Connect with us

Internattional

Pakistan Train Hijack: बलूचिस्तान मतलब सोने की चिड़िया! BLA ने पाकिस्तानी ट्रेन हाईजैक क्यों किया, जानिए चीन कनेक्शन

Published

on

Last Updated:

Pakistan Train Hijack: बलूचिस्तान में बीएलए ने पाकिस्तानी जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक किया. बीएलए का मकसद बलूचिस्तान की आजादी है. पाक ने चीन को यहां पैर जमाने का मौका दिया है, इससे भी बलोच नाराज हैं.

सोने की चिड़िया...BLA ने पाक ट्रेन हाईजैक क्यों किया? जानिए चीन वाला कनेक्शन

बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तानी ट्रेन हाईजैक कर शहबाज सरकार की टेंशन बढ़ा दी.

हाइलाइट्स

  • बीएलए ने पाकिस्तानी जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक किया.
  • बलूचिस्तान में चीन के निवेश से बलोच नाराज हैं.
  • पाक ने चीन को बलूचिस्तान में 5000 एकड़ जमीन दी.

Pakistan Train Hijack: बलूचिस्तान पाकिस्तान का अशांत प्रांत है. बलूचिस्तान को सोने की चिड़िया भी कहते हैं. कारण यहां मौजूद मिनिरल्स के रूप में अकूत खजाना. अब उसी बलूचिस्तान में बलोच विद्रोहियों ने खलबली मचाई है. पाकिस्तानी जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को मंगलवार को बीएलए ने हाईजैक कर लिया. बीएलए का पूरा नाम है बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी. उसका मकसद है बलूचिस्तान की आजादी. यानी पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र देश-बलूचिस्तान. मगर पाकिस्तान बलूचिस्तान पर जबरन शासन करता है. उसके नेचुरल रिसोर्सेस का दोहन करता है. वह बलूचिस्तान को केवल चूसता है, बदले में कुछ नहीं देता. इसी नाराजगी की वजह है पाकिस्तान ट्रेन हाईजैक कांड. अब आप कहेंगे कि इसका चीन से क्या कनेक्शन है? तो इसे समझने के लिए कुछ घटनाक्रमों पर गौर करना होगा.

इसमें कोई शक नहीं है कि बलूचिस्तान प्राकृतिक संपदा से संपन्न इलाका है. पाकिस्तान को इसकी अहमियत पता है. बलूचिस्तान के खनिज-पदार्थों पर चीन की भी नजर है. इसलिए चीन इस इलाके में अपना पैर जमाना चाहता है. चीन पाकिस्तान को कर्ज के जाल में फंसाकर बलूचिस्तान का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहता है. यही बात बलोचों और बीएलए को नागवार गुजर रही है. बलोच चाहते हैं कि बलूचिस्तान एक स्वतंत्र देश रहे. उनकी जमीन पर न तो पाक और न ही चीन का हस्तक्षेप हो. तभी सालों से यहां आजादी की लड़ाई जारी है.

बीएलए का क्या है मकसद
ट्रेन पर जिस ग्रुप ने कब्जा किया है, वह है बीएलए. बीएलए का मकसद है बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद कराना. बलोच विद्रोहियों का कहना कि पाकिस्तानी सरकार बलूचिस्तान के विशाल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करती है और क्षेत्र में गंभीर मानवाधिकारों के हनन करती है. अब बलूचिस्तान की जमीन पर चीन के भी कदम पड़ चुके हैं. इस इलाके में चीन का बहुत बड़ा निवेश है. इसलिए बलूचिस्तान के ग्वादर में चीनी निवेश और सुरक्षा के लिए सैन्य उपस्थिति बढ़ाई गई है. बलूचिस्तान में चीन ने अपने लिए एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाया है. नाम है- न्यू ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट. न्यू ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पाकिस्तान का सबसे महंगा एयरपोर्ट है. इसे चीन ने 24 करोड़ डॉलर की लागत से बनाया है. यह अक्टूबर 2024 में बनकर तैयार हुआ, लेकिन अभी चालू नहीं हुआ.

