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वैज्ञानिकों ने न्यूक्लियर कचरे से बिजली बनाने का तरीका खोजा.
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न्यूक्लियर पावर से लगभग जीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन होता है, लेकिन इसके साथ रेडियोधर्मी कचरे की समस्या भी पैदा होती है. एक नए अध्ययन में इस कचरे का दोबारा उपयोग करने का एक तरीका वैज्ञानिकों ने सोचा है. इसके तहत…और पढ़ें
अब न्यूक्लियर वेस्ट से बैटरी बनेगी. (प्रतीकात्मक फोटो: Canva)
इंसान ने दुनिया को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. सदियों से हमने अपनी गलतियों, आविष्कारों से इस धरती को नष्ट ही किया है. अब वैज्ञानिक एक ऐसा कदम उठाने जा रहे हैं, जिसका क्या असर होगा, वो तो वैज्ञानिक ही बेहतर जानते हैं, पर सुनकर आप दंग जरूर हो जाएंगे. एक रिपोर्ट के अनुसार अब वैज्ञानिक एक ऐसे पदार्थ के कचरे से बिजली बनाएंगे, जिसकी वजह से दुनिया में तबाही आ सकती है.
न्यूक्लियर पावर से लगभग जीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन होता है, लेकिन इसके साथ रेडियोधर्मी कचरे की समस्या भी पैदा होती है. एक नए अध्ययन में इस कचरे का दोबारा उपयोग करने का एक तरीका वैज्ञानिकों ने सोचा है. इसके तहत वो माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बैटरी को तैयार करेंगे. इस बैटरी को बनाने के लिए रेडियोएक्टिव वेस्ट का प्रयोग किया जाएगा.
अमेरिका के शोधकर्ताओं ने न्यूक्लियर कचरे से निकलने वाली गामा रेडिएशन का उपयोग करके माइक्रोचिप्स चलाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा उत्पन्न की. इस प्रकार की पावर फिलहाल छोटे सेंसर तक सीमित है, लेकिन टीम का मानना है कि इसे बढ़ाया जा सकता है. ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के न्यूक्लियर इंजीनियर रेमंड काओ कहते हैं, “हम कुछ ऐसा इकट्ठा कर रहे हैं जिसे कचरा माना जाता है, और स्वाभाविक रूप से, इसे खजाने में बदलने की कोशिश कर रहे हैं.”
वर्तमान में दुनिया की लगभग 10 प्रतिशत ऊर्जा की मांग न्यूक्लियर पावर से पूरी होती है, जो पारंपरिक रूप से उपयोग किए जाने वाले जीवाश्म ईंधनों का एक विकल्प है. अगर वैज्ञानिक इसके कचरे का उपयोग करने में सक्षम हो जाते हैं, तो यह एक बेहतर विकल्प बन सकता है. न्यूक्लियर बैटरियां, जो रेडियोधर्मी क्षय को बिजली में बदलती हैं, दशकों से विकास में हैं, लेकिन यह तकनीक अभी तक व्यावहारिक रूप से उपयोगी नहीं हो पाई है.
यहां, ऊर्जा दो चरणों में उत्पन्न की गई: पहले, स्किंटिलेटर क्रिस्टल ने विकिरण को प्रकाश में बदल दिया, और फिर सोलर सेल ने इस प्रकाश को बिजली में बदल दिया. प्रोटोटाइप बैटरी का आकार लगभग 4 घन सेंटीमीटर (0.24 घन इंच) था. जब इसे दो रेडियोधर्मी स्रोतों, सीज़ियम-137 और कोबाल्ट-60 जो न्यूक्लियर फिशन से सामान्य कचरे के उत्पाद हैं, के साथ परीक्षण किया गया, तो बैटरी ने क्रमशः 288 नैनोवाट और 1.5 माइक्रोवाट उत्पन्न किए. ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के एयरोस्पेस इंजीनियर इब्राहिम ओक्सुज कहते हैं, “पावर आउटपुट के मामले में ये महत्वपूर्ण परिणाम हैं.” उन्होंने कहा- “यह दो-चरणीय प्रक्रिया अभी भी अपने प्रारंभिक चरण में है, लेकिन अगला कदम बड़े पैमाने पर निर्माण के साथ अधिक वाट उत्पन्न करना है.”
