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Canada will send Gujarat’s daughter to space | गुजरात की बेटी को अंतरिक्ष में भेजेगा कनाडा: शॉना पंड्या बोलीं- नवरात्रि-दिवाली मेरे पसंदीदा त्योहार, जलेबी मुझे पसंद है, कनाडा में बहुत भेदभाव सहा – Gujarat News
डॉ शाना पंड्या के पिता गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के कोडिनार के मूल निवासी हैं।
‘भले ही मैं कनाडा में रहती हूं, लेकिन मेरा पालन-पोषण बहुत साधारण तरीके से हुआ है। मैंने अपने पिता को घर पर प्रतिदिन 15 घंटे काम करते देखा है। मां ने भी बहुत मेहनत की है। कनाडा में भी घर पर पूरा दिन गुज्जू का माहौल रहता है।
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हर दिन पूजा-पाठ करती हूं, मंदिर जाती हूं, सभी भारतीय त्योहार मनाती हूं। अब, इससे पहले कि मैं अंतरिक्ष में जाऊं, मैं चाहती हूं कि सुनीता विलियम्स दीदी सुरक्षित धरती पर लौट आएं ताकि हम एक-दूसरे से मिल सकें। आखिर हम दोनों ही पंड्या बेटियां हैं…’
ये शब्द हैं डॉ. शॉना पंड्या के जो कनाडा की पहली कमर्शियल महिला अंतरिक्ष यात्री हैं। शॉना पेशे से डॉक्टर (एम.डी., फिजीशियन) हैं और 2026 के अंत में अंतरिक्ष में उड़ान भरने जा रही हैं। वे सुनीता विलियम्स के बाद दूसरी गुजराती होंगी जो अंतरिक्ष में जाने वाली हैं। उनके पिता मूल रूप से गुजरात के कोडिनार के रहने वाले हैं।
हमने उनसे बातचीत की…
कोडिनार से मुंबई होते हुए कनाडा पहुंचा परिवार
डॉ. शॉना ने गुजराती -अंग्रेजी लहजे में बातचीत शुरू की। उन्होंंने कहा में कनाडा में पैदा हुई, लेकिन मेरे पिता मूल रूप से गुजरात में गिर सोमनाथ जिले के कोडिनार से हैं और मेरी मां मुंबई से हैं। पिताजी ने मुंबई से ग्रेजुएशन किया। उसके बाद कोडिनार में फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में काम किया, लेकिन कुछ समय बाद वे नौकरी के लिए मुंबई चले गए। तभी उनकी मुलाकात मेरी मां से हुई और दोनों की शादी हो गई।
शादी के कुछ समय बाद ही मां को कनाडा में ऑफिस मैनेजर की नौकरी मिल गई, इसलिए वे दोनों कनाडा चले गए। पिताजी कनाडा आये और अपना फिजियोथेरेपी क्लिनिक शुरू किया। शुरुआत में वे जब कनाडा गए तो काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में पिताजी सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक 15 घंटे काम करते थे। इसलिए मुझे बचपन से ही कड़ी मेहनत करना सिखाया गया है।
मेरे माता-पिता दोनों ही कट्टर गुजराती हैं, इसलिए घर में हमेशा गुजराती माहौल रहा। हम अब भी हर पांच साल में मुंबई घूमने आते हैं। इसके अलावा, हम शादी जैसे किसी समारोह में शामिल होने के लिए भी गुजरात जाते हैं।

यह मेरा सपना
अंतरिक्ष यात्री बनने के बारे में शॉना कहती हैं, ‘मेरा बचपन से ही एक सपना था। जब मैं छोटी था तब भी मैं अंतरिक्ष यात्रियों की जीवनियां और किताबें पढ़ा करती थी। उस समय, कनाडा की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री रॉबर्टा बोंडार अंतरिक्ष में गयीं। मैं उनसे बहुत प्रेरित हुई। मैंने भी फैसला लिया कि मैं भी बोंडार की तरह मेडिसिन की पढ़ाई करूंगी न्यूरोसाइंटिस्ट बनूंगी, और फिर अंतरिक्ष यात्री बनूंगी।
कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोनॉटिकल साइंसेज से मास्टर डिग्री हासिल की। मास्टर्स के बाद मैंने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी में 3 महीने की इंटर्नशिप की। तभी मैंने फैसला लिया कि अब मैं केवल अंतरिक्ष चिकित्सा पर ही काम करूंगी।
‘एक महिला होने के नाते मुझे बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा’
हमने सुना है कि कनाडा में बहुत अधिक नस्लवाद है, तो क्या आपको कभी नस्लवाद का सामना करना पड़ा है? शॉना कहती हैं, ‘मैं कनाडा में न केवल नस्लवाद, बल्कि सेक्सिज्म (महिलाओं के प्रति अन्याय) का भी शिकार रही हूं।’ एक महिला के लिए इस क्षेत्र में इतना आगे बढ़ना बहुत कठिन है। आज भी मैं किसी से कहती हूं, ‘नमस्ते, मैं डॉ. पंड्या तो लोग मुझे आश्चर्य से देखते हैं। हम 2025 में हैं और फिर भी लोग अभी भी यह विश्वास नहीं करते कि एक महिला डॉक्टर बन सकती है।
इन सबके बीच, मैं 2026 से पहले ‘वर्जिन गैलेक्टिक’ के साथ अंतरिक्ष में जाऊंगी। मैं पांच अंतरिक्ष यात्रियों की टीम में एकमात्र महिला हूं। इसलिए यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है।’

जब शॉनाबेन अंतरिक्ष में जाएंगी तो क्या करेंगी?
आप जिस प्रोजेक्ट पर काम करने जा रही हैं उसका मुख्य उद्देश्य क्या है? इसके बारे में बात करते हुए शॉना कहती हैं, ‘हम 2026 के अंत तक IIAS (इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉटिकल साइंसेज) के साथ वर्जिन गैलेक्टिक के कमर्शियल स्पेसशिप ‘डेल्टा-क्लास’ में अंतरिक्ष जाएंगे। हम तीन अंतरिक्ष शोधकर्ता इस प्रोजेक्टपर काम कर रहे हैं।
इस अंतरिक्ष यान में 2 पायलट और 6 शोधकर्ता जा सकते हैं। मुझे IIAS02 मिशन के लिए चुना गया है। मुझे वहां क्रू( चालक दल) की महिलाओं के स्वास्थ्य पर शोध करना है। हम उनके तंत्रिका विज्ञान और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी से संबंधित प्रयोग करेंगे। इससे भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों को स्वास्थ्य लाभ हो सकता है।
एक शोध अंतरिक्ष यात्री के रूप में आपका दिन कैसा होता है?
शॉना कहती हैं, ‘मैं सारा दिन अंतरिक्ष चिकित्सा पर ध्यान केंद्रित करती हूं। लेकिन मेरे दो दिन एक जैसे नहीं होते। एक दिन आपको लैब में रिसर्च करना है, अगले दिन आपको अंतरिक्ष चिकित्सा पर काम करना है, अगले दिन आपको एक अंतरिक्ष यात्री के रूप में उड़ान के संचालन की जांच करनी है, और अगले दिन आपको एक चिकित्सक के रूप में रोगियों को देखना है। क्योंकि मैं एक डॉक्टर भी हूं। बहुत व्यस्त हूं लेकिन मुझे यह सब पसंद है।
इन सभी अन्य उपलब्धियों के साथ-साथ, मैं वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान संस्थान के अंतरिक्ष चिकित्सा समूह के निदेशक के रूप में कार्यरत हूं। जहां हमारा अंतरिक्ष चिकित्सा अनुसंधान चल रहा है। इसके साथ ही हम पहली बार अंतरिक्ष में मनुष्यों पर दवा का प्रयोग करने जा रहे हैं। इसके अलावा, मैं नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट कनाडा के साथ भी काम कर रही हूं।

मौजूदा दौर में अंतरिक्ष पर्यटन लोकप्रिय हो जाएगा?
