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किसी तीसरे का Peace प्लान नहीं करेगा काम , रूस-यूक्रेन को डायरेक्ट करनी होगी बात, जयशंकर की बात क्या समझेंगे ट्रंप?

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रूस-यूकेन के बीच जंग के तीन साल हो गए. अमेरिका और यूरोप की मदद से जंग लड़ रहे जेलेंस्की की राह और भी कठिन हो गई है. अमेरिका ने सारी मदद रोक दी है, वह अब यूरोपीय देशों की रहमों करम पर युद्ध के मैदान में हैं. मगर…और पढ़ें

तीसरे का Peace प्लान नहीं करेगा काम , रूस-यूक्रेन को खुद करनी होगी बात- भारत

कैसे खत्म होगी रूस-यूक्रेन की जंग?

हाइलाइट्स

  • रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करने के लिए भारत ने मध्यस्थता की पेशकश की.
  • पीएम मोदी ने दोनों देशों को शांति वार्ता पर जोर दिया.
  • जयशंकर ने कहा, युद्ध का हल बुद्ध की राह पर चलकर ही संभव.

‘इस जंग में शामिल दोनों पार्टी का मसला है, हमने कभी भी पीस को लेकर किसी पर दबाव नहीं दिया…’ 

            चैथम हाउस में जयशंकर

तारीख थी 22 फरवरी 2022, यूक्रेन में लाखों लोगों की नींद तोप और मिसाइलों की गर्जनों से खुली थी. दरअसल, सुबह के 5 बजे रूस ने डोनेत्स्क और लुहान्स्क क्षेत्रों सहित पूरे यूक्रेन में कई स्थानों पर अटैक किया था. ये जंग पिछले तीन सालों से जारी है. इस जंग को खत्म कराने के लिए लगातार कोशिशें जारी हैं. दोनों देशों के बीच जारी जंग को खत्म कराने के लिए भारत को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ माना जा रहा था. मगर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई मौकों पर ये कहते हुए सुना जा सकता है कि कोई तीसरा इस जंग को नहीं सुलझा सकता है. इस जंग को खत्म करना है तो उनको (पुतिन और जेलेंस्की को) एक साथ पीस टेबल पर बैठना होगा, बात करनी होगी. ये जंग हथियार, गोले बारूद या फिर मिसाइल से नहीं बल्कि बुद्ध के रास्ते पर चलकर ही खत्म किया जा सकता है, मोदी की इस बात को आसान भाषा में समझे तो दोनों देश आमने सामने बात करेंगे तब ही ये जंग समाप्त होगा, कई तीसरा इसे खत्म करने में मदद कर सकता है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर भी पीएम मोदी की बात को दोहरा रहे हैं. दरअसल,  विदेश मंत्री यूरोपीय देश ब्रिटेन के दौरे पर हैं. चैथम हाउस, एक The Royal Institute of International Affairs भी कहा जाता है. यह एक थिंक टैंक (Think Tank) है, जो अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक नीतियों और कूटनीति से संबंधित शोध और विश्लेषण करता है. अब भारतीय विदेश मंत्री यहां पर आमंत्रित हैं, तो जाहिर सी बात है कि उनसे रूस-यूक्रेन जंग पर दिल्ली के नजरिये पर सवाल किया जाएगा. मगर, एस जयशंकर ने रूस-यूक्रेन जंग पर पूछे गए सवालों पर जो जवाब दिया, उसका जवाब तो पहले से ही पता था, यानी कि भारत की नीति किसी भी अंतरराष्ट्रीय मसलों को सुलाझाने के लिए बुद्ध की राह, जी हां  वहीं बात तो पीएम  मोदी रूस-यूक्रेन के बीच शुरू हुए जंग के बाद से दोहराते आ रहे हैं. जयशंकर ने मोदी की बातों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस जंग को खत्म करना है तो कीव और मॉस्को को एक साथ टेबल पर बैठना होगा किसी तीसरे के सुनने की जरूरत नहीं है.

बुद्ध की राह जरूरी- पीएम मोदी

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर, चाहे रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात या फिर यूक्रेन के प्रेसिडेंट जेलेंस्की से मुलाकात के बाद, उन्होंने युद्ध रोकने के लिए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता पर जोर दिया. उनका कहना था कि अगर किसी भी मसले का हल युद्ध नहीं बुद्ध हैं, यानी कि शांति की राह ही ग्लोबल विकास और मानवता के लिए जरूरी है. पीएम मोदी की इस बात को चैथम हाउस में भारतीय विदेश मंत्री ने दोहराया है. अगर, हाल के अंतरराष्ट्रीय घटना क्रम को देखें तो डोनाल्ड ट्रंप और जेलेंस्की की ओवल हाउस में मुलाकात ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है. ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जिस तरीके से व्यवहार किया, इससे साफ पता चलता है कि किसी तीसरे देश को आपके (रूस-यूक्रेन) जंग से कुछ नहीं पड़ी है. आखिर क्यों? बताते हैं.

