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फिर जागा बोफोर्स का भूत, सुप्रीम कोर्ट में लगी अर्जी; इस बार US से आएगा कांग्रेस की नींद उड़ाने वाला सबूत!

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Bofors Case: बोफोर्स का जिन्न एक बार फिर से बाहर निकल सकता है. सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गई है. और तो और, सीबीआई ने भी अमेरिका से इस मामले को लेकर अहम जानकारी मांगी है.

फिर जागा बोफोर्स का भूत, SC में लगी अर्जी; CBI ने US से मांगा सबसे बड़ा सबूत

करीब चार दशक भी पुराना है बोफोर्स केस.

हाइलाइट्स

  • बोफोर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल.
  • सीबीआई ने अमेरिका से महत्वपूर्ण जानकारी मांगी.
  • राजीव गांधी पर गंभीर आरोप, कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

नई दिल्ली: बोफोर्स मामले में नया मोड़ आ गया है. सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दायर की गई है, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के 2005 के फैसले को चुनौती दी गई है. यह वही फैसला था, जिसमें हिंदुजा बंधुओं के खिलाफ सभी आरोप खारिज कर दिए गए थे. वकील अजय अग्रवाल द्वारा दायर इस अर्जी में जल्द सुनवाई की मांग की गई है. वहीं, भारत सरकार ने अमेरिका को एक औपचारिक न्यायिक अनुरोध (Letter Rogatory) भेजा है. इसमें 64 करोड़ रुपये के बोफोर्स घोटाले से जुड़ी अहम जानकारी मांगी गई है. यह घोटाला 1980 के दशक में कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था, जब स्वीडन से 155mm फील्ड आर्टिलरी गन्स खरीदी गई थीं.

CBI ने हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग को यह अनुरोध भेजा है. एजेंसी ने अमेरिका स्थित निजी डिटेक्टिव फर्म फेयरफैक्स के प्रमुख माइकल हर्शमैन के पास मौजूद दस्तावेजों की मांग की है. कहा जा रहा है कि हर्शमैन के पास स्वीडिश हथियार निर्माता A B Bofors द्वारा दी गई कथित रिश्वत से जुड़े अहम सबूत हैं.

राजीव गांधी पर गंभीर आरोप

2017 में हर्शमैन ने दावा किया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ‘Mont Blanc’ नामक स्विस बैंक खाते की जानकारी मिलने के बाद कड़ी नाराजगी जताई थी. इस खाते में बोफोर्स से कथित तौर पर मिले रिश्वत के पैसे जमा थे. हर्शमैन ने यह भी कहा था कि राजीव गांधी सरकार ने उनकी जांच को नाकाम करने की कोशिश की थी.

क्यों इतना बड़ा है यह मामला?

बोफोर्स घोटाला पहली बार 1987 में स्वीडिश पब्लिक ब्रॉडकास्टर ने उजागर किया था. यह घोटाला राजीव गांधी सरकार के पतन का एक प्रमुख कारण बना. 2004 में दिल्ली हाईकोर्ट ने राजीव गांधी के खिलाफ रिश्वत के आरोप खारिज कर दिए थे, लेकिन इस घोटाले से जुड़े सवाल आज भी उठते रहते हैं.

इतालवी कारोबारी ओत्तावियो क्वात्रोच्ची का नाम इस घोटाले से सीधे जुड़ा हुआ था. उन्हें राजीव गांधी सरकार में काफी प्रभावशाली माना जाता था. जब उन पर जांच की तलवार लटक रही थी, तब उन्हें देश छोड़ने की अनुमति दे दी गई थी.

CBI ने 1990 में यह मामला दर्ज किया था और 1999-2000 में चार्जशीट दाखिल की थी. हालांकि, 2011 में क्वात्रोच्ची के खिलाफ केस बंद कर दिया गया था. अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की फिर से सुनवाई होने पर कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

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