बलोच उतार रहे पाक से चीन वाला गुस्सा
इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने चीन को बलूचिस्तान इलाके में 5 हजार एकड़ जमीन भी दे दी है. पाकिस्तान सरकार ने बीते दिनों ही दक्षिणी बलूचिस्तान में चीन की सेना को 5000 एकड़ से अधिक जमीन आवंटित किया. हालांकि इसके बदले पाकिस्तान ने चीन से उसे पूरे क्षेत्र का विकास करने का करार किया है. मगर यह सब ढकोसला है. यह बात बलोची लोग अच्छे से जान गए हैं. जब न्यू ग्वादर एयरपोर्ट बना तब भी यही कहा गया कि इससे बलूचिस्तान के लोगों को फायदा होगा. नौकरी मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. मगर ऐसा नहीं हुआ. यहां बाहरी लोगों को ही नौकरी-रोजगार मिला. इससे बलोच लोगों में खूब नाराजगी है. बीएलए को भी इन बातों का गुस्सा है. यही वजह है कि अब बीएलए पाकिस्तान सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं. इतना ही नहीं, पाक सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को भी जेल में बंद कर दिया गया है. बीएलए उनकी रिहाई की मांग कर रही है. इस कारण ही उसने ट्रेन को हाईजैक किया है.

बलूचिस्तान का चीन कनेक्शन

  • पाक ने बलूचिस्तान में चीन को न्यू ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने दिया.
  • पाक ने चीन को 5 हजार एकड़ जमीन दी.
  • लूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (CPEC) परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

पाक के लिए बलूचिस्तान क्यों अहम
अब सवाल है कि पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान इतना अहम क्यों है. तो इसकी सबसे बड़ी वजह है खजाना. जी हां, पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान बहुत अहम है क्योंकि यह देश का सबसे बड़ा प्रांत है. इसमें प्राकृतिक संसाधनों की बहुतायत है. बलूचिस्तान में तेल, गैस और खनिज संसाधनों के बड़े भंडार हैं. यह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. इतना ही नहीं, बलूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (CPEC) परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह पाकिस्तान और चीन के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए बनाई गई है. पाक सरकार का दावा है कि यह परियोजना पाकिस्तान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर प्रदान करने में मदद करेगी. मगर बलोचों का कहना है कि इससे उनकी किस्मत में कोई बदलाव नहीं होगा. बलूचिस्तान के लोगों का प्रतिनिधित्व वैसा नहीं है, जितने के वे हकदार हैं. यही वजह है कि यहां सालों से आजादी की लड़ाई चल रही है..

homeworld

सोने की चिड़िया…BLA ने पाक ट्रेन हाईजैक क्यों किया? जानिए चीन वाला कनेक्शन

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Internattional

PM Modi France Visit: मोदी को मिल गया पुतिन सा एक और यार, मैक्रों ने तो मन मोह लिया, देख लें सबूत

Published

on

Last Updated:

PM Modi France Visit: पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की दोस्ती गहरी हो रही है. फ्रांस दौरे पर मोदी का भव्य स्वागत हुआ और दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की.

मोदी को मिल गया पुतिन सा एक और यार, मैक्रों ने तो मन मोह लिया, खुद देख लीजिए

फ्रांस में दिखी पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की गहरी दोस्ती की झलक

हाइलाइट्स

  • पीएम मोदी का फ्रांस दौरे पर भव्य स्वागत हुआ.
  • मैक्रों ने पीएम मोदी के साथ गहरी दोस्ती दिखाई.
  • दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की.

नई दिल्ली: भारत-रूस की दोस्ती दशकों पुरानी है. समय-समय पर इसकी झलक दिखती रही है. इससे दुनिया भी वाकिफ है. पीएम मोदी ने पुतिन संग मिलकर उस दोस्ती के रंग को और गाढ़ा किया है. पुतिन की तरह ही अब पीएम मोदी को एक नया दोस्त मिला है. नाम है इमैनुएल मैक्रों. इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के राष्ट्रपति हैं. जी हां, जैसे रूस और भारत की दोस्ती के चर्चे होते हैं. अब वह दिन दूर नहीं, जब भारत-फ्रांस की दोस्ती के भी गीत गुनगुनाए जाएंगे. इसकी झलक पीएम मोदी के फ्रांस दौरे पर खूब दिखी. यहां मैक्रों ने मोदी की आवभगत में कोई कमी नहीं होने दी. फ्रांस में जहां-जहां मोदी गए, वहां-वहां साए की तरह साथ रहे.

