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यूपी में यहां होली के दिन मनाते हैं शोक, 28 गांवों में पसर जाता है सन्नाटा, 700 साल पहले घटी यह घटना है वजह

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Holi 2025: डलमऊ क्षेत्र में होली के त्यौहार वाले दिन लोग शोक मनाते हैं. आज भी होली आते ही डलमऊ तहसील क्षेत्र के 28 गांव सूनसान पड़ जाते हैं. लोग यहां होली वाले दिन रंगों से खेलने के बजाय शोक मनाते हैं इसकी वजह 7…और पढ़ें

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रायबरेली

रायबरेली का डलमऊ कस्बा.

हाइलाइट्स

  • डलमऊ क्षेत्र के 28 गांवों में होली पर शोक मनाया जाता है.
  • 700 साल पहले राजा डल देव की मृत्यु के कारण शोक मनाते हैं.
  • महिलाएं इस दिन श्रृंगार नहीं करतीं, चार दिन बाद होली मनाते हैं.

 सौरभ वर्मा/रायबरेली : फाल्गुन यानी कि मार्च महीने की शुरुआत होते ही लोगों पर होली का खुमार सिर चढ़कर बोलने लगता है. पूरे देश में होली के लिए दो ही क्षेत्र अपनी परंपरा के लिए प्रसिद्ध हैं, जिनमें यूपी का बृज और अवध क्षेत्र है. जहां अनोखे ढंग से होली का उत्सव मनाया जाता है. वहीं अवध के रायबरेली जनपद के डलमऊ क्षेत्र में होली के त्यौहार वाले दिन लोग शोक मनाते हैं. आज भी होली आते ही डलमऊ तहसील क्षेत्र के 28 गांव सूनसान पड़ जाते हैं. लोग यहां होली वाले दिन रंगों से खेलने के बजाय शोक मनाते हैं. इसकी वजह 700 वर्ष पहले घटित हुई घटना है.

कस्बा डलमऊ के स्थानीय निवासी शिवकांत मिश्रा लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि  यह घटना लगभग 700 वर्ष पुरानी है. हमारे पूर्वज बताते थे कि डलमऊ के राजा डल देव एक बार गंगा नदी में नौका विहार कर रहे थे, तो उसी समय जौनपुर के मुगल शासक शाहशर्की की पुत्री सलमा भी नदी में नौका विहार करने आई हुई थी. उसी दौरान महाराज डलदेव को सलमा से मोहब्बत हो गई. जिसके बाद वह सलमा को अपनी पत्नी के रूप में अपने महल ले आए. लेकिन यह बात मुगल शासक को नागवार गुजरी.

होली का त्योहार नहीं मनाया जाता

इस बात का बदला लेने के लिए उसने कई बार डलमऊ किले पर आक्रमण किया, लेकिन वह असफल रहा. उसके बाद उसने मानिकपुर के राजा माणिक चंद्र से भेद नीति के तहत राजा डल देव को युद्ध में पराजित करने के लिए गुप्त जानकारी ली. तो उन्होंने बताया कि होली वाले दिन राजा डल देव अपनी प्रजा व सेना के साथ जश्न मानते हैं. इस दिन आक्रमण करने पर आप इन पर विजय प्राप्त कर सकेंगे. मुगल शासक ने होली वाले दिन डलमऊ पर आक्रमण कर दिया. मुगल सेना का सामना करने के लिए राजा डल देव भी अपने 200 सैनिकों के साथ युद्ध में कूद पड़े. मुगल शासकों की 2000 सेना का डटकर मुकाबला किया. लेकिन अपनी प्रजा की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया.

महिलाएं इस दिन नहीं करती श्रृंगार

डलमऊ नगर पंचायत के चेयरमैन प्रतिनिधि पंडित शुभम गौड़ बताते हैं कि सभी लोग अपने राजा की मौत पर शोक मनाते हैं. महिलाएं भी इस दिन श्रृंगार नहीं करती. साथ ही होलिका उत्सव के चार दिन बाद यह डलमऊ के 28 गांवों में होली का पर्व मनाया जाता है.

इन गांवों में चार दिन बाद लोग मानते हैं होली 

इतिहासकार डा. आरबी वर्मा बताते हैं कि डलमऊ तहसील क्षेत्र के मुर्शिदाबाद, नाथखेड़ा, पूरे नाथू, पूरे गडरियन नेवाजगंज सहित 28 गांव में होलिका उत्सव का त्योहार होली वाले दिन नहीं मनाया जाता है. क्योंकि इस दिन डलमऊ नगरी के संस्थापक महाराज डल देव युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे.