आप व्यावसायिक तौर पर भी लोगों को अंतरिक्ष की सैर कराने जा रहे हैं, तो क्या आपको लगता है कि मौजूदा दौर में अंतरिक्ष पर्यटन लोकप्रिय हो जाएगा? शॉना कहती हैं, “लोग अब किसी न किसी तरह से अंतरिक्ष में जा रहे हैं, क्योंकि वाणिज्यिक कंपनियां वहां जा सकती हैं।”
कुछ लोग अंतरिक्ष के शून्य गुरुत्वाकर्षण का अनुभव करने और पृथ्वी को बाहर से देखने के लिए पर्यटक के रूप में जाना चाहते हैं, कुछ प्रतियोगिता के लिए जाना चाहते हैं, और कुछ रिसर्च के लिए। हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि निकट भविष्य में अंतरिक्ष पर्यटन बहुत आसान हो जाएगा।
90 मिनट की यात्री होगी
शॉना ने बताया कि उनके अंतरिक्ष यान को अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको के एक स्पेसपोर्ट से लॉन्च किया जाएगा और यह 80 से 88 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाएगा। नासा ने उस रेखा को अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच की सीमा के रूप में परिभाषित किया है। पृथ्वी से उड़ान भरने से लेकर पृथ्वी पर वापस उतरने तक की पूरी यात्रा में 90 मिनट का समय लगेगा।
जिसमें हम कुछ मिनटों के लिए शून्य गुरुत्वाकर्षण और निर्वात का भी अनुभव करेंगे, जहां शोध के लिए आए लोग अपना काम करेंगे और पर्यटन के लिए आए लोगों को वहां से पृथ्वी का सुंदर दृश्य भी देखने को मिलेगा।

डॉ शीना गेलेक्टिक स्पेसशिप में अंतरिक्ष जाएंगी। इसमें 2 क्रू मेंबर्स और 4 रिसर्चर जा सकते हैं।
मैं भी इसरो के साथ काम करना चाहूंगी
क्या आप इसरो की गगनयान और चंद्रयान परियोजनाओं से अवगत हैं? शॉना कहती हैं, ‘दोनों परियोजनाएं बहुत रोमांचक हैं। जब मैं इसरो के प्रोजेक्ट्स को देखती हूं तो एक भारतीय होने के नाते मुझे अंदर से बहुत खुशी होती है। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि अब भारत भी अंतरिक्ष में मनुष्य भेजेगा। मैं इंतजार कर रही हूं कि कैप्टन शुभांशु शुक्ला गगनयान में कब उड़ान भरेंगे। अगर मुझे मौका मिला तो मैं भविष्य में इसरो के साथ काम करना चाहूंगी।’
क्या आपमें कोई गुजराती या भारतीय भावना है जिसने आपको यहां तक पहुंचने में मदद मिली?
