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अमेरिकी राष्ट्रपति जॉनसन और कनाडाई पीएम पीयरसन की 1965 की विवादित मुलाकात

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अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर जेलेंस्की के साथ जो बर्ताव किया, वो शिष्टाचार से परे था. हालांकि अमेरिका में कई ऐसे प्रेसीडेंट हुए हैं, जिन्होंने मेहमानों के …और पढ़ें

जब US प्रेसीडेंट ने 69 वर्षीय के कनाडा PM को गुस्से में दीवार की ओर फेंका

हाइलाइट्स

  • अमेरिकी प्रेसीडेंट जॉनसन को कनाडा के पीएम का आलोचना करने वाला भाषण रास नहीं आया
  • तब अमेरिका ने वियतनाम में अपनी फौजें भेजकर आक्रामक कार्रवाई की थी
  • कनाडा के पीएम के साथ यूएस प्रेसीडेंट का व्यवहार शिष्टाचार की सारी सीमाएं तोड़ने वाला था

ये वाकया 1965 का है. जब तत्कालीन अमेरिकी प्रेसीडेंट लिंडन बी. जॉनसन ने कनाडा के प्रधानमंत्री लेस्टर पीयरसन को अपने ऑफिस में दीवार की ओर ऐसा धक्का दिया कि उनको सिर में चोट लगते लगते बची. आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए धमकी दी. पीयरसन अवाक रह गए कि ये क्या हो रहा है. क्या कोई अमेरिकी प्रेसीडेंट ऐसा भी कर सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपतियों का दूसरे नेताओं के साथ व्यवहार हमेशा सौहार्दपूर्ण नहीं रहा है और कुछ मामलों में कूटनीतिक शिष्टाचार की सीमाओं को पार कर गया.

– निक्सन का व्हाइट हाउस उनकी असभ्य भाषा को लेकर कुख्यात था, उनके समय में व्हाइट हाउस में सबसे ज्यादा नस्लीय, सेक्सिट और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल वहां हुआ
– लिंडन जानसन इतने आक्रामक थे कि सही मायने में व्हाइट हाउस के लोग उनसे अपनी इज्जत को लेकर घबराते थे. वो धमकाते और गालियां देते थे.
– डोनाल्ड ट्रंप सोशल मीडिया और भाषणों में बहुत असभ्य भाषा का इस्तेमाल करते थे. उन्होंने दिखा दिया कि शिष्टाचार की परवाह नहीं करते
– जॉन एफ. कैनेडी (1961-1963) के दौर में व्हाइट हाउस में निजी जीवन में असभ्यता थी. वह महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक व्यवहार करते थे.

तो आप समझ गए होंगे कि व्हाइट हाउस में शिष्टाचार हमेशा बरकरार नहीं रहा है. अब जानते हैं कि वो पूरा मामला क्या था, जब 1965 में जानसन में व्हाइट हाउस में मेहमान के तौर पर आए कनाडा के प्रधानमंत्री को धक्का दिया और अपशब्द कहे.अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन (Lyndon B. Johnson) और कनाडा के प्रधानमंत्री लेस्टर पीयरसन (Lester B. Pearson) में इस मीटिंग की चर्चा बड़ी हैरानी के साथ पूरी दुनिया में हुई.

कनाडा के प्रधानमंत्री पीयरसन ने एक भाषण में अमेरिका की आलोचना की और कहा कि अमेरिका को वियतनाम से फौजें हटा लेनी चाहिए. ये बात अमेरिकी प्रेसीडेंट जॉनसन को बहुत बुरी लग गई. (wiki commons)

अमेरिका तब वियतनाम युद्ध में उलझा हुआ था
1960 के दशक में अमेरिका वियतनाम युद्ध में गहराई से उलझ चुका था. अमेरिकी राष्ट्रपति जॉनसन चाहते थे कि उनके सहयोगी देश इस युद्ध का समर्थन करें. कनाडा के प्रधानमंत्री लेस्टर पीयरसन इस युद्ध के सख्त खिलाफ थे. कनाडा ने वियतनाम में शांति वार्ता का सुझाव दिया, जो अमेरिका की आक्रामक नीति के खिलाफ था.