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यूपी में यहां होली के दिन मनाते हैं शोक, 28 गांवों में पसर जाता है सन्नाटा

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‘हाय कितना क्यूट है ये’, हुडी में लड़का गा रहा था रैप, महफिल लूट गए लाल जैकेट वाले के एक्सप्रेशन

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खूबसूरत वादियों में बैठे हुए एक पीले हुडी वाला बच्चा ‘तू है कहां’ गाने को एक सांस में गा रहा है. बच्चे के टैलेंट का वीडियो तो वायरल हो रहा है लेकिन इसमें महफिल लूटने का काम उसके बगल बैठा दोस्त कर रहा है.

'हाय कितना क्यूट है ये', हुडी में लड़का गा रहा था रैप, महफिल लूट गया दोस्त

बच्चों का क्यूट वीडियो हुआ वायरल. (Credit- Instagram/jp_negi_travelholic )

देश-दुनिया के कोने-कोने में टैलेंट बिखरा हुआ है. पहले जहां हम ज्यादातर लोगों को जान नहीं पाते थे, वहीं सोशल मीडिया के ज़माने में मिनटों में इंसान का टैलेंट पूरी दुनिया में छा जाता है. सिर्फ कुछ सेकंड का वीडियो वायरल हो जाता है और जिसे कोई नहीं जानता था, उसे हर कोई जान जाता है. इस वक्त एक ऐसा ही छोटे बच्चे का वीडियो वायरल हो रहा है.

खूबसूरत वादियों में बैठे हुए एक पीले हुडी वाला बच्चा ‘तू है कहां’ गाने को एक सांस में गा रहा है. बच्चे के टैलेंट का वीडियो तो वायरल हो रहा है लेकिन इसमें महफिल लूटने का काम उसके बगल बैठा दोस्त कर रहा है. हिमाचल प्रदेश के एक छोटे बच्चे का वीडियो चर्चा में है, जिसमें वह ज़ैन (ZAYN) के गाने ‘तू है कहां’ को गा रहा है.

महफिल लूट गया ‘दोस्त’
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक छोटा सा बच्चा ‘Tu Hai Kahan’ गा रहा है. वहीं उसके साथ उसका दोस्त भी लाल रंग की जैकेट पहनकर बैठा हुआ है. लोगों को मासूम बच्चे का ये अंदाज इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे वीडियो का बेस्ट पार्ट बताया है. बच्चा अपने दोस्त को हाइप करने के लिए इतने ज़बरदस्त एक्सप्रेशन दे रहा है कि देखने वाले बिना उसे प्यार किए नहीं रह पाएंगे.

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जिम में ही कसरत करते हुए कर सकेंगे सालसा डांस, नहीं देनी होगी अलग से फीस, मशीन ने दिया आइडिया!

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gym salsa machine: एक अनोखे वीडियो में जिम में कसरत कर रहा शख्स सालसा डांस करता दिख रहा है. लोगों को इस तरह की मशीन खूब पसंद आई है. कोई इसे डांस करने के लिए हासिल करना चाहता है तो कोई कमर और पीठ दोनों की कसरत क…और पढ़ें

जिम में कसरत करते हुए कर सकेंगे सालसा डांस, कमर पीठ की भी होगी वर्जिश, मशीन ने

लोगों को यह मशीन कई कारणों से पसंद आ रही है. (तस्वीर: Instagram video grab)

क्या आप जिम में कसरत करने से बोर हो जाते हैं? या क्या आपको जिम और डांस में से किसी एक को चुनना पड़ रहा है? क्या आप चाहते हैं कि जिम में कसरत करते हुए डांस भी कर सकें? लेकिन उसके लिए आपको अलग से पैसे ना देने पड़ें?  सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो ने आपकी ऐसी समस्याओं का अनूठा हल निकाला है. इसमें एक ऐसी मशीन दिखाई गई है जिसमें जिम में कसरत करते समय ही आपकी डांस करने की हसरत पूरी हो सकती है. डांस भी ऐसा वैसा नहीं, मशीन आपको सालसा डांस कराएगी.

बिलकुल सालसा डांस!
जी हां जिम कि इस मशीन को ऐसा डिजाइन किया गया है जिसमें एक शख्स वैसे तो जिम में साइकिल मशीन की तरह पैर चला रहा है. लेकिन उसके शरीर की गतिविधि सालसा डांस के स्टेप्स की तरह दिखाई देती है. बैकग्राउंड म्यूजिक भी वीडियो में ऐसा तड़का लगा रहा है कि अगर गौर से ना देखा गया तो लगेगा कि कोई सालसा डांस ही कर रहा है.