March 11, 2025, 18:38 IST
जिस चीज से दुनिया में मच सकती है तबाही, उसी के कचरे से बिजली बनाएंगे वैज्ञानिक
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‘हाय कितना क्यूट है ये’, हुडी में लड़का गा रहा था रैप, महफिल लूट गए लाल जैकेट वाले के एक्सप्रेशन
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खूबसूरत वादियों में बैठे हुए एक पीले हुडी वाला बच्चा ‘तू है कहां’ गाने को एक सांस में गा रहा है. बच्चे के टैलेंट का वीडियो तो वायरल हो रहा है लेकिन इसमें महफिल लूटने का काम उसके बगल बैठा दोस्त कर रहा है.
बच्चों का क्यूट वीडियो हुआ वायरल. (Credit- Instagram/jp_negi_travelholic )
देश-दुनिया के कोने-कोने में टैलेंट बिखरा हुआ है. पहले जहां हम ज्यादातर लोगों को जान नहीं पाते थे, वहीं सोशल मीडिया के ज़माने में मिनटों में इंसान का टैलेंट पूरी दुनिया में छा जाता है. सिर्फ कुछ सेकंड का वीडियो वायरल हो जाता है और जिसे कोई नहीं जानता था, उसे हर कोई जान जाता है. इस वक्त एक ऐसा ही छोटे बच्चे का वीडियो वायरल हो रहा है.
खूबसूरत वादियों में बैठे हुए एक पीले हुडी वाला बच्चा ‘तू है कहां’ गाने को एक सांस में गा रहा है. बच्चे के टैलेंट का वीडियो तो वायरल हो रहा है लेकिन इसमें महफिल लूटने का काम उसके बगल बैठा दोस्त कर रहा है. हिमाचल प्रदेश के एक छोटे बच्चे का वीडियो चर्चा में है, जिसमें वह ज़ैन (ZAYN) के गाने ‘तू है कहां’ को गा रहा है.
महफिल लूट गया ‘दोस्त’
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक छोटा सा बच्चा ‘Tu Hai Kahan’ गा रहा है. वहीं उसके साथ उसका दोस्त भी लाल रंग की जैकेट पहनकर बैठा हुआ है. लोगों को मासूम बच्चे का ये अंदाज इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे वीडियो का बेस्ट पार्ट बताया है. बच्चा अपने दोस्त को हाइप करने के लिए इतने ज़बरदस्त एक्सप्रेशन दे रहा है कि देखने वाले बिना उसे प्यार किए नहीं रह पाएंगे.
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जिम में ही कसरत करते हुए कर सकेंगे सालसा डांस, नहीं देनी होगी अलग से फीस, मशीन ने दिया आइडिया!
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gym salsa machine: एक अनोखे वीडियो में जिम में कसरत कर रहा शख्स सालसा डांस करता दिख रहा है. लोगों को इस तरह की मशीन खूब पसंद आई है. कोई इसे डांस करने के लिए हासिल करना चाहता है तो कोई कमर और पीठ दोनों की कसरत क…और पढ़ें
लोगों को यह मशीन कई कारणों से पसंद आ रही है. (तस्वीर: Instagram video grab)
क्या आप जिम में कसरत करने से बोर हो जाते हैं? या क्या आपको जिम और डांस में से किसी एक को चुनना पड़ रहा है? क्या आप चाहते हैं कि जिम में कसरत करते हुए डांस भी कर सकें? लेकिन उसके लिए आपको अलग से पैसे ना देने पड़ें? सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो ने आपकी ऐसी समस्याओं का अनूठा हल निकाला है. इसमें एक ऐसी मशीन दिखाई गई है जिसमें जिम में कसरत करते समय ही आपकी डांस करने की हसरत पूरी हो सकती है. डांस भी ऐसा वैसा नहीं, मशीन आपको सालसा डांस कराएगी.
बिलकुल सालसा डांस!
जी हां जिम कि इस मशीन को ऐसा डिजाइन किया गया है जिसमें एक शख्स वैसे तो जिम में साइकिल मशीन की तरह पैर चला रहा है. लेकिन उसके शरीर की गतिविधि सालसा डांस के स्टेप्स की तरह दिखाई देती है. बैकग्राउंड म्यूजिक भी वीडियो में ऐसा तड़का लगा रहा है कि अगर गौर से ना देखा गया तो लगेगा कि कोई सालसा डांस ही कर रहा है.
कैसे काम करती है ये मशीन?