कनाडा के प्रधानमंत्री ने भाषण में अमेरिका की आलोचना की
पीयरसन ने एक भाषण में अमेरिका की आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका को वियतनाम से धीरे-धीरे अपनी सेना हटानी चाहिए. एक कूटनीतिक हल निकालना चाहिए. जॉनसन को इस भाषण पर बहुत गुस्सा आया क्योंकि वो चाहते थे कि कनाडा अमेरिका का पूर्ण समर्थन करे.

29 अप्रैल 1965 को कनाडा के प्रधानमंत्री लेस्टर पीयरसन वाशिंगटन डी.सी. में थे. पीयरसन को पता था कि उनका भाषण अमेरिकी राष्ट्रपति को नाराज कर सकता है, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि वे जॉनसन से इस विषय पर चर्चा कर सकते हैं.

जब कनाडा के प्रधानमंत्री पीयरसन व्हाइट हाउस में पहुंचे तो जॉनसन गुस्से में भरे हुए थे. उन्होंने बातचीत के बीच में उन्हें पकड़ा और दीवार की ओर धक्का दे दिया. पीयरसन हतप्रभ रह गए. (file photo)

गुस्से में दीवार की तरफ धक्का दे दिया
पीयरसन को व्हाइट हाउस में जॉनसन से मिलने बुलाया गया. जॉनसन पहले से ही गुस्से में थे. जब पीयरसन व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस पहुंचे, तो बातचीत के बीच में ही जॉनसन ने उन्हें अचानक पकड़कर दीवार की तरफ धक्का दे दिया. फिर बहुत गुस्से में बोले:
“You don’t come into my damn backyard and piss on my rug.” (मतलब: “तुम मेरे घर आकर मेरे कालीन पर पेशाब नहीं कर सकते!”)

पीयरसन हैरान रह गए, जॉनसन चिल्लाते रहे
पीयरसन इस हमले से हैरान रह गए. सकते में आ गए. जॉनसन उन्हें घूरते हुए चिल्लाते रहे. उनके भाषण को ‘बेवकूफी भरा और अपमानजनक’ बताया.कनाडा के प्रधानमंत्री पीयरसन उस समय 69 साल के थे. वह स्वभाव से शांत नेता थे. उन्होंने जॉनसन को किसी तरह शांत करने की कोशिश की. कहा कि वह केवल शांति स्थापित करने का सुझाव दे रहे थे, अमेरिका की आलोचना नहीं कर रहे थे.

कनाडा – अमेरिका में तनाव बढ़ गया
हालांकि, इस घटना के बाद कनाडा और अमेरिका के संबंधों में कुछ समय के लिए तनाव बढ़ गया. जॉनसन अपनी गुस्सैल और आक्रामक प्रवृत्ति के लिए बदनाम थे. वह “The Johnson Treatment” नाम की एक रणनीति अपनाते थे, जिसमें वे अपने विरोधियों को शारीरिक दबाव और धमकी देकर डराने की कोशिश करते थे. लंबे कद के जानसन अक्सर अपनी ऊंचाई (6 फीट 4 इंच) और विशाल शरीर का इस्तेमाल करते हुए दूसरों को डराते थे.

पीयरसन ने इसे विवाद नहीं बनाया
ये घटना बताती है कि जॉनसन सत्ता के नशे में कितने आक्रामक और असभ्य हो सकते थे. हालांकि पीयरसन ने इसे सार्वजनिक रूप से कभी विवाद नहीं बनाया, जिससे यह मामला बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा. यह अमेरिकी इतिहास की उन घटनाओं में एक है जहां एक राष्ट्रपति ने खुलेआम अपनी नाराजगी दिखाने में शिष्टाचार की सारी सीमाएं लांघ दीं!.

जॉनसन मंत्रियों और स्टाफ से अभद्रता से बोलते थे
जॉनसन अपने कर्मचारियों और मंत्रियों के साथ अभद्र भाषा बोलते थे. अक्सर “Goddamn,” “Bullshit,” और “Son of a Bitch” जैसी गालियों का इस्तेमाल करते थे. उन्होंने अपने स्टाफ से टॉयलेट में बैठकर भी बात करने की आदत बना रखी थी, जो बेहद असभ्य और असम्मानजनक माना जाता था.

