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भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क के बयान का विरोध किया.

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India Slams UN Human Right Chief: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने जेनेवा में जम्मू-कश्मीर और मणिपुर का जिक्र किया. इस पर भारत ने कड़ा विरोध जताया और उनकी बोलती बंद कर दी.

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क के बयान को भारत ने किया खारिज .

हाइलाइट्स

  • भारत ने UN मानवाधिकार प्रमुख के बयान का कड़ा विरोध किया.
  • अरिंदम बागची ने UN में भारत का पक्ष मजबूती से रखा.
  • भारत ने तुर्क के बयान को गलत और बेबुनियाद बताया.

नई दिल्ली: भारत के बारे में कुछ भी बोलकर निकल जाने वाला जमाना खत्म हो गया है. अब अगर दुनिया भारत को एक शब्द बोलेगी तो उसे उल्टे चार शब्द सुनने पड़ेंगे. जी हां, संयुक्त राष्ट्र जेनेवा में भी कुछ ऐसा ही हुआ. जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र ह्यूमन राइट चीफ पाकिस्तान की भाषा बोल रहे थे. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने अपने बयान में जम्मू-कश्मीर और मणिपुर का जिक्र किया. ठीक वैसे ही जैसे हर बार इंटरनेशनल मंचों पर पाकिस्तान करता रहता है. वोल्कर तुर्क को बस इतना बोलना ही था कि भारत यूएन ह्यूमन राइट चीफ पर टूट पड़ा. भारत ने कड़ा विरोध जताया. सबके सामने भारत ने अच्छे से उदाहरण देकर यूएन ह्यूमन राइट चीफ की बोलती बंद कर दी. यह सब किया यूएन जेनेवा में भाररतीय दूत अरिंदम बागची ने. जी हां, अरिंदम बागची जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हैं.

दरअसल, भारत ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क की टिप्पणियों पर करारा जवाब दिया. उन्होंने अपने ग्लोबल अपडेट में कश्मीर और मणिपुर का जिक्र किया था. भारत ने उनके बयान को गलत, निराधार और बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया. साथ ही, इस तरह की सामान्य टिप्पणी और चुनिंदा मामलों को उठाने पर चिंता भी जताई.

अरिंदम बागची ने कैसे दिया जवाब
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अरिंदम बागची ने कहा, ‘चूंकि भारत का नाम लेकर जिक्र किया गया था, इसलिए मैं इस बात पर जोर देकर कहना चाहता हूं कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र एक स्वस्थ, जीवंत और बहुलतावादी समाज बना हुआ है. अपडेट में निराधार और बेबुनियाद टिप्पणियां जमीनी वास्तविकताओं के बिल्कुल उलट हैं.’ भारत की यह तीखी प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार चीफ वोल्कर तुर्क द्वारा जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र में अपने वैश्विक अपडेट में भारत का उल्लेख करने और मणिपुर और कश्मीर की स्थिति का जिक्र करने के बाद आई है.

उदाहरण देकर समझाया
तुर्क के बयान के जवाब में अरिंदम बागची ने कहा कि भारत के लोगों ने हमारे बारे में ऐसी गलतफहमियों को बार-बार गलत साबित किया है. साथ ही उन्होंने सबसे भारत को बेहतर ढंग से समझने को कहा. बागची ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर का उल्लेख, जिसे तुर्क ने गलती से वैश्विक अपडेट में कश्मीर कहा है, इस अंतर को स्पष्ट करता है.’ भारतीय राजदूत ने इस क्षेत्र में शांति और समावेशी प्रगति पर प्रकाश डाला, चाहे वह प्रांतीय चुनावों में भारी मतदान हो, पर्यटन में तेजी हो या तीव्र विकास की गति हो.

‘खुद को आईने में देखिए’
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यूएन ह्यूमन चीफ के ग्लोबल अपडेट को एक ‘वास्तविक अपडेट’ की आवश्यकता है. बागची ने कहा, ‘एक बड़े स्तर पर हम जटिल मुद्दों के वैश्विक अपडेट के अत्यधिक सरलीकरण, व्यापक और सामान्यीकृत टिप्पणियों, ढीली शब्दावली के उपयोग और स्थितियों के स्पष्ट चेरी पिकिंग के बारे में चिंतित हैं.’ बागची ने कहा कि यूएन ह्यूमन राइट चीफ ने एक व्यापक बेचैनी महसूस की है, लेकिन हमारा कहना है कि इसे दूर करने के लिए उनके कार्यालय को खुद को आईने में देखना जरूरी है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने क्या कहा?
अपने वैश्विक अपडेट में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने मणिपुर और कश्मीर का जिक्र किया था. उन्होंने मणिपुर में हिंसा और विस्थापन से निपटने के लिए तेज प्रयासों का आह्वान करते हुए कहा था कि मैं बातचीत, शांति निर्माण और मानवाधिकारों के आधार पर मणिपुर में हिंसा और विस्थापन से निपटने के लिए तेज प्रयासों का भी आह्वान करता हूं. उन्होंने आगे कहा कि वह कश्मीर सहित मानवाधिकार रक्षकों और स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कानूनों और उत्पीड़न के उपयोग से चिंतित हैं, जिसके परिणामस्वरूप मनमाने ढंग से हिरासत और नागरिक स्थान कम हो गया है. तुर्क ने कहा, ‘भारत का लोकतंत्र और संस्थान उसकी सबसे बड़ी ताकत रहे हैं, जो उसकी विविधता और विकास को रेखांकित करते हैं. लोकतंत्र के लिए समाज के सभी स्तरों पर भागीदारी और समावेश को निरंतर पोषित करने की आवश्यकता होती है.’

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