हो रहा है लेकिन इसमें महफिल लूटने का काम उसके बगल बैठा दोस्त कर रहा है.

'हाय कितना क्यूट है ये', हुडी में लड़का गा रहा था रैप, महफिल लूट गया दोस्त

बच्चों का क्यूट वीडियो हुआ वायरल. (Credit- Instagram/jp_negi_travelholic )

देश-दुनिया के कोने-कोने में टैलेंट बिखरा हुआ है. पहले जहां हम ज्यादातर लोगों को जान नहीं पाते थे, वहीं सोशल मीडिया के ज़माने में मिनटों में इंसान का टैलेंट पूरी दुनिया में छा जाता है. सिर्फ कुछ सेकंड का वीडियो वायरल हो जाता है और जिसे कोई नहीं जानता था, उसे हर कोई जान जाता है. इस वक्त एक ऐसा ही छोटे बच्चे का वीडियो वायरल हो रहा है.

खूबसूरत वादियों में बैठे हुए एक पीले हुडी वाला बच्चा ‘तू है कहां’ गाने को एक सांस में गा रहा है. बच्चे के टैलेंट का वीडियो तो वायरल हो रहा है लेकिन इसमें महफिल लूटने का काम उसके बगल बैठा दोस्त कर रहा है. हिमाचल प्रदेश के एक छोटे बच्चे का वीडियो चर्चा में है, जिसमें वह ज़ैन (ZAYN) के गाने ‘तू है कहां’ को गा रहा है.

महफिल लूट गया ‘दोस्त’
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक छोटा सा बच्चा ‘Tu Hai Kahan’ गा रहा है. वहीं उसके साथ उसका दोस्त भी लाल रंग की जैकेट पहनकर बैठा हुआ है. लोगों को मासूम बच्चे का ये अंदाज इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे वीडियो का बेस्ट पार्ट बताया है. बच्चा अपने दोस्त को हाइप करने के लिए इतने ज़बरदस्त एक्सप्रेशन दे रहा है कि देखने वाले बिना उसे प्यार किए नहीं रह पाएंगे.

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जिम में ही कसरत करते हुए कर सकेंगे सालसा डांस, नहीं देनी होगी अलग से फीस, मशीन ने दिया आइडिया!

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gym salsa machine: एक अनोखे वीडियो में जिम में कसरत कर रहा शख्स सालसा डांस करता दिख रहा है. लोगों को इस तरह की मशीन खूब पसंद आई है. कोई इसे डांस करने के लिए हासिल करना चाहता है तो कोई कमर और पीठ दोनों की कसरत क…और पढ़ें

जिम में कसरत करते हुए कर सकेंगे सालसा डांस, कमर पीठ की भी होगी वर्जिश, मशीन ने

लोगों को यह मशीन कई कारणों से पसंद आ रही है. (तस्वीर: Instagram video grab)

क्या आप जिम में कसरत करने से बोर हो जाते हैं? या क्या आपको जिम और डांस में से किसी एक को चुनना पड़ रहा है? क्या आप चाहते हैं कि जिम में कसरत करते हुए डांस भी कर सकें? लेकिन उसके लिए आपको अलग से पैसे ना देने पड़ें?  सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो ने आपकी ऐसी समस्याओं का अनूठा हल निकाला है. इसमें एक ऐसी मशीन दिखाई गई है जिसमें जिम में कसरत करते समय ही आपकी डांस करने की हसरत पूरी हो सकती है. डांस भी ऐसा वैसा नहीं, मशीन आपको सालसा डांस कराएगी.

बिलकुल सालसा डांस!
जी हां जिम कि इस मशीन को ऐसा डिजाइन किया गया है जिसमें एक शख्स वैसे तो जिम में साइकिल मशीन की तरह पैर चला रहा है. लेकिन उसके शरीर की गतिविधि सालसा डांस के स्टेप्स की तरह दिखाई देती है. बैकग्राउंड म्यूजिक भी वीडियो में ऐसा तड़का लगा रहा है कि अगर गौर से ना देखा गया तो लगेगा कि कोई सालसा डांस ही कर रहा है.

