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डॉक्यूमेंट्री ‘द एज ऑफ डिस्क्लोजर’ में अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का एलियन्स को लेकर दावा

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एक तरफ कहा जाता है कि एलियंस की मौजूदगी के कोई सबूत नहीं हैं, तो दूसरी ओर अमेरिकी खुफिया एजेंसी के लोग ऐसे दावों को हवा दे देते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या धरती पर सच में एलियन मौजूद हैं? क्या हमसे कोई सच…और पढ़ें

एलियंस को लेकर अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का सनसनीखेज दावा, क्या छुपाया है सच?

Canva से ली गई सांकेतिक तस्वीर.

एक नई डॉक्यूमेंट्री ‘द एज ऑफ डिस्क्लोजर’ में 34 अमेरिकी सैन्य और खुफिया अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्हें एलियन्स और उनकी टेक्नोलॉजी के बारे में सीधा ज्ञान या अनुभव है. इन अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका ने दशकों से एलियन्स के सबूतों को छिपाया है और चीन व रूस के साथ एलियन टेक्नोलॉजी को हासिल करने की गुप्त प्रतिस्पर्धा चल रही है. एक नई डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘द एज ऑफ डिस्क्लोजर’ ने दावा किया है कि 34 अमेरिकी सैन्य और खुफिया अधिकारियों ने एलियन्स और उनकी टेक्नोलॉजी के बारे में सीधा ज्ञान या अनुभव होने की बात स्वीकार की है. इन अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका ने दशकों से एलियन्स के सबूतों को छिपाया है और चीन व रूस के साथ एलियन टेक्नोलॉजी को हासिल करने की गुप्त प्रतिस्पर्धा चल रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में धरती पर एलियंस मौजूद हैं और उनकी सच्चाई छुपाई जा रही है?

फिल्म में यह भी दावा किया गया है कि जो देश सबसे पहले एलियन टेक्नोलॉजी को समझ लेगा, वह आने वाले दशकों में दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बन जाएगा. पूर्व वरिष्ठ खुफिया अधिकारी लुइस एलिज़ोंडो ने कहा कि यह “अमेरिकी सरकार का अब तक का सबसे सफल डिसइन्फॉर्मेशन अभियान है, जिसमें 80 साल तक झूठ और धोखे का सहारा लिया गया.” फिल्म में डोनाल्ड ट्रंप के नए विदेश मंत्री और न्यूयॉर्क की डेमोक्रेटिक सीनेटर किर्स्टन गिलिब्रैंड जैसे राजनेताओं को भी शामिल किया गया है. फिल्म के निर्देशक फाराह ने कहा, “यह एक बहुत ही वास्तविक स्थिति है, और इसके दांव बेहद ऊंचे हैं. यह हमारे समय का सबसे द्विदलीय मुद्दा है – दोनों राजनीतिक दलों के नेताओं ने मुझे स्पष्ट कर दिया कि यह कितना गंभीर है. लेकिन आम जनता को इसकी कोई जानकारी नहीं है. सड़क पर चलने वाला आम आदमी पूरी तरह से अंधेरे में है.”

फिल्म में पेंटागन के एडवांस्ड एरोस्पेस थ्रेट आइडेंटिफिकेशन प्रोग्राम (AATIP) के अस्तित्व का भी जिक्र किया गया है, जिसके बारे में लुइस एलिज़ोंडो ने दावा किया कि वे इसके सदस्य थे. सार्वजनिक दबाव के बाद पेंटागन ने कुछ रिपोर्ट्स जारी कीं, जिनमें सैन्य कर्मियों द्वारा देखे गए सैकड़ों अज्ञात हवाई घटनाओं (UAP) की पुष्टि की गई. डॉक्यूमेंट्री में 2004 में सैन डिएगो के ऊपर फिल्माए गए ‘टिक टैक’ यूएफओ वीडियो का भी जिक्र है, जिसे लेफ्टिनेंट कमांडर चैड अंडरवुड ने फिल्माया था. फिल्म में दावा किया गया है कि यह एक एलियन यान था. 2023 में, यूएस डिफेंस एजेंसी में यूएपी के विश्लेषण का नेतृत्व करने वाले डेविड ग्रश ने कहा कि सरकार ने एलियन यान और “बायोलॉजिक्स” पर कब्जा कर लिया है.