अन्य अमेरिकी राष्ट्रपतियों का खराब व्यवहार
अन्य अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने भी अलग-अलग संदर्भों में अन्य राष्ट्रप्रमुखों के साथ अपमानजनक, असंवेदनशील, या धमकी भरा व्यवहार किया.

1. रिचर्ड निक्सन और भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (1971)
– निक्सन ने इंदिरा गांधी के प्रति अवमाननापूर्ण भाषा का इस्तेमाल किया. पाकिस्तान पर हमला नहीं करने के लिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की. उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर के साथ बातचीत में गांधी के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग भी रिकॉर्ड किया गया.
निक्सन ने भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इंदिरा गांधी को “Witch” (डायन)” और “Old Bitch” (बूढ़ी कुतिया) कहा. भारत को “गंदा देश” और “भिखारियों का देश” कहा. यह बातें उनकी गुप्त व्हाइट हाउस रिकॉर्डिंग्स (जो 2005 में सार्वजनिक हुईं) से सामने आईं.

2. जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल (2006)
एक बार बुश ने जी8 सम्मेलन के दौरान मर्केल के कंधों पर अचानक हाथ रख दिया, जिससे वह असहज हो गईं. यह हरकत उस समय कई लोगों को अजीब और गलत लगी.

3. बराक ओबामा और रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव (2012)
ओबामा ने मेदवेदेव से ऑफ-द-रिकॉर्ड बातचीत में कहा था कि “वह पुतिन के साथ अधिक लचीलापन दिखा सकते हैं” यदि वह फिर से चुने जाते हैं. यह बयान बाद में विवाद का कारण बना.

4. जॉन एफ. कैनेडी और सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव (1961)
विएना शिखर सम्मेलन के दौरान कैनेडी और ख्रुश्चेव के बीच तीखी बातचीत हुई. दोनों के बीच तू-तू-मैं-मैं वाली स्थिति आ गई. कैनेडी ने बाद में माना कि यह बैठक उनके लिए बहुत कठिन रही.
कैनेडी ने व्हाइट हाउस में एक सेक्स स्कैंडल को छिपाने के लिए गालियों और धमकियों का इस्तेमाल किया था. उनके बारे में कहा जाता है कि वे महिला कर्मचारियों से बेहद अभद्र भाषा में बात करते थे.

5. थियोडोर रूजवेल्ट (1901-1909)
रूजवेल्ट की विदेश नीति का मूल मंत्र था कि “धीरे से बोलो, लेकिन हाथ में डंडा रखो.” वह अपने भाषणों में गुस्सैल और हिंसात्मक भाषा का इस्तेमाल करते थे.

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PM Modi France Visit: मोदी को मिल गया पुतिन सा एक और यार, मैक्रों ने तो मन मोह लिया, देख लें सबूत

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PM Modi France Visit: पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की दोस्ती गहरी हो रही है. फ्रांस दौरे पर मोदी का भव्य स्वागत हुआ और दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की.

मोदी को मिल गया पुतिन सा एक और यार, मैक्रों ने तो मन मोह लिया, खुद देख लीजिए

फ्रांस में दिखी पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की गहरी दोस्ती की झलक

हाइलाइट्स

  • पीएम मोदी का फ्रांस दौरे पर भव्य स्वागत हुआ.
  • मैक्रों ने पीएम मोदी के साथ गहरी दोस्ती दिखाई.
  • दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की.