शॉना कहती हैं, ‘हां, बिल्कुल, मुझमें एक भारतीय की तरह कड़ी मेहनत करने का माद्दा है, लेकिन इन सबके साथ ही, मैं अपने परिवार से बहुत ज्यादा जुड़ी हुई हूं। चाहे मेरी उम्र कितनी भी हो जाए, मैं अपने परिवार का सहयोग करना कभी बंद नहीं करूंगी। जो केवल हम भारतीयों में ही देखने को मिलता है।
मेरा लालन-पालन गुजराती रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ है, इसलिए मैं पूजा-पाठ, मंदिर जाना और नवरात्रि मनाना समेत सभी काम करती हूं। दिवाली, होली और नवरात्रि मेरे पसंदीदा त्योहार हैं। खाने में जलेबी बहुत पसंद है।

अमेरिका-कनाडा जाने का पागलपन बंद करो।
आपको पता ही होगा कि कनाडा और अमेरिका जाने के लिए भारतीय किसी भी हद तक जा सकते हैं और हाल ही में अमेरिका ने ऐसे कई घुसपैठियों को वापस भी खदेड़ा है। आप उनके बारे में क्या कहना चाहेंगे? क्या वहां जाना सचमुच आपके जीवन में चेंज लाता है? शॉना कहती हैं, ‘यह कुछ भी नहीं है, अगर आपके पास काम करने का जुनून है, तो आप कहीं भी सफल होंगे, चाहे आप भारत में रहें या किसी अन्य देश में।’ जहां हो वहीं रहो और अपने काम पर ध्यान दो।’
अमेरिका-कनाडा जाने का पागलपन बंद होना चाहिए।
अंतरिक्ष में चिकित्सा अनुसंधान का उद्देश्य क्या है?
यदि आप चिकित्सा क्षेत्र से हैं, तो आप उस क्षेत्र में कैसे उपयोगी हो सकते हैं? डॉ.शॉना कहती हैं, ‘जब हम अंतरिक्ष में जाते हैं तो सबसे बड़ा परिवर्तन हमारे शरीर में होता है। कई बीमारियां भी हो जाती हैं। मनुष्यों को इन सब से सुरक्षित रखने के लिए हमें अंतरिक्ष में दवा की जरूरत है। इसके अलावा, अंतरिक्ष में जीवित रहने तथा हाई रेडिएशन और अन्य चीजों से बचने के लिए बहुत अधिक इलाज की जरूरत होती है।
दुनिया में केवल 12-15% महिला अंतरिक्ष यात्री
डॉ. शॉना कहती हैं, ‘मैं अभी कनाडा की पहली व्यावसायिक महिला अंतरिक्ष यात्री के बजाय एक गुजराती महिला अंतरिक्ष यात्री के रूप में पहचानी जाना पसंद करूंगी। मैं विशेष रूप से लड़कियों से कहना चाहूंकि यदि आप किसी चीज में प्रथम हैं तो कभी भी डरें नहीं। आएं शुरू करें। विश्व में केवल 12-15% अंतरिक्ष यात्री महिलाएं हैं। लेकिन मैंने ऐसा किया और अब आप देख सकते हैं कि मैं कहां हूं। चाहे आप किसी भी क्षेत्र में हों, आप अंतरिक्ष में जा सकते हैं। हमें अभी भी कई महिलाओं को अंतरिक्ष में ले जाना है।
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PM Modi France Visit: मोदी को मिल गया पुतिन सा एक और यार, मैक्रों ने तो मन मोह लिया, देख लें सबूत
Last Updated:
PM Modi France Visit: पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की दोस्ती गहरी हो रही है. फ्रांस दौरे पर मोदी का भव्य स्वागत हुआ और दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की.
फ्रांस में दिखी पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की गहरी दोस्ती की झलक
हाइलाइट्स
- पीएम मोदी का फ्रांस दौरे पर भव्य स्वागत हुआ.
- मैक्रों ने पीएम मोदी के साथ गहरी दोस्ती दिखाई.
- दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की.
नई दिल्ली: भारत-रूस की दोस्ती दशकों पुरानी है. समय-समय पर इसकी झलक दिखती रही है. इससे दुनिया भी वाकिफ है. पीएम मोदी ने पुतिन संग मिलकर उस दोस्ती के रंग को और गाढ़ा किया है. पुतिन की तरह ही अब पीएम मोदी को एक नया दोस्त मिला है. नाम है इमैनुएल मैक्रों. इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के राष्ट्रपति हैं. जी हां, जैसे रूस और भारत की दोस्ती के चर्चे होते हैं. अब वह दिन दूर नहीं, जब भारत-फ्रांस की दोस्ती के भी गीत गुनगुनाए जाएंगे. इसकी झलक पीएम मोदी के फ्रांस दौरे पर खूब दिखी. यहां मैक्रों ने मोदी की आवभगत में कोई कमी नहीं होने दी. फ्रांस में जहां-जहां मोदी गए, वहां-वहां साए की तरह साथ रहे.