हालांकि, कुछ आलोचकों का कहना है कि यह डॉक्यूमेंट्री कोई नया सबूत पेश नहीं करती है. इंडीवायर के क्रिश्चियन ज़िल्को ने कहा कि ‘द एज ऑफ डिस्क्लोजर’ “बिना किसी वास्तविक सबूत के सबसे प्रभावशाली तर्क पेश करती है.” वहीं, द हॉलीवुड रिपोर्टर के डैनियल फीनबर्ग ने कहा, “कुछ भी साबित नहीं होता है, इसलिए कुछ भी खंडन नहीं किया जा सकता. यह सिर्फ एक बेसिक केबल एक्सप्लॉइटेशन डॉक है, जिसे चमकदार बनाया गया है.” इसके अलावा, न्यूयॉर्क पोस्ट के इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट स्टीवन ग्रीनस्ट्रीट ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लुइस एलिज़ोंडो के दावों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि एलिज़ोंडो ने दावा किया था कि पेंटागन ने उन्हें आतंकवादियों पर जासूसी करने के लिए मानसिक शक्तियों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया था, जिससे कुछ लोगों ने फिल्म में शामिल वक्ताओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं. फिल्म का प्रीमियर टेक्सास के एसएक्सएसडब्ल्यू फिल्म फेस्टिवल में हुआ, लेकिन यह कई लोगों को यह समझाने में विफल रही कि निर्देशक डैन फाराह ने एलियन्स के बारे में कुछ नया साबित किया है.

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‘हाय कितना क्यूट है ये’, हुडी में लड़का गा रहा था रैप, महफिल लूट गए लाल जैकेट वाले के एक्सप्रेशन

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खूबसूरत वादियों में बैठे हुए एक पीले हुडी वाला बच्चा ‘तू है कहां’ गाने को एक सांस में गा रहा है. बच्चे के टैलेंट का वीडियो तो वायरल हो रहा है लेकिन इसमें महफिल लूटने का काम उसके बगल बैठा दोस्त कर रहा है.

'हाय कितना क्यूट है ये', हुडी में लड़का गा रहा था रैप, महफिल लूट गया दोस्त

बच्चों का क्यूट वीडियो हुआ वायरल. (Credit- Instagram/jp_negi_travelholic )

देश-दुनिया के कोने-कोने में टैलेंट बिखरा हुआ है. पहले जहां हम ज्यादातर लोगों को जान नहीं पाते थे, वहीं सोशल मीडिया के ज़माने में मिनटों में इंसान का टैलेंट पूरी दुनिया में छा जाता है. सिर्फ कुछ सेकंड का वीडियो वायरल हो जाता है और जिसे कोई नहीं जानता था, उसे हर कोई जान जाता है. इस वक्त एक ऐसा ही छोटे बच्चे का वीडियो वायरल हो रहा है.

खूबसूरत वादियों में बैठे हुए एक पीले हुडी वाला बच्चा ‘तू है कहां’ गाने को एक सांस में गा रहा है. बच्चे के टैलेंट का वीडियो तो वायरल हो रहा है लेकिन इसमें महफिल लूटने का काम उसके बगल बैठा दोस्त कर रहा है. हिमाचल प्रदेश के एक छोटे बच्चे का वीडियो चर्चा में है, जिसमें वह ज़ैन (ZAYN) के गाने ‘तू है कहां’ को गा रहा है.

महफिल लूट गया ‘दोस्त’
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक छोटा सा बच्चा ‘Tu Hai Kahan’ गा रहा है. वहीं उसके साथ उसका दोस्त भी लाल रंग की जैकेट पहनकर बैठा हुआ है. लोगों को मासूम बच्चे का ये अंदाज इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे वीडियो का बेस्ट पार्ट बताया है. बच्चा अपने दोस्त को हाइप करने के लिए इतने ज़बरदस्त एक्सप्रेशन दे रहा है कि देखने वाले बिना उसे प्यार किए नहीं रह पाएंगे.

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जिम में ही कसरत करते हुए कर सकेंगे सालसा डांस, नहीं देनी होगी अलग से फीस, मशीन ने दिया आइडिया!

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gym salsa machine: एक अनोखे वीडियो में जिम में कसरत कर रहा शख्स सालसा डांस करता दिख रहा है. लोगों को इस तरह की मशीन खूब पसंद आई है. कोई इसे डांस करने के लिए हासिल करना चाहता है तो कोई कमर और पीठ दोनों की कसरत क…और पढ़ें

जिम में कसरत करते हुए कर सकेंगे सालसा डांस, कमर पीठ की भी होगी वर्जिश, मशीन ने

लोगों को यह मशीन कई कारणों से पसंद आ रही है. (तस्वीर: Instagram video grab)

क्या आप जिम में कसरत करने से बोर हो जाते हैं? या क्या आपको जिम और डांस में से किसी एक को चुनना पड़ रहा है? क्या आप चाहते हैं कि जिम में कसरत करते हुए डांस भी कर सकें? लेकिन उसके लिए आपको अलग से पैसे ना देने पड़ें?  सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो ने आपकी ऐसी समस्याओं का अनूठा हल निकाला है. इसमें एक ऐसी मशीन दिखाई गई है जिसमें जिम में कसरत करते समय ही आपकी डांस करने की हसरत पूरी हो सकती है. डांस भी ऐसा वैसा नहीं, मशीन आपको सालसा डांस कराएगी.