अमेरिका में जंग से क्या मिल रहा था

दरअसल, अमेरिका और पश्चिमी देश ही हैं, जिनकी रहमों करम पर यूक्रेन, रूस के सामने तीन साल से जंग में डटा हुआ है. अमेरिका 65 अरब डॉलर के साथ लगभग 180 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता भी कर चुका है. मगर, ट्रंप की सरकार आने के बाद उन्होंने साफ कह दिया है कि फ्री में वह यूक्रेन की मदद नहीं करना चाहते हैं, यानी कि उनको बदले में कुछ चाहिए, मगर क्या? अर्थ मिनरल्स. यूक्रेन दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) वाला देश है.  इसमें कई प्रकार के खनिज और प्राकृतिक संसाधन शामिल हैं, जो वैश्विक औद्योगिक और तकनीकी विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. अमेरिका की नजर इसपर टिकी हुई है. मगर यूक्रेन भी इस बात पर अडिग रहा है कि अगर अमेरिका उसे सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है तो वह डील नहीं करेगा. फिर क्या था, ट्रंप ने उनको अपने देश से गेट आउट कर दिया और सभी मदद को रोक दिया.

यूरोप का भी फायदा

वहीं, यूरोपीय देश खास कर ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी भी सैन्य के साथ यूक्रेन की मानवीय सहायता कर रहे हैं. अमेरिका से दुत्कारे जाने के बाद यूरोपीय देशों ने जेलेंस्की को दुलारा है. यूरोपीय देशों ने काफी कर्ज देने का ऐलान किया है. मगर, इस जंग से यूरोपीय देशों को काफी फायदा भी तो हो रहा है. मगर क्या? लगातार, जारी जंग की वजह से यूरोपीय देशों जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन रक्षा उद्योग को काफी फायदा हुआ है. आपको बता दें कि जर्मनी की Rheinmetall, फ्रांस की Dassault Aviation और ब्रिटेन की BAE Systems जैसी कंपनियों को अरबों डॉलर के ऑर्डर मिले हैं. इन देशों को लगातार फायदे हो रहे हैं. अगर, यूक्रेन के नजरिये से देखें तो ये देश भी नहीं चाहेंगे कि जंग जल्दी खत्म हो, मगर नुकसान किसे हो रहा है, यूक्रेन को, किसके सैनिक मर रहे हैं- रूस और यूक्रेन के, वैश्विक शांति के लिए खतरा पैदा हो रहा है. इसका समाधान क्या हो सकता है? दोनों देश एक साथ टेबल पर बैठे और शांति का रास्ता निकालें.

जयशंकर संबोधन की कुछ खास बातें जो यूक्रेन-रूस पर भारत के नजरिये को दिखाता है

जयशंकर ने चैथम हाउस में भारत का प्रतिनिधित्व  करते हुए कहा, ‘मेरे प्रधानमंत्री (मोदी) रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेनी प्रेसिडेंट ज़ेलेंस्की से बात कर रहे हैं. हमने दोनों पक्षों के राष्ट्रपतियों, रक्षा मंत्रियों और एनएसए से मुलाकात की है. 2022 की गर्मियों में ब्लैक सी ग्रेन कॉरिडोर का निर्माण किया जाना था और तुर्किये ने रूसियों पर दबाव बनाने के लिए हमसे संपर्क किया और हमने ऐसा किया. जब ज़ापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर गोलीबारी हुई तो यूक्रेनियों ने भारत से संपर्क किया, हमने रूसियों को संदेश भेजे, IAEA के महानिदेशक श्री ग्रॉसी के साथ काम किया. शांति वार्ता के प्रारूप या वार्ता की शर्तों पर कभी सलाह नहीं दी, हमने कभी कोई शांति योजना नहीं बनाई या कोई विशेष दृष्टिकोण नहीं रखा क्योंकि हमें नहीं लगता कि यह उचित है, हमारा मानना ​​है कि वार्ता सीधे होनी चाहिए.’ इससे साफ जाहिर होता है कि भारत किसी प्रकार के शांति का दूत न बनते हुए भी दोनों के बीच शांति की वकालत कर रहा है.

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