दरअसल, कोई देश हमें कितनी इज्जत दे रहा है, यह उसकी आगवानी और हॉस्पिटालिटी के तरीकों पर निर्भर करता है. पीएम मोदी जब पेरिस एआई समिट के लिए फ्रांस गए तो वहां नजारा रूस वाला दिखा. पीएम मोदी की रूस की तरह ही फ्रांस में भी ग्रैंड वेलकम हुआ. खुद राष्ट्रपति मैक्रों पीएम मोदी के साथ पुतिन की तरह नजर आए.
समय और सम्मान की बात
जी हां, प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा का एक अनूठा पहलू था, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से उन्हें दिया गया समय और सम्मान. यह दोनों नेताओं की बेहतर आपसी समझ और गहरी दोस्ती को दर्शाता है. इसकी झलक पल-पल दिखी. यात्रा के पहले दिन राष्ट्रपति मैक्रों ने पीएम मोदी को डिनर कराया. रात्रिभोज में दोनों नेताओं ने बातचीत की. अगले दिन ‘एआई एक्शन समिट’ में भी यह सौहार्दपूर्ण माहौल जारी रहा. भारत और फ्रांस ने संयुक्त रूप से शिखर सम्मेलन की मेजबानी की.
हर जगह साए की तरह थे
अपने घनिष्ठ संबंधों को दर्शाते हुए दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस सीईओ फोरम की मेजबानी की, जो आर्थिक सहयोग के लिए उनके साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है. दोस्ती के एक असाधारण संकेत में, दोनों नेता एक संयुक्त काफिले में और एक ही विमान में मार्सिले पहुंचे. राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए मार्सिले में रात्रिभोज की मेजबानी की. हर जगह साए की तरह मैक्रों मोदी के साथ दिखे.
मैक्रों ने मन मोह लिया
पीएम मोदी के लिए यूं तो सभी विश्व नेताओं ने सम्मान और महत्व दिखाया लेकिन जो निकटता और अपनापन मैक्रों ने दर्शाया उसका अन्य उदाहरण मिलना दुर्लभ है. मैक्रों दरअसल पीएम मोदी के दौरे को लेकर खासे उत्साहित थे. प्रधानमंत्री मोदी के पेरिस पहुंचने से पहले एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि वह और प्रधानमंत्री मोदी ‘तकनीकी संप्रभुता’ के लिए प्रयास करेंगे.
मैक्रों ने पीएम की तारीफ में क्या-क्या कहा?
फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी की तरह हमारा भी दृढ़ विश्वास है कि भारत और फ्रांस दो महान शक्तियां हैं और हमारे बीच विशेष संबंध हैं. हम अमेरिका का सम्मान करते हैं और उसके साथ काम करना चाहते हैं, हम चीन के साथ भी काम करना चाहते हैं, लेकिन किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं. मैक्रों ने कहा, ‘भारत और फ्रांस अग्रणी हैं लेकिन अमेरिका और चीन हमसे बहुत आगे हैं. हम एआई पर एक साथ काम करना चाहते हैं. पीएम मोदी भी नई टेक्नोलॉजी का फायदा उठाना चाहते हैं. लेकिन वह चाहते हैं कि यह भारत में भी हो.