नई दिल्ली: भारत-रूस की दोस्ती दशकों पुरानी है. समय-समय पर इसकी झलक दिखती रही है. इससे दुनिया भी वाकिफ है. पीएम मोदी ने पुतिन संग मिलकर उस दोस्ती के रंग को और गाढ़ा किया है. पुतिन की तरह ही अब पीएम मोदी को एक नया दोस्त मिला है. नाम है इमैनुएल मैक्रों. इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के राष्ट्रपति हैं. जी हां, जैसे रूस और भारत की दोस्ती के चर्चे होते हैं. अब वह दिन दूर नहीं, जब भारत-फ्रांस की दोस्ती के भी गीत गुनगुनाए जाएंगे. इसकी झलक पीएम मोदी के फ्रांस दौरे पर खूब दिखी. यहां मैक्रों ने मोदी की आवभगत में कोई कमी नहीं होने दी. फ्रांस में जहां-जहां मोदी गए, वहां-वहां साए की तरह साथ रहे.

दरअसल, कोई देश हमें कितनी इज्जत दे रहा है, यह उसकी आगवानी और हॉस्पिटालिटी के तरीकों पर निर्भर करता है. पीएम मोदी जब पेरिस एआई समिट के लिए फ्रांस गए तो वहां नजारा रूस वाला दिखा. पीएम मोदी की रूस की तरह ही फ्रांस में भी ग्रैंड वेलकम हुआ. खुद राष्ट्रपति मैक्रों पीएम मोदी के साथ पुतिन की तरह नजर आए.

समय और सम्मान की बात
जी हां, प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा का एक अनूठा पहलू था, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से उन्हें दिया गया समय और सम्मान. यह दोनों नेताओं की बेहतर आपसी समझ और गहरी दोस्ती को दर्शाता है. इसकी झलक पल-पल दिखी. यात्रा के पहले दिन राष्ट्रपति मैक्रों ने पीएम मोदी को डिनर कराया. रात्रिभोज में दोनों नेताओं ने बातचीत की. अगले दिन ‘एआई एक्शन समिट’ में भी यह सौहार्दपूर्ण माहौल जारी रहा. भारत और फ्रांस ने संयुक्त रूप से शिखर सम्मेलन की मेजबानी की.

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हर जगह साए की तरह थे
अपने घनिष्ठ संबंधों को दर्शाते हुए दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस सीईओ फोरम की मेजबानी की, जो आर्थिक सहयोग के लिए उनके साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है. दोस्ती के एक असाधारण संकेत में, दोनों नेता एक संयुक्त काफिले में और एक ही विमान में मार्सिले पहुंचे. राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए मार्सिले में रात्रिभोज की मेजबानी की. हर जगह साए की तरह मैक्रों मोदी के साथ दिखे.

मैक्रों ने मन मोह लिया
पीएम मोदी के लिए यूं तो सभी विश्व नेताओं ने सम्मान और महत्व दिखाया लेकिन जो निकटता और अपनापन मैक्रों ने दर्शाया उसका अन्य उदाहरण मिलना दुर्लभ है. मैक्रों दरअसल पीएम मोदी के दौरे को लेकर खासे उत्साहित थे. प्रधानमंत्री मोदी के पेरिस पहुंचने से पहले एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि वह और प्रधानमंत्री मोदी ‘तकनीकी संप्रभुता’ के लिए प्रयास करेंगे.

मैक्रों ने पीएम की तारीफ में क्या-क्या कहा?
फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी की तरह हमारा भी दृढ़ विश्वास है कि भारत और फ्रांस दो महान शक्तियां हैं और हमारे बीच विशेष संबंध हैं. हम अमेरिका का सम्मान करते हैं और उसके साथ काम करना चाहते हैं, हम चीन के साथ भी काम करना चाहते हैं, लेकिन किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं. मैक्रों ने कहा, ‘भारत और फ्रांस अग्रणी हैं लेकिन अमेरिका और चीन हमसे बहुत आगे हैं. हम एआई पर एक साथ काम करना चाहते हैं. पीएम मोदी भी नई टेक्नोलॉजी का फायदा उठाना चाहते हैं. लेकिन वह चाहते हैं कि यह भारत में भी हो.

