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भारतीय स्टार्टअप अग्निकुल ने किया ‘असंभव-सा’ काम, 6 साल पुरानी कंपनी का स्पेस इंडस्ट्री में हुआ बड़ा नाम

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अग्निकुल कॉस्मॉस (Agnikul Cosmos) ने 3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए रॉकेट इंजन बनाया है. इसकी खासियत यह है कि यह सिंगल पीस इंजन है.

भारतीय स्टार्टअप अग्निकुल ने किया असंभव-सा काम, स्पेस इंडस्ट्री में गूंजा नाम

हाइलाइट्स

  • अग्निकुल कॉस्मॉस (Agnikul Cosmos) ने 3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी से रॉकेट इंजन बनाया.
  • इस काम से स्पेस इंडस्ट्री में अग्निकुल के नाम का तो डंका बज रहा है.
  • 3डी प्रिटिंग का इस्तेमाल करते हुए इंजन तैयार करने में केवल 75 घंटे का समय लगा.

अग्निकुल कॉस्मॉस (Agnikul Cosmos) नाम की एक भारतीय स्टार्टअप है. स्पेस इंडस्ट्री अग्निकुल द्वारा किए गए काम की तरंगों को अच्छे से महसूस कर रही है. कंपनी ने एक ऐसा काम कर दिखाया है, जो अभी तक असंभव लगता था. इस काम से स्पेस इंडस्ट्री में कंपनी के नाम का तो डंका बजा ही है, साथ ही भारत का सिर भी गर्व से ऊंचा हुआ है.

दरअसल, अग्निकुल ने 3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए रॉकेट इंजन बनाया है. 30 मई 2024 को इसे लॉन्च किया गया. इसकी खासियत यह है कि यह सिंगल पीस इंजन है. अभी तक बनने वाले सभी इंजनों के अलग-अलग पार्ट्स में बनते थे. पहली बार ऐसा हुआ है कि पूरा इंजन एक बार में ‘छाप’ दिया गया.

कई हफ्तों का काम 3 दिन में
3डी प्रिंटिंग प्रोसेस के माध्यम से इंजन बनाने की लागत के साथ-साथ तैयार करने के समय में भी कमी आई है. अग्निकुल को 3डी प्रिटिंग का इस्तेमाल करते हुए रॉकेट इंजन तैयार करने में केवल 75 घंटे का समय लगा. पुराने ट्रेडिशनल तरीके से रॉकेट इंजन बनाने में 10 से 12 सप्ताह तक का समय लगता है. पूरी स्पेस इंडस्ट्री इसे लेकर खुश है और उन्हें लग रहा है कि रॉकेट बनाने में कम समय लगेगा, और पैसा भी खूब बचेगा.

बता दें कि अग्निकुल कॉस्मॉस भारतीय एयरोस्पेस स्टार्सअप है, जो छोटे सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल बनाता है. कंपनी लगभग 7 साल पहले 2017 में शुरू हुई थी. फाउंडर श्रीनाथ रविचंद्रन और मोइन एसपीएम हैं. कंपनी का हेडक्वार्टर तमिल नाडु के चेन्नई में है.

कंपनी के नाम बड़े अचीवमेंट
अग्निबाण रॉकेट: कंपनी ने पहला रॉकेट यही बनाया था. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया था कि इसे किसी भी तरीके से कस्टमाइज किया जा सके. यह क्राफ्ट 100 किलोग्राम वजन तक का भार लेकर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक जा सकता है. कम लागत से तैयार यह रॉकेट सेटेलाइट लॉन्चिंग के लिए इस्तेमाल किये जाने के लिए अच्छा ऑप्शन है.

3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी पर पेटेंट: अग्निकुल ने अभी जो 3D प्रिटिंग से रॉकेट के इंजन का निर्माण किया है, उसे पहले ही पेटेंट करवा लिया गया था. इस नई खोज से रॉकेट का इंजन 3-4 दिनों में बन जाएगा, जबकि पहले कई हफ्ते का समय लगता था.

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