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डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी दूतावासों से प्रदूषण निगरानी बंद की.

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डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के दूतावासों से प्रदूषण पर निगरानी बंद कर दी है. इससे दिल्ली समेत दुनियाभर में वायु गुणवत्ता की लाइव ट्रैकिंग बंद हो गई है. बजट कटौती इसका कारण है.

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बजट कटौती के कारण निगरानी कार्यक्रम बंद.

हाइलाइट्स

  • अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप ने दूतावासों से प्रदूषण निगरानी बंद की.
  • दिल्ली में भी अमेरिकी दूतावासों में वायु गुणवत्ता की लाइव ट्रैकिंग बंद.
  • बजट कटौती के कारण निगरानी कार्यक्रम बंद करने का ल‍िया फैसला.

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद बहुत सारे फैसले लिए हैं, जिससे पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है. अब ट्रंप प्रशासन ने भारत, अमेर‍िका समेत पूरी दु‍न‍िया में अपने दूतावासों के माध्‍यम से प्रदूषण पर निगरानी रखनी बंद कर दी है. द‍िल्‍ली में भी अमेर‍िकी दूतावास से पॉल्‍यूशन की लाइव ट्रैक‍िंग की जा रही थी, लेकिन अब उसे बंद कर दी गई है. इसे द‍िल्‍ली वाले अच्‍छी तरह से समझ सकते हैं.

अमेर‍िका दूतावासों से पॉल्‍यूशन की लाइव ट्रैकिंग काफी सटीक होती थी. इससे पूरी दुन‍िया खासकर अमेर‍िका में रहने वाले भारतीयों को अपने शहर के बारे में जानकारी हास‍िल हो जाती थी. वैसे अमेर‍िका ने यह सुविधा अपने नागर‍िकों के ल‍िए बनाई थी, लेकिन डोनाल्‍ड ट्रंप ने इसे बेकार खर्च बताते हुए इसके लिए बजट देना बंद कर दिया है. इसके बाद विदेश विभाग ने “बजट की कमी” का हवाला देते हुए कहा कि वह वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के डेटा प्रसारण को समाप्त कर रहा है. विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा, बजट में कटौती की वजह से हमें इस सुव‍िधा को बंद करना पड़ रहा है. हम आगे ऐसे और आंकड़े जारी नहीं कर सकते. पुराना डेटा पर्यावरण संरक्षण एजेंसी की साइट पर रहेगा, लेकिन लाइव डेटा मंगलवार को बंद कर दिया गया और जब तक धनराशि बहाल नहीं हो जाती, तब तक बंद रहेगा.

जब चीन हो गया शर्मिंदा
अमेरिका 2008 से ही ये डेटा शेयर करता रहा है. लेकिन हाल ही में चीन ने इस पर सेंसर लगा दिया था. उसने कहा था क‍ि अमेर‍िका इसके माध्‍यम से जासूसी करने की कोश‍िश कर रहा है. 2014 में जब ओबामा एक श‍िखर सम्‍मेलन में शामिल होने गए थे, तब एक ऐप पर अमेर‍िकी दूतावास का डेटा शेयर हो गया था, जिससे पता चला था क‍ि जो आंकड़े चीन जारी कर रहा है और जो आंकड़े अमेर‍िका जारी कर रहा है, उसमें काफी अंतर है. पता चला क‍ि चीन प्रदूषण के आंकड़े छुपाने की कोश‍िश कर रहा था. इससे चीन की काफी शर्मिंदगी हुई थी.

भारत पर क्‍या असर
अमेरिकी दूतावास से मिले पाल्‍यूशन डेटा का उपयोग द‍िल्‍ली के ल‍िए भी क‍िया जाता था. क्‍योंक‍ि द‍िल्‍ली में एयर क्‍वाल‍िटी इंडेक्‍स काफी खराब रहता है. खासकर जनवरी के महीने में स्‍थ‍िति‍ काफी गंभीर होती है. यहां से मिला डेटा पूरी दुन‍िया की एजेंसियां यूज करती हैं और बताती हैं क‍ि भारत और खासकर द‍िल्‍ली में प्रदूषण से हालात क‍ितनी गंभीर हैं. अब ट्रंप ने इस पर रोक लगा दी है तो डेटा बाहर नहीं आएगा और एजेंसियों को भारत सरकार के ही डेटा पर भरोसा करना होगा.

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