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Tulsi Gabbard Interview; Bhagwat Geeta | Raisina Dialogue | तुलसी गबार्ड बोलीं-कृष्ण के उपदेश शक्ति और शांति देते हैं: अच्छे-बुरे पल में भगवत गीता पढ़ती हूं; भगवान के साथ रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र

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नई दिल्ली11 मिनट पहले

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तुलसी गबार्ड रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत आई हैं। - Dainik Bhaskar

तुलसी गबार्ड रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत आई हैं।

अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने कहा कि वे कृष्ण भक्त हैं और अपनी जिंदगी के हर अच्छे-बुरे वक्त में वे भगवद गीता में दिए उपदेशों को पढ़ती हैं। अर्जुन को दिए कृष्ण के उपदेश उन्हें दिन भर शक्ति, शांति और आराम देते हैं।

तुलसी रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत आई हैं। उससे पहले उन्होंने ANI को दिए इंटरव्यू में ये बातें कहीं…

अध्यात्म, गीता और भारत पर तुलसी की 3 मुख्य बातें…

भगवान के साथ मेरा रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र: तुलसी ने कहा कि मेरी आध्यात्मिक यात्रा और भगवान के साथ मेरा रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र है। मैं रोज यही कोशिश करती हूं कि ऐसी जिंदगी जी सकूं जो भगवान के हिसाब से बेहतर हो। और भगवान के सभी बच्चों की सेवा कर पाने से बेहतर तरीका क्या हो सकता है।

भगवत गीता के उपदेशों से मूल्यवान सीख मिलती है: मेरी जिंदगी के अलग-अलग समय में, चाहे मैं वॉर जोन रहूं या आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, हर समय में कृष्ण के उपदेश से मुझे हर बार कोई मूल्यवान सीख मिलती है। इससे मुझे सब तरह के दिनों में शांति, शक्ति और सुकून मिलता है।

भारत आकर लगता है जैसे घर आ गई हूं: तुलसी ने कहा कि भारत से मुझे बहुत प्यार है। मैं जब भी यहां आती हूं तो लगता है कि अपने ही घर आई हूं। यहां के लोग बहुत दयालु हैं और प्यार से स्वागत करते हैं। यहां का खाना हमेशा स्वादिष्ट लगता है। दाल मखनी और ताजा पनीर से बनाई गई हर चीज बहुत लजीज होती है।

तुलसी ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमलों को इस्लामी आतंक कहा

भारत में लगातार हो रहे पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमलों को तुलसी ने इस्लामी आतंक बताया। उन्होंने कहा कि ये भारत और अमेरिका समेत कई मिडिल ईस्ट देशों पर भी खतरा बनता जा रहा है।

तुलसी ने कहा, ‘राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस्लामी आतंक से लड़ने के अपने वादे को लेकर बहुत साफ हैं। इस आतंक ने हमें घेर लिया है और लगातार अमेरिकी लोगों पर खतरा बना हुआ है। ये भारत, बांग्लादेश में लोगों को प्रभावित करता रहा है और मौजूदा समय में सीरिया, इजराइल और मिडिल ईस्ट के कई देशों में लोगों पर असर डाल रहा है। मुझे पता है पीएम मोदी इस खतरे को बहुत गंभीरता से लेते हैं। दोनों नेता इस खतरे को पहचानने और इसे हराने के लिए मिलकर काम करेंगे।’

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‘मैंने कई इजरायलियों को मार दिया’, नर्स के दावे के बाद ऑस्ट्रेलिया के अस्पतालों में मची खलबली – australia hospital examines patient records after nurse claims to have killed israelis antisemitic attacks

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Australia News: ऑस्‍ट्रेलिया में एक नर्स का वीडियो वायरल हुआ है, जिसके बाद देश के साथ ही पूरी दुनिया में खलबली मची हुई है. आरोपी नर्स इस वीडियो में इजरायल के नागरिकों की हत्‍या करने का दावा कर रही है.

