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अमेरिका ने काबुल एयरपोर्ट हमले के मास्टरमाइंड शरीफुल्लाह को पकड़ा

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US News: अमेरिका ने 2021 काबुल एयरपोर्ट बम विस्फोट के जिम्मेदार आतंकी शरीफुल्लाह उर्फ जफर को पकड़ा है. पाकिस्तान की मदद से अफगानिस्तान में सीक्रेट ऑपरेशन कर उसे गिरफ्तार किया गया.

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अमेरिका ने काबुल एयरपोर्ट हमले के मास्टरमाइंड शरीफुल्लाह को पकड़ा. अब्दुल रहमान अल लोगारी ने आत्मघाती हमला किया था.

हाइलाइट्स

  • काबुल एयरपोर्ट बम विस्फोट का मास्टरमाइंड शरीफुल्लाह गिरफ्तार.
  • पाकिस्तान की मदद से अफगानिस्तान में सीक्रेट ऑपरेशन कर उसे पकड़ा गया.
  • शरीफुल्लाह ने 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत में मुख्य भूमिका निभाई थी.

US News: अमेरिका को उसका वह दुश्मन मिल गया है, जिसे वह चार साल से ढूंढ रहा था. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि काबुल एयर पोर्ट के बाहर 2021 में हुए एक घातक आत्मघाती बम विस्फोट के मास्टरमाइंड को पकड़ लिया गया है. अब उसे अमेरिका लाया जा रहा है. इस्लामिक स्टेट के उस आतंकवादी को पकड़ने में पाकिस्तान ने मदद की है. जी हां, अमेरिकी खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने अफगानिस्तान में एक सीक्रेट ऑपरेशन किया. इस दौरान आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के उस आतंकी को अरेस्ट कर लिया, जिसने 2021 में अमेरिका को खून के आंसू रुलाए थे. उसके साथ अमेरिका ने दो और आतंकियों को हिरासत में लिया है. ट्रंप ने कांग्रेस को अब तक एक आतंकी के प्रत्यर्पण की जानकारी दी है. जिस आतंकी को अमेरिका प्रत्यर्पित कर ला रहा है, उसकी पहचान शरीफुल्लाह उर्फ जफर के तौर पर की गई है.

शरीफुल्लाह उर्फ जफर ने 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत में मुख्य भूमिका निभाई थी. उसे अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दो हफ्ते पहले ही जेल से रिहा किया था. जेल में ही काबुल एयरपोर्ट विस्फोट में शामिल आत्मघाती हमलावर समेत कई आकाओं से उसकी दोस्ती हुई थी. जेल से बाहर आते ही उसने अमेरिकी सैनिक दस्तों की निगरानी शुरू कर दी थी. शरीफुल्ला उर्फ जफर साल 2016 में आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की एक शाखा खुरासन में भर्ती हुआ था.

शरीफुल्लाह का एक और नाम जफर भी है. अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और तत्कालीन अफगान सरकार ने उसे आतंकवादक आरोप में साल 2019 में पकड़कर अफगानिस्तान की जेल में बंद कर दिया था. जेल में रहने के दौरान ही उसकी मुलाकात आतंक के अनेक आकाओं से हुई थी, जो इस्लामिक स्टेट समेत अन्य आतंकी दस्तों में शामिल थे. इनमें वह आत्मघाती हमलावर भी शामिल था, जिसने काबुल एयरपोर्ट पर हमला किया था.

कैसे शरीफुल्लाह ने अमेरिका को रुलाया
साल 2021 में जब अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से वापस लौट रही थी, उसके दो सप्ताह पहले ही तालिबान ने आतंकवाद के अनेक आकाओं को जेल से रिहा कर दिया था. उनमें शरीफुल्लाह भी शामिल था. शरीफुल्लाह जैसे ही जेल से बाहर आया, तुरंत उससे आतंकी संगठन के लोगों ने संपर्क किया. उसे काम पर लग जाने के लिए कहा. उसे अमेरिकन सैनिक दस्तों की निगरानी का काम सौंपा गया था. शरीफुल्लाह उसके आतंकी आकाओं ने कहा था कि वह एक आत्मघाती हमलावर के लिए हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक ऐसा स्थान ढूंढे, जहां से अगर वह प्रवेश करे तो किसी को बहुत ज्यादा शक ना हो.

शरीफुल्लाह इलाके का जानकार था
इसके बाद शरीफुल्लाह काम पर लग गया. शरीफुल्लाह उस इलाके का गहन जानकार था. उसने काफी खोजबीन के बाद एक ऐसा रास्ता खोज निकाला, जहां से अंदर जाने पर आत्मघाती हमलावर के ऊपर सुरक्षा बलों को शक ना हो. इसके लिए उसने बाकायदा वहां मौजूद सुरक्षा बलों की चौकियों और अमेरिकी सेना के दस्तों का भी विशेष रूप से आकलन किया. उसके बाद उसने वह रास्ता अपने आतंकवादी आकाओं को बता दिया. उसके बाद उसे तत्काल उस इलाके से दूर जाने के लिए कहा गया.

शरीफुल्लाह की वजह से ही आतंकी हमला हुआ
दिलचस्प तथ्य यह भी है कि शरीफुल्लाह ने जो रास्ता खोजा था, वह आतंकियों के लिए काम कर गया. वास्तव में शरीफुल्लाह के बताए रास्ते पर जब आत्मघाती हमलावर काली जैकेट पहन कर आगे गया तो उस पर अमेरिकी सेना के लोगों को ज्यादा शक नहीं हुआ.अमेरिका खुफिया विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि शक ना होने के कारण वहां मौजूद सैन्य अधिकारियों ने अपने स्नाइपर को उसे जगह से दूर रहने को कहा था. इसी के चलते आत्मघाती हमलावर अब्दुल रहमान अल लोगारी वहां तक पहुंच गया और उसने जोरदार धमाका किया. इसमें 13 अमेरिकी सैनिकों समेत अनेकों अफगान नागरिकों की मौत हो गई.

क्या है शरीफुल्लाह की क्राइम कुंडली
अब तक की जांच के दौरान पता चला है कि शरीफुल्लाह इसके पहले भी अनेक आतंकी गतिविधियों और अपराधों में शामिल था. उसने साल 2016 में काबुल में अमेरिकी दूतावास पर हमले के लिए निगरानी की थी. इस निगरानी के दौरान उसने सटीक जानकारी दी थी कि किस समय सुरक्षाकर्मियों का दस्ता बदलता है. इसके साथ ही उसने एक हमलावर को वहां तक पहुंचाने का काम भी किया था. इसके अलावा उसने नाइट क्लब समेत सरकारी संस्थानों पर हमला करने वाले आतंकवादियों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी थी. इसमें मास्को नाइट क्लब हमला भी शामिल है. फिलहाल अमेरिका ने जिन लोगों को हिरासत में लिया है, उनसे पूछताछ के बाद आतंक के और कई बड़े राज पर्दाफाश हो सकते हैं.

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