कैसे काम करती है ये मशीन?
वीडियो में एक शख्स जिम में एक अनोखी मशीन पर पैर चला रहा है जिसके साथ उसके शरीर के मूवमेंट्स डांस की तरह लग रहे हैं. साइकिल मशीन में पैडल आम साइकिल के तरह आगे पीछे चलते हैं, लेकिन इस मशीन में पैडल की दिशा कुछ अलग है. इसमें आपको पैडल दायें से बायें घुमाने होंगे. बाकी मशीन का हिस्सा एक स्टेशनरी साइकिल की तरह है.

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OMG! ना ईंट-ना सीमेंट, भारत में खुली अनोखी फैक्ट्री, देख लोग रह गए दंग!

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गुड़गांव की Control Z फैक्ट्री, बांस और मिट्टी से बनी भारत की पहली फैक्ट्री है, जो पुराने फोन को नया बनाती है. फाउंडर युग भाटिया ने इसे सस्टेनेबिलिटी के तहत बनाया.

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बांस

बांस की लकड़ियों और मिट्टी से बनी फैक्ट्री

हाइलाइट्स

  • गुड़गांव में Control Z फैक्ट्री बांस और मिट्टी से बनी है.
  • यह फैक्ट्री मोबाइल रिपेयरिंग का काम करती है.
  • फैक्ट्री पर्यावरण के अनुकूल और सस्टेनेबल मटेरियल से बनी है.

दिल्ली: गुड़गांव में स्थित एक अनोखी फैक्ट्री Control Z इन दिनों काफी चर्चा में है. इस फैक्ट्री की खासियत यह है कि इसे पूरी तरह बांस और मिट्टी से बनाया गया है. भारत की यह पहली ऐसी फैक्ट्री है, जिसमें किसी भी तरह की ईंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया. खास बात यह है कि यह फैक्ट्री मोबाइल रिपेयरिंग का काम करती है, जहां पुराने फोन को नया बनाया जाता है.

कैसे आया यह अनोखा आइडिया?
Control Z के फाउंडर युग भाटिया ने बताया कि उनका काम सस्टेनेबिलिटी यानी पर्यावरण के अनुकूल समाधान पर आधारित है. वह पुराने फोन खरीदकर उन्हें रिपेयर कर नए जैसे फोन में बदलते हैं. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने फैसला किया कि उनकी फैक्ट्री भी सस्टेनेबल मटेरियल से बनाई जाए.
युग भाटिया ने कहा कि “हम जो काम कर रहे हैं, वह पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक कदम है. हम पुराने फोन को रिसाइकिल कर नया बना रहे हैं, तो क्यों न हमारी फैक्ट्री भी पूरी तरह इको-फ्रेंडली हो? इसी सोच के साथ हमने इस फैक्ट्री को बांस और मिट्टी से बनाने का फैसला किया.”

सबसे बड़ी चुनौती
युग भाटिया ने बताया कि, इस तरह की फैक्ट्री पहले कभी भारत में नहीं बनाई गई थी, इसलिए इसे बनाना एक बड़ी चुनौती थी. सबसे बड़ी दिक्कत मास्टर कारीगरों की कमी थी, क्योंकि इस तरह का निर्माण कार्य केवल पश्चिम बंगाल और असम के कुछ विशेषज्ञ ही कर सकते थे. उन्हें दिल्ली लाकर काम करवाना बेहद मुश्किल था.
इसके अलावा, उच्च गुणवत्ता वाले बांस की जरूरत थी, जो भारत में सिर्फ नॉर्थ-ईस्ट रीजन में मिलता है. इसे गुड़गांव तक लाना और संरचना तैयार करना भी एक चुनौतीपूर्ण काम था.

कैसा दिखता है यह अनोखा स्ट्रक्चर?
यह पूरी फैक्ट्री लकड़ी और मिट्टी से बनी है. इसकी दीवारें मिट्टी और बांस से बनाई गई हैं, जिससे गर्मी में ठंडक बनी रहती है और सर्दी में गर्माहट मिलती है. इस तरह का निर्माण प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करने का बेहतरीन उदाहरण है.

सस्टेनेबिलिटी की मिसाल
बांस और मिट्टी से बनी यह फैक्ट्री पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल है. यह परियोजना साबित करती है कि यदि सही सोच और प्रयास किए जाएं तो निर्माण के लिए पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाए जा सकते हैं. युग भाटिया का यह कदम भारत में सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन को बढ़ावा देने में एक मिसाल साबित हो सकता है.

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