दरअसल, कोई देश हमें कितनी इज्जत दे रहा है, यह उसकी आगवानी और हॉस्पिटालिटी के तरीकों पर निर्भर करता है. पीएम मोदी जब पेरिस एआई समिट के लिए फ्रांस गए तो वहां नजारा रूस वाला दिखा. पीएम मोदी की रूस की तरह ही फ्रांस में भी ग्रैंड वेलकम हुआ. खुद राष्ट्रपति मैक्रों पीएम मोदी के साथ पुतिन की तरह नजर आए.

समय और सम्मान की बात
जी हां, प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा का एक अनूठा पहलू था, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से उन्हें दिया गया समय और सम्मान. यह दोनों नेताओं की बेहतर आपसी समझ और गहरी दोस्ती को दर्शाता है. इसकी झलक पल-पल दिखी. यात्रा के पहले दिन राष्ट्रपति मैक्रों ने पीएम मोदी को डिनर कराया. रात्रिभोज में दोनों नेताओं ने बातचीत की. अगले दिन ‘एआई एक्शन समिट’ में भी यह सौहार्दपूर्ण माहौल जारी रहा. भारत और फ्रांस ने संयुक्त रूप से शिखर सम्मेलन की मेजबानी की.

Image

हर जगह साए की तरह थे
अपने घनिष्ठ संबंधों को दर्शाते हुए दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस सीईओ फोरम की मेजबानी की, जो आर्थिक सहयोग के लिए उनके साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है. दोस्ती के एक असाधारण संकेत में, दोनों नेता एक संयुक्त काफिले में और एक ही विमान में मार्सिले पहुंचे. राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए मार्सिले में रात्रिभोज की मेजबानी की. हर जगह साए की तरह मैक्रों मोदी के साथ दिखे.

मैक्रों ने मन मोह लिया
पीएम मोदी के लिए यूं तो सभी विश्व नेताओं ने सम्मान और महत्व दिखाया लेकिन जो निकटता और अपनापन मैक्रों ने दर्शाया उसका अन्य उदाहरण मिलना दुर्लभ है. मैक्रों दरअसल पीएम मोदी के दौरे को लेकर खासे उत्साहित थे. प्रधानमंत्री मोदी के पेरिस पहुंचने से पहले एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि वह और प्रधानमंत्री मोदी ‘तकनीकी संप्रभुता’ के लिए प्रयास करेंगे.

मैक्रों ने पीएम की तारीफ में क्या-क्या कहा?
फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी की तरह हमारा भी दृढ़ विश्वास है कि भारत और फ्रांस दो महान शक्तियां हैं और हमारे बीच विशेष संबंध हैं. हम अमेरिका का सम्मान करते हैं और उसके साथ काम करना चाहते हैं, हम चीन के साथ भी काम करना चाहते हैं, लेकिन किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं. मैक्रों ने कहा, ‘भारत और फ्रांस अग्रणी हैं लेकिन अमेरिका और चीन हमसे बहुत आगे हैं. हम एआई पर एक साथ काम करना चाहते हैं. पीएम मोदी भी नई टेक्नोलॉजी का फायदा उठाना चाहते हैं. लेकिन वह चाहते हैं कि यह भारत में भी हो.

homenation

मोदी को मिल गया पुतिन सा एक और यार, मैक्रों ने तो मन मोह लिया, खुद देख लीजिए

Continue Reading

Internattional

Tulsi Gabbard Interview; Bhagwat Geeta | Raisina Dialogue | तुलसी गबार्ड बोलीं-कृष्ण के उपदेश शक्ति और शांति देते हैं: अच्छे-बुरे पल में भगवत गीता पढ़ती हूं; भगवान के साथ रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र

Published

on

नई दिल्ली11 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
तुलसी गबार्ड रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत आई हैं। - Dainik Bhaskar