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February 12, 2025, 15:17 IST
मोदी को मिल गया पुतिन सा एक और यार, मैक्रों ने तो मन मोह लिया, खुद देख लीजिए
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Tulsi Gabbard Interview; Bhagwat Geeta | Raisina Dialogue | तुलसी गबार्ड बोलीं-कृष्ण के उपदेश शक्ति और शांति देते हैं: अच्छे-बुरे पल में भगवत गीता पढ़ती हूं; भगवान के साथ रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र
नई दिल्ली11 मिनट पहले
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तुलसी गबार्ड रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत आई हैं।
अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने कहा कि वे कृष्ण भक्त हैं और अपनी जिंदगी के हर अच्छे-बुरे वक्त में वे भगवद गीता में दिए उपदेशों को पढ़ती हैं। अर्जुन को दिए कृष्ण के उपदेश उन्हें दिन भर शक्ति, शांति और आराम देते हैं।
तुलसी रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत आई हैं। उससे पहले उन्होंने ANI को दिए इंटरव्यू में ये बातें कहीं…
अध्यात्म, गीता और भारत पर तुलसी की 3 मुख्य बातें…
भगवान के साथ मेरा रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र: तुलसी ने कहा कि मेरी आध्यात्मिक यात्रा और भगवान के साथ मेरा रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र है। मैं रोज यही कोशिश करती हूं कि ऐसी जिंदगी जी सकूं जो भगवान के हिसाब से बेहतर हो। और भगवान के सभी बच्चों की सेवा कर पाने से बेहतर तरीका क्या हो सकता है।
भगवत गीता के उपदेशों से मूल्यवान सीख मिलती है: मेरी जिंदगी के अलग-अलग समय में, चाहे मैं वॉर जोन रहूं या आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, हर समय में कृष्ण के उपदेश से मुझे हर बार कोई मूल्यवान सीख मिलती है। इससे मुझे सब तरह के दिनों में शांति, शक्ति और सुकून मिलता है।
भारत आकर लगता है जैसे घर आ गई हूं: तुलसी ने कहा कि भारत से मुझे बहुत प्यार है। मैं जब भी यहां आती हूं तो लगता है कि अपने ही घर आई हूं। यहां के लोग बहुत दयालु हैं और प्यार से स्वागत करते हैं। यहां का खाना हमेशा स्वादिष्ट लगता है। दाल मखनी और ताजा पनीर से बनाई गई हर चीज बहुत लजीज होती है।
तुलसी ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमलों को इस्लामी आतंक कहा
भारत में लगातार हो रहे पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमलों को तुलसी ने इस्लामी आतंक बताया। उन्होंने कहा कि ये भारत और अमेरिका समेत कई मिडिल ईस्ट देशों पर भी खतरा बनता जा रहा है।
तुलसी ने कहा, ‘राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस्लामी आतंक से लड़ने के अपने वादे को लेकर बहुत साफ हैं। इस आतंक ने हमें घेर लिया है और लगातार अमेरिकी लोगों पर खतरा बना हुआ है। ये भारत, बांग्लादेश में लोगों को प्रभावित करता रहा है और मौजूदा समय में सीरिया, इजराइल और मिडिल ईस्ट के कई देशों में लोगों पर असर डाल रहा है। मुझे पता है पीएम मोदी इस खतरे को बहुत गंभीरता से लेते हैं। दोनों नेता इस खतरे को पहचानने और इसे हराने के लिए मिलकर काम करेंगे।’
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‘मैंने कई इजरायलियों को मार दिया’, नर्स के दावे के बाद ऑस्ट्रेलिया के अस्पतालों में मची खलबली – australia hospital examines patient records after nurse claims to have killed israelis antisemitic attacks
Last Updated:
Australia News: ऑस्ट्रेलिया में एक नर्स का वीडियो वायरल हुआ है, जिसके बाद देश के साथ ही पूरी दुनिया में खलबली मची हुई है. आरोपी नर्स इस वीडियो में इजरायल के नागरिकों की हत्या करने का दावा कर रही है.