वीडियो में एक शख्स जिम में एक अनोखी मशीन पर पैर चला रहा है जिसके साथ उसके शरीर के मूवमेंट्स डांस की तरह लग रहे हैं. साइकिल मशीन में पैडल आम साइकिल के तरह आगे पीछे चलते हैं, लेकिन इस मशीन में पैडल की दिशा कुछ अलग है. इसमें आपको पैडल दायें से बायें घुमाने होंगे. बाकी मशीन का हिस्सा एक स्टेशनरी साइकिल की तरह है.
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OMG! ना ईंट-ना सीमेंट, भारत में खुली अनोखी फैक्ट्री, देख लोग रह गए दंग!
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गुड़गांव की Control Z फैक्ट्री, बांस और मिट्टी से बनी भारत की पहली फैक्ट्री है, जो पुराने फोन को नया बनाती है. फाउंडर युग भाटिया ने इसे सस्टेनेबिलिटी के तहत बनाया.
बांस की लकड़ियों और मिट्टी से बनी फैक्ट्री
हाइलाइट्स
- गुड़गांव में Control Z फैक्ट्री बांस और मिट्टी से बनी है.
- यह फैक्ट्री मोबाइल रिपेयरिंग का काम करती है.
- फैक्ट्री पर्यावरण के अनुकूल और सस्टेनेबल मटेरियल से बनी है.
दिल्ली: गुड़गांव में स्थित एक अनोखी फैक्ट्री Control Z इन दिनों काफी चर्चा में है. इस फैक्ट्री की खासियत यह है कि इसे पूरी तरह बांस और मिट्टी से बनाया गया है. भारत की यह पहली ऐसी फैक्ट्री है, जिसमें किसी भी तरह की ईंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया. खास बात यह है कि यह फैक्ट्री मोबाइल रिपेयरिंग का काम करती है, जहां पुराने फोन को नया बनाया जाता है.
कैसे आया यह अनोखा आइडिया?
Control Z के फाउंडर युग भाटिया ने बताया कि उनका काम सस्टेनेबिलिटी यानी पर्यावरण के अनुकूल समाधान पर आधारित है. वह पुराने फोन खरीदकर उन्हें रिपेयर कर नए जैसे फोन में बदलते हैं. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने फैसला किया कि उनकी फैक्ट्री भी सस्टेनेबल मटेरियल से बनाई जाए.
युग भाटिया ने कहा कि “हम जो काम कर रहे हैं, वह पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक कदम है. हम पुराने फोन को रिसाइकिल कर नया बना रहे हैं, तो क्यों न हमारी फैक्ट्री भी पूरी तरह इको-फ्रेंडली हो? इसी सोच के साथ हमने इस फैक्ट्री को बांस और मिट्टी से बनाने का फैसला किया.”
सबसे बड़ी चुनौती
युग भाटिया ने बताया कि, इस तरह की फैक्ट्री पहले कभी भारत में नहीं बनाई गई थी, इसलिए इसे बनाना एक बड़ी चुनौती थी. सबसे बड़ी दिक्कत मास्टर कारीगरों की कमी थी, क्योंकि इस तरह का निर्माण कार्य केवल पश्चिम बंगाल और असम के कुछ विशेषज्ञ ही कर सकते थे. उन्हें दिल्ली लाकर काम करवाना बेहद मुश्किल था.
इसके अलावा, उच्च गुणवत्ता वाले बांस की जरूरत थी, जो भारत में सिर्फ नॉर्थ-ईस्ट रीजन में मिलता है. इसे गुड़गांव तक लाना और संरचना तैयार करना भी एक चुनौतीपूर्ण काम था.
कैसा दिखता है यह अनोखा स्ट्रक्चर?
यह पूरी फैक्ट्री लकड़ी और मिट्टी से बनी है. इसकी दीवारें मिट्टी और बांस से बनाई गई हैं, जिससे गर्मी में ठंडक बनी रहती है और सर्दी में गर्माहट मिलती है. इस तरह का निर्माण प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करने का बेहतरीन उदाहरण है.
सस्टेनेबिलिटी की मिसाल
बांस और मिट्टी से बनी यह फैक्ट्री पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल है. यह परियोजना साबित करती है कि यदि सही सोच और प्रयास किए जाएं तो निर्माण के लिए पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाए जा सकते हैं. युग भाटिया का यह कदम भारत में सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन को बढ़ावा देने में एक मिसाल साबित हो सकता है.
Delhi Cantonment,New Delhi,Delhi
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