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कम उम्र में दिल का दौरा, लेकिन नहीं रुकी गौसेवा! दिव्यानी की अनमोल विरासत आज भी है जिंदा, जानें कहानी

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छतरपुर की दिव्यानी ने बेसहारा गायों की सेवा के लिए गोशाला बनाई, जिसे उनकी मृत्यु के बाद भी मरजीना बानो और शुभा खरे चला रही हैं. जनसहयोग और नगरपालिका की मदद से यह गोशाला लगातार विस्तार कर रही है. दिव्यानी की यह …और पढ़ें

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दिव्यानी गोशाला छतरपुर 

हाइलाइट्स

  • छतरपुर की दिव्यानी ने बेसहारा गायों की सेवा के लिए गोशाला बनाई है.
  • इसे उनकी मृत्यु के बाद भी मरजीना बानो और शुभा खरे चला रही हैं.
  • जनसहयोग और नगरपालिका की मदद से यह गोशाला लगातार विस्तार कर रही है.

छतरपुर: छतरपुर जिले के छत्रसाल नगर में एक ऐसी गोशाला है, जिसकी कहानी सुनकर हर कोई प्रेरित हो जाएगा. इस गोशाला की शुरुआत दिव्यानी नाम की एक लड़की ने की थी, जिसने बेसहारा गायों की सेवा करने का बीड़ा उठाया. धीरे- धीरे उसकी इस नेक पहल से मरजीना बानो और शुभा दुबे भी जुड़ गईं.

दिव्यानी ने जब गो सेवा शुरू की, तब उसके पास ज्यादा संसाधन नहीं थे, लेकिन उसका समर्पण इतना गहरा था कि वह दिन-रात गायों की देखभाल में जुटी रहती. दुर्भाग्य से कम उम्र में ही हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई, लेकिन उसकी इस मुहिम को मरजीना बानो और शुभा खरे ने आगे बढ़ाया.

दिव्यानी के साथ जुड़ी थीं मरजीना बानो
मरजीना बानो बताती हैं, “मैं दिव्यानी के साथ जुड़ी थी और उसके साथ गोसेवा करती थी. उसकी मौत के बाद भी हमने इस गोशाला को बंद नहीं होने दिया. अब यह दिव्यानी के नाम से ही चल रही है और आगे भी इसे बढ़ाने की पूरी कोशिश करेंगे.”

जनसहयोग से बनी बड़ी गोशाला
यह गोशाला पहले बहुत छोटी थी, लेकिन लोगों के सहयोग से यह धीरे-धीरे बड़ी होती गई. छतरपुर नगरपालिका भी इसमें मदद कर रही है, जैसे कि पानी और बिजली की सुविधाएं. बाकी जरूरतें, जैसे गायों के लिए चारा और दवाएं, जनसहयोग से जुटाई जाती हैं.

मरजीना बताती हैं, “हम गोशाला को पूरी ईमानदारी से चला रहे हैं. हमें खुशी होती है कि लोग हमारी मदद के लिए आगे आते हैं. दिव्यानी का सपना था कि कोई भी बेसहारा गाय सड़क पर न रहे, और हम उसी सपने को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं.”

मानवता की सेवा का प्रतीक बन चुकी है गौशाला
आज दिव्यानी छत्रसाल गोशाला में न सिर्फ बछड़ों और बूढ़ी गायों की देखभाल होती है, बल्कि घायल गोवंश को भी यहां सुरक्षित रखा जाता है. सरकारी शिक्षक शुभा खरे और मरजीना बानो इसे पूरी लगन से चला रही हैं.

यह गोशाला सिर्फ गायों के लिए नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का प्रतीक बन चुकी है. दिव्यानी भले ही इस दुनिया में नहीं रही, लेकिन उसकी सेवा और समर्पण की कहानी हमेशा लोगों को प्रेरित करती रहेगी.

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