तुलसी गबार्ड रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत आई हैं।

अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने कहा कि वे कृष्ण भक्त हैं और अपनी जिंदगी के हर अच्छे-बुरे वक्त में वे भगवद गीता में दिए उपदेशों को पढ़ती हैं। अर्जुन को दिए कृष्ण के उपदेश उन्हें दिन भर शक्ति, शांति और आराम देते हैं।

तुलसी रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत आई हैं। उससे पहले उन्होंने ANI को दिए इंटरव्यू में ये बातें कहीं…

अध्यात्म, गीता और भारत पर तुलसी की 3 मुख्य बातें…

भगवान के साथ मेरा रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र: तुलसी ने कहा कि मेरी आध्यात्मिक यात्रा और भगवान के साथ मेरा रिश्ता मेरे जीवन का केंद्र है। मैं रोज यही कोशिश करती हूं कि ऐसी जिंदगी जी सकूं जो भगवान के हिसाब से बेहतर हो। और भगवान के सभी बच्चों की सेवा कर पाने से बेहतर तरीका क्या हो सकता है।

भगवत गीता के उपदेशों से मूल्यवान सीख मिलती है: मेरी जिंदगी के अलग-अलग समय में, चाहे मैं वॉर जोन रहूं या आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, हर समय में कृष्ण के उपदेश से मुझे हर बार कोई मूल्यवान सीख मिलती है। इससे मुझे सब तरह के दिनों में शांति, शक्ति और सुकून मिलता है।

भारत आकर लगता है जैसे घर आ गई हूं: तुलसी ने कहा कि भारत से मुझे बहुत प्यार है। मैं जब भी यहां आती हूं तो लगता है कि अपने ही घर आई हूं। यहां के लोग बहुत दयालु हैं और प्यार से स्वागत करते हैं। यहां का खाना हमेशा स्वादिष्ट लगता है। दाल मखनी और ताजा पनीर से बनाई गई हर चीज बहुत लजीज होती है।

तुलसी ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमलों को इस्लामी आतंक कहा

भारत में लगातार हो रहे पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमलों को तुलसी ने इस्लामी आतंक बताया। उन्होंने कहा कि ये भारत और अमेरिका समेत कई मिडिल ईस्ट देशों पर भी खतरा बनता जा रहा है।

तुलसी ने कहा, ‘राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस्लामी आतंक से लड़ने के अपने वादे को लेकर बहुत साफ हैं। इस आतंक ने हमें घेर लिया है और लगातार अमेरिकी लोगों पर खतरा बना हुआ है। ये भारत, बांग्लादेश में लोगों को प्रभावित करता रहा है और मौजूदा समय में सीरिया, इजराइल और मिडिल ईस्ट के कई देशों में लोगों पर असर डाल रहा है। मुझे पता है पीएम मोदी इस खतरे को बहुत गंभीरता से लेते हैं। दोनों नेता इस खतरे को पहचानने और इसे हराने के लिए मिलकर काम करेंगे।’

खबरें और भी हैं…
Continue Reading

Internattional

‘मैंने कई इजरायलियों को मार दिया’, नर्स के दावे के बाद ऑस्ट्रेलिया के अस्पतालों में मची खलबली – australia hospital examines patient records after nurse claims to have killed israelis antisemitic attacks

Published

on

Last Updated:

Australia News: ऑस्‍ट्रेलिया में एक नर्स का वीडियो वायरल हुआ है, जिसके बाद देश के साथ ही पूरी दुनिया में खलबली मची हुई है. आरोपी नर्स इस वीडियो में इजरायल के नागरिकों की हत्‍या करने का दावा कर रही है.