ऑस्ट्रेलिया में एक नर्स ने इजरायली मरीजों की हत्या करने का दावा कर सनसनी मचा दी है. ऑस्ट्रेलिया में इजरायल विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं. (फोटो: AP)
हाइलाइट्स
- ऑस्ट्रेलिया में नर्स ने इजरायली मरीजों की हत्या करने का दावा किया है
- नर्स के दावों की जांच शुरू कर दी गई है, मरीजों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
- इजरायल-हमास युद्ध के बाद यहूदी विरोधी भावनाओं में आया है उभार
मेलबर्न (ऑस्ट्रलिया). ऑस्ट्रेलिया में बड़ी तादाद में अन्य देशों के लोग रहते हैं. इसे विभिन्न संस्कृतियों का संगम स्थल भी कहा जाता है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिससे इस भावना को चोट पहुंची है. इजरायल-हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद ऑस्ट्रेलिया में यहूदी विरोधी भावनाएं काफी बढ़ी हैं. अब न्यू साउथ वेल्स स्टेट में फिर से ऐसा ही मामला समाने आया है. एक अस्पताल में तैनात नर्स ने दावा किया है कि उसने इजरायली नागरिकों की हत्या की है. नर्स के दावे से देशभर में सनसनी फैल गई है. न्यू साउथ वेल्स के हेल्थ डिपार्टमेंट ने नर्स के दावे की जांच करने की बात कही है. साथ ही संबंधित हॉस्पिटल में मरीजों का रिकॉर्ड भी चेक किया जाएगा.
ऑस्ट्रेलिया अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि एक नर्स द्वारा इजरायलियों को मारने का ऑनलाइन दावा किए जाने के बाद अस्पताल मरीजों के रिकॉर्ड की जांच कर रहा है. हालांकि, अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि मरीजों को नुकसान पहुंचाने का कोई सबूत सामने नहीं आया है. नर्स का यह दावा यहूदी विरोधी हमलों और बयानबाजी में सबसे नया है, जिसने ऑस्ट्रेलिया को हिलाकर रख दिया है. बता दें कि पिछले एक साल से कुछ ज्यादा समय से ऑस्ट्रेलिया में यहूदी विरोधी भावनाओं में वृद्धि हुई है. समुदाय से जुड़े लोगों के घरों, कार्यालयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की गई है. यहूदियों को निशाना बनाने वाले अपराधों के साथ एक स्कूल और दो सिनेगॉग (यहूदी धर्मस्थल) को आग के हवाले तक कर दिया गया है.
आरोपी नर्स सस्पेंड
सिडनी के बैंकस्टाउन अस्पताल में मंगलवार को रात की पाली के दौरान इजरायली इन्फ्लुएंसर मैक्स वीफ़र के साथ ऑनलाइन चर्चा में भाग लेने वाली दो नर्सों को बुधवार को सस्पेंड कर दिया गया. हेल्थ मिनिस्टर पार्क ने कहा कि वे फिर कभी स्टेट हेल्थ डिपार्टमेंट के लिए काम नहीं करेंगी. पार्क ने इन नर्सो पर टिप्पणी करते हुए उन्हें नीच, घृणित और विक्षिप्त बताया है. ऑस्ट्रेलिया में एक यहूदी संगठन के अधिकारी एलेक्स रिव्चिन ने जोर देकर कहा कि सिडनी के यहूदी समुदाय के प्रति ऑस्ट्रेलिया के मेडिकल प्रैक्टिशनर के बीच नफरत और अतिवाद बढ़ रहा है.
पुलिस स्ट्राइक फोर्स
न्यू साउथ वेल्स स्टेट के स्वास्थ्य मंत्री रयान पार्क ने बताया कि साल 2023 में इजराइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से सिडनी में यहूदी विरोधी अपराधों पर खास तौर से निपटने के लिए पुलिस स्ट्राइक फोर्स का गठन किया गया है. यह टीम हेट स्पीच कानून का उल्लंघन सहित ऑनलाइन वीडियो के चलते हुए अपराधों की जांच करती है. बता दें कि सिडनी और मेलबर्न में 85 फीसद यहूदी रहते हैं.
New Delhi,Delhi
February 13, 2025, 16:03 IST
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