'मैंने कई इजरायलियों को मार दिया', नर्स के दावे के बाद ऑस्ट्रेलिया में खलबली

ऑस्‍ट्रेलिया में एक नर्स ने इजरायली मरीजों की हत्‍या करने का दावा कर सनसनी मचा दी है. ऑस्‍ट्रेलिया में इजरायल विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं. (फोटो: AP)

हाइलाइट्स

  • ऑस्‍ट्रेलिया में नर्स ने इजरायली मरीजों की हत्‍या करने का दावा किया है
  • नर्स के दावों की जांच शुरू कर दी गई है, मरीजों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
  • इजरायल-हमास युद्ध के बाद यहूदी विरोधी भावनाओं में आया है उभार

मेलबर्न (ऑस्‍ट्रलिया). ऑस्‍ट्रेलिया में बड़ी तादाद में अन्‍य देशों के लोग रहते हैं. इसे विभिन्‍न संस्‍कृतियों का संगम स्‍थल भी कहा जाता है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिससे इस भावना को चोट पहुंची है. इजरायल-हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद ऑस्‍ट्रेलिया में यहूदी विरोधी भावनाएं काफी बढ़ी हैं. अब न्‍यू साउथ वेल्‍स स्‍टेट में फिर से ऐसा ही मामला समाने आया है. एक अस्‍पताल में तैनात नर्स ने दावा किया है कि उसने इजरायली नागरिकों की हत्‍या की है. नर्स के दावे से देशभर में सनसनी फैल गई है. न्‍यू साउथ वेल्‍स के हेल्‍थ डिपार्टमेंट ने नर्स के दावे की जांच करने की बात कही है. साथ ही संबंधित हॉस्पिटल में मरीजों का रिकॉर्ड भी चेक किया जाएगा.

ऑस्‍ट्रेलिया अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि एक नर्स द्वारा इजरायलियों को मारने का ऑनलाइन दावा किए जाने के बाद अस्‍पताल मरीजों के रिकॉर्ड की जांच कर रहा है. हालांकि, अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि मरीजों को नुकसान पहुंचाने का कोई सबूत सामने नहीं आया है. नर्स का यह दावा यहूदी विरोधी हमलों और बयानबाजी में सबसे नया है, जिसने ऑस्ट्रेलिया को हिलाकर रख दिया है. बता दें कि पिछले एक साल से कुछ ज्‍यादा समय से ऑस्‍ट्रेलिया में यहूदी विरोधी भावनाओं में वृद्धि हुई है. समुदाय से जुड़े लोगों के घरों, कार्यालयों और व्‍यावसायिक प्रतिष्‍ठानों में तोड़फोड़ की गई है. यहूदियों को निशाना बनाने वाले अपराधों के साथ एक स्कूल और दो सिनेगॉग (यहूदी धर्मस्‍थल) को आग के हवाले तक कर दिया गया है.

आरोपी नर्स सस्‍पेंड
सिडनी के बैंकस्टाउन अस्पताल में मंगलवार को रात की पाली के दौरान इजरायली इन्फ्लुएंसर मैक्स वीफ़र के साथ ऑनलाइन चर्चा में भाग लेने वाली दो नर्सों को बुधवार को सस्‍पेंड कर दिया गया. हेल्‍थ मिनिस्‍टर पार्क ने कहा कि वे फिर कभी स्‍टेट हेल्‍थ डिपार्टमेंट के लिए काम नहीं करेंगी. पार्क ने इन नर्सो पर टिप्‍पणी करते हुए उन्‍हें नीच, घृणित और विक्षिप्त बताया है. ऑस्ट्रेलिया में एक यहूदी संगठन के अधिकारी एलेक्स रिव्चिन ने जोर देकर कहा कि सिडनी के यहूदी समुदाय के प्रति ऑस्ट्रेलिया के मेडिकल प्रैक्टिशनर के बीच नफरत और अतिवाद बढ़ रहा है.

पुलिस स्‍ट्राइक फोर्स
न्यू साउथ वेल्स स्‍टेट के स्वास्थ्य मंत्री रयान पार्क ने बताया कि साल 2023 में इजराइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से सिडनी में यहूदी विरोधी अपराधों पर खास तौर से निपटने के लिए पुलिस स्‍ट्राइक फोर्स का गठन किया गया है. यह टीम हेट स्‍पीच कानून का उल्‍लंघन सहित ऑनलाइन वीडियो के चलते हुए अपराधों की जांच करती है. बता दें कि सिडनी और मेलबर्न में 85 फीसद यहूदी रहते हैं.

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