'मैंने कई इजरायलियों को मार दिया', नर्स के दावे के बाद ऑस्ट्रेलिया में खलबली

ऑस्‍ट्रेलिया में एक नर्स ने इजरायली मरीजों की हत्‍या करने का दावा कर सनसनी मचा दी है. ऑस्‍ट्रेलिया में इजरायल विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं. (फोटो: AP)

हाइलाइट्स

  • ऑस्‍ट्रेलिया में नर्स ने इजरायली मरीजों की हत्‍या करने का दावा किया है
  • नर्स के दावों की जांच शुरू कर दी गई है, मरीजों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
  • इजरायल-हमास युद्ध के बाद यहूदी विरोधी भावनाओं में आया है उभार

मेलबर्न (ऑस्‍ट्रलिया). ऑस्‍ट्रेलिया में बड़ी तादाद में अन्‍य देशों के लोग रहते हैं. इसे विभिन्‍न संस्‍कृतियों का संगम स्‍थल भी कहा जाता है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिससे इस भावना को चोट पहुंची है. इजरायल-हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद ऑस्‍ट्रेलिया में यहूदी विरोधी भावनाएं काफी बढ़ी हैं. अब न्‍यू साउथ वेल्‍स स्‍टेट में फिर से ऐसा ही मामला समाने आया है. एक अस्‍पताल में तैनात नर्स ने दावा किया है कि उसने इजरायली नागरिकों की हत्‍या की है. नर्स के दावे से देशभर में सनसनी फैल गई है. न्‍यू साउथ वेल्‍स के हेल्‍थ डिपार्टमेंट ने नर्स के दावे की जांच करने की बात कही है. साथ ही संबंधित हॉस्पिटल में मरीजों का रिकॉर्ड भी चेक किया जाएगा.

ऑस्‍ट्रेलिया अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि एक नर्स द्वारा इजरायलियों को मारने का ऑनलाइन दावा किए जाने के बाद अस्‍पताल मरीजों के रिकॉर्ड की जांच कर रहा है. हालांकि, अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि मरीजों को नुकसान पहुंचाने का कोई सबूत सामने नहीं आया है. नर्स का यह दावा यहूदी विरोधी हमलों और बयानबाजी में सबसे नया है, जिसने ऑस्ट्रेलिया को हिलाकर रख दिया है. बता दें कि पिछले एक साल से कुछ ज्‍यादा समय से ऑस्‍ट्रेलिया में यहूदी विरोधी भावनाओं में वृद्धि हुई है. समुदाय से जुड़े लोगों के घरों, कार्यालयों और व्‍यावसायिक प्रतिष्‍ठानों में तोड़फोड़ की गई है. यहूदियों को निशाना बनाने वाले अपराधों के साथ एक स्कूल और दो सिनेगॉग (यहूदी धर्मस्‍थल) को आग के हवाले तक कर दिया गया है.

आरोपी नर्स सस्‍पेंड
सिडनी के बैंकस्टाउन अस्पताल में मंगलवार को रात की पाली के दौरान इजरायली इन्फ्लुएंसर मैक्स वीफ़र के साथ ऑनलाइन चर्चा में भाग लेने वाली दो नर्सों को बुधवार को सस्‍पेंड कर दिया गया. हेल्‍थ मिनिस्‍टर पार्क ने कहा कि वे फिर कभी स्‍टेट हेल्‍थ डिपार्टमेंट के लिए काम नहीं करेंगी. पार्क ने इन नर्सो पर टिप्‍पणी करते हुए उन्‍हें नीच, घृणित और विक्षिप्त बताया है. ऑस्ट्रेलिया में एक यहूदी संगठन के अधिकारी एलेक्स रिव्चिन ने जोर देकर कहा कि सिडनी के यहूदी समुदाय के प्रति ऑस्ट्रेलिया के मेडिकल प्रैक्टिशनर के बीच नफरत और अतिवाद बढ़ रहा है.

पुलिस स्‍ट्राइक फोर्स
न्यू साउथ वेल्स स्‍टेट के स्वास्थ्य मंत्री रयान पार्क ने बताया कि साल 2023 में इजराइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से सिडनी में यहूदी विरोधी अपराधों पर खास तौर से निपटने के लिए पुलिस स्‍ट्राइक फोर्स का गठन किया गया है. यह टीम हेट स्‍पीच कानून का उल्‍लंघन सहित ऑनलाइन वीडियो के चलते हुए अपराधों की जांच करती है. बता दें कि सिडनी और मेलबर्न में 85 फीसद यहूदी रहते हैं.

homeworld

‘मैंने कई इजरायलियों को मार दिया’, नर्स के दावे के बाद ऑस्ट्रेलिया में खलबली

Continue Reading

TRENDING

Copyright © 2022 TenX News Network