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जापान और इंडोनेशिया के वैज्ञानिकों ने बनाया सुपर कॉकरोच- Scientists gave superpowers of navigation to cockroaches they became cyborgs what is purpose of scientists behind this
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जापान और इंडोनेशिया के वैज्ञानिकों ने मिलकर छोटे से जीव को एक ऐसी महाशक्ति दी है, जिससे वो सुपर कॉकरोच बन गया. इस पीछे वैज्ञानिकों का खास मकसद है. उनका मानना है कि तिलचट्टों के चपटे शरीर ऐसी जगहों पर भी जा सकते…और पढ़ें

कुछ ऐसा दिखेगा कॉकरोच साइबॉर्ग (Photo Credit- मोचम्माद अरियान्टो)
जापान में ओसाका विश्वविद्यालय और इंडोनेशिया में डिपोनेगोरो विश्वविद्यालय की एक टीम ने कॉकरोच जैसे छोटे से जीव को एक ऐसी महाशक्ति दी है, जिससे वो सुपर कॉकरोच बन जाएंगे. वैज्ञानिको ने कॉकरोच को नेविगेशन से लैस कर दिया है. उनके शरीर पर कृत्रिम रचना का निर्माण कर दिया, जिससे वो साइबॉर्ग में बदल गए. वैज्ञानिकों का मानना है कि तिलचट्टों के चपटे शरीर ऐसी जगहों पर भी जा सकते हैं, जहां कोई इंसान नहीं जा सकता. इसके अलावा ये कोई निशान भी नहीं छोड़ते और बिना कुछ खाए लंबे समय तक जिंदा रह सकते हैं. ये सभी गुण उन्हें खोज और बचाव अभियानों के लिए एकदम सही बनाते हैं. साइंटिस्ट्स को उम्मीद है कि इन बग-बॉट्स का इस्तेमाल युद्ध और प्राकृतिक आपदा के बाद छोड़े गए खतरनाक मलबे का निरीक्षण करने और यहां तक कि मुसीबत में फंसे बचे लोगों और बचावकर्मियों का पता लगाने के लिए किया जा सकता है.
इस रिसर्च में शामिल वैज्ञानिकों का मानना है कि कॉकरोच को साइबॉर्ग्स में बदल देने से कुछ इलेक्ट्रॉनिक संकेतों द्वारा मानव द्वारा चुने गए लक्ष्य स्थान तक निर्देशित की जा सकती है. इसमें लाखों वर्षों के विकास के दौरान विकसित की गई जैविक कॉकरोच की शारीरिक रचना मददगार साबित होगी. डिपोनेगोरो विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियर और प्रमुख रिसर्चर मोचामद अरियान्टो बताते हैं , “छोटे पैमाने पर एक कार्यशील रोबोट का निर्माण चुनौतीपूर्ण है; हम चीजों को सरल रखकर इस बाधा को दूर करना चाहते थे. ऐसे में कीटों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर, हम रोबोटिक्स इंजीनियरिंग की छोटी-मोटी बारीकियों से बच सकते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं.” इन रिसर्चर्स का मानना है कि अगर हम छोटे से रोबोट को कमांड देंगे, तो वो हमारी कमांड फॉलो करेंगे, लेकिन सीढ़ियों से उतरने में ही वो गिरकर टूट जाएंगे. ऐसे में अगर हम छोटे रोबोट्स को कहीं विषम परिस्थिति में भेजेंगे तो उनका सही सलामत बच पाना मुश्किल होगा. लेकिन कॉकरोच के साथ ऐसा नहीं है.
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रिसर्चर्स ने आगे कहा कि एक कॉकरोच दीवारों पर चढ़ सकता है, परिधि को पार कर सकता है, पाइपों में घुस सकता है और यहां तक कि कम ऑक्सीजन वाले वातावरण को भी सहन कर सकता है. इस वजह से हमने उसे नेविगेशन की शक्ति दी. हमने रेत, पत्थरों और लकड़ी से भरे एक उबड़-खाबड़ रास्ते में बायो-हैक किए गए तिलचट्टों का परीक्षण किया. साइबॉर्ग को उसके लक्ष्य तक पहुंचने के लिए नेविगेशन कमांड का संयम से इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इसके अलावा, उस छोटे से जीव को ज़्यादातर अपना रास्ता खुद खोजने, बाधाओं से बचने या उन पर काबू पाने और जब चीज़ें उलट-पुलट हो जाती थीं, तो खुद को सही करने की अनुमति दी गई थी. इस एल्गोरिथ्म ने तिलचट्टों के प्राकृतिक व्यवहारों (जैसे दीवार का पीछा करना और चढ़ना) का उपयोग बाधाओं के चारों ओर और ऊपर जाने के लिए किया. ओसाका विश्वविद्यालय के वेट रोबोटिक्स इंजीनियर केसुके मोरिशिमा कहते हैं , “मेरा मानना है कि हमारे साइबॉर्ग कीट विशुद्ध यांत्रिक रोबोटों की तुलना में कम प्रयास और शक्ति से अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सकते हैं.” बेशक, यह स्पष्ट नहीं है कि तिलचट्टे इस सब के बारे में क्या महसूस करते हैं, लेकिन रोबोटों को जिन जगहों पर जाने में चुनौती होगी, उन्हें ये कॉकरोच आसानी से पार कर जाएंगे. बता दें कि यह शोध सॉफ्ट रोबोटिक्स में प्रकाशित हुआ था.
March 12, 2025, 11:53 IST
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