कैसे काम करती है ये मशीन?
वीडियो में एक शख्स जिम में एक अनोखी मशीन पर पैर चला रहा है जिसके साथ उसके शरीर के मूवमेंट्स डांस की तरह लग रहे हैं. साइकिल मशीन में पैडल आम साइकिल के तरह आगे पीछे चलते हैं, लेकिन इस मशीन में पैडल की दिशा कुछ अलग है. इसमें आपको पैडल दायें से बायें घुमाने होंगे. बाकी मशीन का हिस्सा एक स्टेशनरी साइकिल की तरह है.

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OMG! ना ईंट-ना सीमेंट, भारत में खुली अनोखी फैक्ट्री, देख लोग रह गए दंग!

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गुड़गांव की Control Z फैक्ट्री, बांस और मिट्टी से बनी भारत की पहली फैक्ट्री है, जो पुराने फोन को नया बनाती है. फाउंडर युग भाटिया ने इसे सस्टेनेबिलिटी के तहत बनाया.

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बांस

बांस की लकड़ियों और मिट्टी से बनी फैक्ट्री

हाइलाइट्स

  • गुड़गांव में Control Z फैक्ट्री बांस और मिट्टी से बनी है.
  • यह फैक्ट्री मोबाइल रिपेयरिंग का काम करती है.
  • फैक्ट्री पर्यावरण के अनुकूल और सस्टेनेबल मटेरियल से बनी है.

दिल्ली: गुड़गांव में स्थित एक अनोखी फैक्ट्री Control Z इन दिनों काफी चर्चा में है. इस फैक्ट्री की खासियत यह है कि इसे पूरी तरह बांस और मिट्टी से बनाया गया है. भारत की यह पहली ऐसी फैक्ट्री है, जिसमें किसी भी तरह की ईंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया. खास बात यह है कि यह फैक्ट्री मोबाइल रिपेयरिंग का काम करती है, जहां पुराने फोन को नया बनाया जाता है.

कैसे आया यह अनोखा आइडिया?
Control Z के फाउंडर युग भाटिया ने बताया कि उनका काम सस्टेनेबिलिटी यानी पर्यावरण के अनुकूल समाधान पर आधारित है. वह पुराने फोन खरीदकर उन्हें रिपेयर कर नए जैसे फोन में बदलते हैं. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने फैसला किया कि उनकी फैक्ट्री भी सस्टेनेबल मटेरियल से बनाई जाए.
युग भाटिया ने कहा कि “हम जो काम कर रहे हैं, वह पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक कदम है. हम पुराने फोन को रिसाइकिल कर नया बना रहे हैं, तो क्यों न हमारी फैक्ट्री भी पूरी तरह इको-फ्रेंडली हो? इसी सोच के साथ हमने इस फैक्ट्री को बांस और मिट्टी से बनाने का फैसला किया.”

सबसे बड़ी चुनौती
युग भाटिया ने बताया कि, इस तरह की फैक्ट्री पहले कभी भारत में नहीं बनाई गई थी, इसलिए इसे बनाना एक बड़ी चुनौती थी. सबसे बड़ी दिक्कत मास्टर कारीगरों की कमी थी, क्योंकि इस तरह का निर्माण कार्य केवल पश्चिम बंगाल और असम के कुछ विशेषज्ञ ही कर सकते थे. उन्हें दिल्ली लाकर काम करवाना बेहद मुश्किल था.
इसके अलावा, उच्च गुणवत्ता वाले बांस की जरूरत थी, जो भारत में सिर्फ नॉर्थ-ईस्ट रीजन में मिलता है. इसे गुड़गांव तक लाना और संरचना तैयार करना भी एक चुनौतीपूर्ण काम था.

कैसा दिखता है यह अनोखा स्ट्रक्चर?
यह पूरी फैक्ट्री लकड़ी और मिट्टी से बनी है. इसकी दीवारें मिट्टी और बांस से बनाई गई हैं, जिससे गर्मी में ठंडक बनी रहती है और सर्दी में गर्माहट मिलती है. इस तरह का निर्माण प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करने का बेहतरीन उदाहरण है.

सस्टेनेबिलिटी की मिसाल
बांस और मिट्टी से बनी यह फैक्ट्री पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल है. यह परियोजना साबित करती है कि यदि सही सोच और प्रयास किए जाएं तो निर्माण के लिए पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाए जा सकते हैं. युग भाटिया का यह कदम भारत में सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन को बढ़ावा देने में एक मिसाल साबित हो सकता है.

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