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बिहार में अंडर 14 लागोरी का राज्य स्तरीय आयोजन, 32 टीम से चुने जाएंगे नेशनल के लिए सुपरस्टार खिलाड़ी

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भागलपुर के नवगछिया में अंडर 14 लागोरी का राज्य स्तरीय आयोजन 18और 19 जनवरी को किया जा रहा है. मैडल प्राप्त करने वाले 15 खिलाड़ियों को बिहार के प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा.

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जानकारी देते आयोजन समिति सदस्य रणधीर कुमार 

बेगूसराय: प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है, जिससे बिहारी युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने का अवसर भी मिलता दिख रहा है.
इसी कड़ी में अब भागलपुर के नवगछिया में लागोरी खेल का राज्य स्तरीय आयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य में खेलों के प्रति सकारात्मक माहौल बन रहा है और एक नई खेल संस्कृति विकसित हो रही है. इसकी तैयारी खेल विभाग के प्रयास से शुरू भी कर दी गई है. आपको बता दें कि लागोरी, जिसे पिट्टू गरम, पत्थर तोड़, या सितोलिया (7 पत्थर) के नाम से भी जाना जाता है, महाभारत काल से जुड़ा हुआ यह पारंपरिक खेल बिहारी युवाओं को खेल के क्षेत्र में पहचान स्थापित करने का मौका देगी.

18 और 19 जनवरी को होगा आयोजन
आयोजन समिति के सदस्य रणधीर कुमार ने बताया बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया का चयन राज्य स्तरीय खेल के आयोजन के लिए किया गया है . यहां 18 और 19 जनवरी को दो दिनों तक होने वाले इस खेल के आयोजन में भागलपुर जिला लागोरी संगठन के द्वारा सारी तैयारी की जा रही है. बिहार सरकार के खेल मंत्री के द्वारा इस खेल का उद्घाटन किया जा सकता है. आपको बता दें प्रतियोगिता में बिहार के सभी जिलों से कुल 32 टीम हिस्सा ले रही है. इस दौरान 14 साल से कम उम्र के करीब 500 खिलाड़ियों के भाग लेने की उम्मीद है. प्रत्येक जिले की एक टीम होगी, जिसमें 15 खिलाड़ी शामिल होंगे.

15 मेडल विजेताओं का राष्ट्रीय स्तर के लिए होगा चयन 
आयोजन समिति के मुताबिक प्रतियोगिता के अंत में 15 मेडल विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए चयन किया जाएगा. इन चयनित जिले और राज्य के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा. बेगूसराय के खिलाड़ियों ने बताया मैडल जीतने के लिए तैयारी शुरू कर दिए हैं. बालिका वर्ग की तरह ही हम लोग भी स्टेट में जीत दर्ज करेंगे.

लागोरी महाभारत काल के दौरान सबसे ज्यादा खेला जाता था. यह समूह में खेला जाने वाला खेल है. इसकी शुरुआत दक्षिण भारत के में हुई थी. लेकिन धीरे धीरे यह खेल समाप्त हो चुका था. मनोरंजन के लिए गांव घर में यह लगातार खेला जाता रहा है. यह लोकप्रिय खेल पिट्टू गरम, पत्थर तोड़, सितोलिया (7 पत्थर) जैसे नामों से जाना जाता है.

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