बिलकुल सालसा डांस!
जी हां जिम कि इस मशीन को ऐसा डिजाइन किया गया है जिसमें एक शख्स वैसे तो जिम में साइकिल मशीन की तरह पैर चला रहा है. लेकिन उसके शरीर की गतिविधि सालसा डांस के स्टेप्स की तरह दिखाई देती है. बैकग्राउंड म्यूजिक भी वीडियो में ऐसा तड़का लगा रहा है कि अगर गौर से ना देखा गया तो लगेगा कि कोई सालसा डांस ही कर रहा है.

कैसे काम करती है ये मशीन?
वीडियो में एक शख्स जिम में एक अनोखी मशीन पर पैर चला रहा है जिसके साथ उसके शरीर के मूवमेंट्स डांस की तरह लग रहे हैं. साइकिल मशीन में पैडल आम साइकिल के तरह आगे पीछे चलते हैं, लेकिन इस मशीन में पैडल की दिशा कुछ अलग है. इसमें आपको पैडल दायें से बायें घुमाने होंगे. बाकी मशीन का हिस्सा एक स्टेशनरी साइकिल की तरह है.

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OMG! ना ईंट-ना सीमेंट, भारत में खुली अनोखी फैक्ट्री, देख लोग रह गए दंग!

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गुड़गांव की Control Z फैक्ट्री, बांस और मिट्टी से बनी भारत की पहली फैक्ट्री है, जो पुराने फोन को नया बनाती है. फाउंडर युग भाटिया ने इसे सस्टेनेबिलिटी के तहत बनाया.

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बांस

बांस की लकड़ियों और मिट्टी से बनी फैक्ट्री

हाइलाइट्स

  • गुड़गांव में Control Z फैक्ट्री बांस और मिट्टी से बनी है.
  • यह फैक्ट्री मोबाइल रिपेयरिंग का काम करती है.
  • फैक्ट्री पर्यावरण के अनुकूल और सस्टेनेबल मटेरियल से बनी है.

दिल्ली: गुड़गांव में स्थित एक अनोखी फैक्ट्री Control Z इन दिनों काफी चर्चा में है. इस फैक्ट्री की खासियत यह है कि इसे पूरी तरह बांस और मिट्टी से बनाया गया है. भारत की यह पहली ऐसी फैक्ट्री है, जिसमें किसी भी तरह की ईंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया. खास बात यह है कि यह फैक्ट्री मोबाइल रिपेयरिंग का काम करती है, जहां पुराने फोन को नया बनाया जाता है.

कैसे आया यह अनोखा आइडिया?
Control Z के फाउंडर युग भाटिया ने बताया कि उनका काम सस्टेनेबिलिटी यानी पर्यावरण के अनुकूल समाधान पर आधारित है. वह पुराने फोन खरीदकर उन्हें रिपेयर कर नए जैसे फोन में बदलते हैं. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने फैसला किया कि उनकी फैक्ट्री भी सस्टेनेबल मटेरियल से बनाई जाए.
युग भाटिया ने कहा कि “हम जो काम कर रहे हैं, वह पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक कदम है. हम पुराने फोन को रिसाइकिल कर नया बना रहे हैं, तो क्यों न हमारी फैक्ट्री भी पूरी तरह इको-फ्रेंडली हो? इसी सोच के साथ हमने इस फैक्ट्री को बांस और मिट्टी से बनाने का फैसला किया.”

सबसे बड़ी चुनौती
युग भाटिया ने बताया कि, इस तरह की फैक्ट्री पहले कभी भारत में नहीं बनाई गई थी, इसलिए इसे बनाना एक बड़ी चुनौती थी. सबसे बड़ी दिक्कत मास्टर कारीगरों की कमी थी, क्योंकि इस तरह का निर्माण कार्य केवल पश्चिम बंगाल और असम के कुछ विशेषज्ञ ही कर सकते थे. उन्हें दिल्ली लाकर काम करवाना बेहद मुश्किल था.
इसके अलावा, उच्च गुणवत्ता वाले बांस की जरूरत थी, जो भारत में सिर्फ नॉर्थ-ईस्ट रीजन में मिलता है. इसे गुड़गांव तक लाना और संरचना तैयार करना भी एक चुनौतीपूर्ण काम था.

कैसा दिखता है यह अनोखा स्ट्रक्चर?
यह पूरी फैक्ट्री लकड़ी और मिट्टी से बनी है. इसकी दीवारें मिट्टी और बांस से बनाई गई हैं, जिससे गर्मी में ठंडक बनी रहती है और सर्दी में गर्माहट मिलती है. इस तरह का निर्माण प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करने का बेहतरीन उदाहरण है.

सस्टेनेबिलिटी की मिसाल
बांस और मिट्टी से बनी यह फैक्ट्री पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल है. यह परियोजना साबित करती है कि यदि सही सोच और प्रयास किए जाएं तो निर्माण के लिए पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाए जा सकते हैं. युग भाटिया का यह कदम भारत में सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन को बढ़ावा देने में एक मिसाल साबित हो सकता है.

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